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महाराष्ट्र के कल्याण में आवारा कुत्तों का भीषण आतंक: 24 घंटे में 160 से अधिक लोगों को काटा

खड़कपाड़ा में मची दहशत, 11 साल की मासूम मुंबई स्थानांतरित

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित कल्याण (Kalyan) शहर में आवारा कुत्तों द्वारा नागरिकों पर हमले की एक दिल दहला देने वाली और भयावह घटना सामने आई है। रविवार दोपहर से सोमवार दोपहर के बीच महज 24 घंटे की समयावधि में शहर के विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों ने तांडव मचाते हुए 160 से अधिक लोगों को काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया इस अचानक हुए हमले और एक रेबीज पीड़ित बताए जा रहे सफेद कुत्ते की आक्रामकता से पूरे शहर में खौफ और नागरिक आक्रोश फैल गया है।
हमले का शिकार होने वालों में रोजमर्रा के काम से निकले पैदल राहगीर, दोपहिया वाहन चालक, ऑटो-रिक्शा यात्री और सोसाइटियों के बाहर मौजूद बच्चे व बुजुर्ग शामिल हैं। सबसे हृदयविदारक मामला एक 11 वर्ष की बच्ची का सामने आया है, जिसे कुत्ते ने इतनी क्रूरता से नोचा कि उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद मुंबई के सायन स्थित लोकमान्य तिलक म्यूनिसिपल जनरल अस्पताल (Sion Hospital) में विशेषज्ञ बाल शल्य चिकित्सक की देखरेख में स्थानांतरित करना पड़ा।
अधिकारियों ने बताया कि सफेद रंग का एक आक्रामक आवारा कुत्ता रविवार दोपहर करीब 2 बजे संदीप होटल इलाके में अचानक हिंसक हो उठा। कुत्ते ने सड़क पर चल रहे लोगों को निशाना बनाने के साथ-साथ चलती मोटरसाइकिलों और ऑटो-रिक्शा के अंदर झपटकर लोगों को काटना शुरू कर दिया। अकेले आधारवाड़ी और संदीप होटल क्षेत्र के बीच इस कुत्ते ने देखते ही देखते 60 से अधिक लोगों को काट लिया।
मुख्य मार्ग से होकर यह कुत्ता पास की संकरी गलियों, आवासीय परिसरों, पुराने आरटीओ कार्यालय (Old RTO Office) मार्ग और भोईरवाड़ी इलाकों में दाखिल हो गया। घटना के कारण बिर्ला कॉलेज रोड के आसपास रहने वाले परिवारों में इतना डर बैठ गया कि रविवार की छुट्टी होने के बावजूद लोगों ने खुद को घरों के अंदर कैद कर लिया और अपने बच्चों को सोसाइटियों के खेल मैदानों व खुले पार्कों में जाने से सख्ती से रोक दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (KDMC) द्वारा संचालित रुक्मिणीबाई अस्पताल (Rukminibai Hospital) में कुत्ता काटने से घायल हुए मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में स्ट्रेचर पर घायलों का तांता लगा रहा।
रुक्मिणीबाई अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप पगारे और डॉ. मोहम्मद अनीस ने बताया कि मरीजों को उनके घावों की गंभीरता (Category II और Category III Bites) के आधार पर विभाजित कर इलाज दिया जा रहा है। जिन मरीजों के शरीर पर गहरे दांतों के निशान और खून बहने वाले घाव हैं, उन्हें तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के साथ-साथ रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) के लाइफ-सेविंग इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।
शहर में आवारा कुत्ते का हमला इस कदर बेकाबू हो गया कि रात होते-होते कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। हमले की भयावहता को देखते हुए खड़कपाड़ा पुलिस स्टेशन (Khadakpada Police Station) और महात्मा फुले पुलिस स्टेशन (Mahatma Phule Police Station) की पुलिस टीमें दलबल के साथ सड़कों पर उतरीं। पुलिस वाहनों के लाउडस्पीकरों के जरिए गश्त करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने और बेवजह बाहर न निकलने की चेतावनी दी गई।
स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय शिवसेना (यूबीटी) के पूर्व पार्षद उमेश बोरगांवकर, अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और स्थानीय युवा डंडों और जालों के साथ कुत्ते की तलाश में देर रात तक गलियों में खाक छानते नजर आए। चूंकि कुत्ता अत्यधिक आक्रामक था और लगातार एक इलाके से दूसरे इलाके में भाग रहा था, इसलिए उसे पकड़ने में केडीएमसी के डॉग-कैचिंग स्क्वाड (Dog Catching Squad) को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
इस अभूतपूर्व घटना के बाद कल्याण के नागरिकों में कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (KDMC) के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब दोपहर 2 बजे के करीब पहले 10-15 लोगों को कुत्ते ने काटा, तो तुरंत केडीएमसी के आपातकालीन कंट्रोल रूम को फोन मिलाए गए। लेकिन रविवार का दिन होने का हवाला देकर शुरुआत में कंट्रोल रूम ने कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे कुत्ते को 6-7 घंटे तक पूरे शहर में तांडव मचाने का खुला मौका मिल गया।
स्थानीय निवासियों ने केडीएमसी के डॉग स्टरलाइजेशन (नसबंदी) केंद्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। निवासियों का कहना है कि कागजों पर आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आवारा कुत्तों की आबादी लगातार बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी इस नसबंदी केंद्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं के चलते एक प्रशासनिक कर्मचारी को निलंबित किया गया था।
आक्रोश और मामले के मीडिया में तूल पकड़ने के बाद केडीएमसी प्रशासन हरकत में आया केडीएमसी आयुक्त अभिनव गोयल और महापौर हर्षली थविल ने पत्रीपुल (Patripul) स्थित म्यूनिसिपल डॉग स्टरलाइजेशन एंड वैक्सीनेशन सेंटर का औचक निरीक्षण किया।
महापौर हर्षली थविल ने कहा:
“घटना बेहद दुखद है। नगर निगम की विशेष टीमें रात से ही हमलावर कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चला रही हैं। पकड़े गए सभी कुत्तों को पृथक (Isolate) करके रेबीज रोधी टीके लगाए जा रहे हैं। नसबंदी अभियान को और अधिक तेज करने के स्पष्ट निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।”
कल्याण शहर में हुई इस दिल नहला देने वाली घटना ने एक बार फिर पूरे देश में शहरी निकायों द्वारा आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण (ABC Rules) और रेबीज प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी है। 24 घंटे के भीतर 160 से अधिक नागरिकों का लहूलुहान होना यह साबित करता है कि प्रशासनिक लापरवाही इंसानी जिंदगी पर कितनी भारी पड़ सकती है। इस घटना के बाद अब नागरिकों की मांग है कि केडीएमसी न केवल हमलावर कुत्ते को तुरंत नियंत्रित करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए।

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