राजनीतिराष्ट्रीय

बाली विधानसभा चुनाव 2026: डॉन बॉस्को स्कूल में EVM संकट और जन-आक्रोश

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: 'दीदी' बनाम 'भाजपा'

29 अप्रैल, 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के दौरान हावड़ा जिले की बाली (Bali) विधानसभा सीट चर्चा का केंद्र बन गई। लिलुआ स्थित डॉन बॉस्को लिलुआ सहनलाल स्कूल (Don Bosco Liluah Sahanlal School) में मतदान प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न हुई अफरा-तफरी ने न केवल स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए, बल्कि मतदाताओं के सब्र की परीक्षा भी ली। ईवीएम (EVM) में आई तकनीकी खराबी ने एक शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया को हिंसक तनाव में बदल दिया, जिसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा।

बाली के लिलुआ क्षेत्र में स्थित डॉन बॉस्को स्कूल एक प्रमुख मतदान केंद्र है, जहाँ सुबह 7 बजे से ही मतदाताओं का भारी हुजूम उमड़ा था। 91% से अधिक के संभावित मतदान को देखते हुए लोगों में जबरदस्त उत्साह था। सुबह लगभग 8:30 बजे, मतदान केंद्र संख्या 153 के भीतर मौजूद ईवीएम मशीन ने काम करना बंद कर दिया। पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) ने तुरंत तकनीकी टीम को सूचित किया, लेकिन मरम्मत में उम्मीद से अधिक समय लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, मशीन को चालू करने के तीन असफल प्रयास किए गए। इस दौरान मतदान पूरी तरह ठप रहा। चिलचिलाती धूप में घंटों खड़े रहने के कारण मतदाताओं का धैर्य जवाब देने लगा। जब मतदाताओं को लगा कि उनकी वोटिंग में जानबूझकर देरी की जा रही है, तो उन्होंने स्कूल परिसर के बाहर और भीतर नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ बाहरी तत्वों ने भीड़ को उकसाना शुरू कर दिया।

स्थिति को हाथ से निकलता देख वहां तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और स्थानीय पुलिस ने मोर्चा संभाला। भीड़ को नियंत्रित करने और मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार को सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा बलों को हल्के बल का प्रयोग (Lathi Charge) करना पड़ा। सुरक्षा बलों ने उन लोगों को घेरे से बाहर निकाला जो मतदान प्रक्रिया में बाधा डाल रहे थे।

हावड़ा पुलिस आयुक्तालय (Howrah Police Commissionerate) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने ईवीएम खराबी का फायदा उठाकर मतदाताओं को भड़काने और सुरक्षा कर्मियों पर पथराव करने की कोशिश की थी। घटना के आधे घंटे के भीतर हावड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अतिरिक्त बलों के साथ मौके पर पहुँचे और पूरे स्कूल परिसर को छावनी में बदल दिया गया।

डॉन बॉस्को स्कूल की घटना अकेली नहीं थी। बाली विधानसभा के अन्य क्षेत्रों से भी गड़बड़ी की खबरें आईं:

बूथ संख्या स्थान घटना का स्वरूप
152 लिलुआ क्षेत्र वीवीपीएटी (VVPAT) में पर्ची न कटने की शिकायत।
153 डॉन बॉस्को स्कूल मुख्य ईवीएम विफलता (जहाँ बवाल हुआ)।
154 सहनलाल स्कूल परिसर मतदान की गति बेहद धीमी होने के कारण प्रदर्शन।

इन तकनीकी बाधाओं के कारण बाली में मतदान की औसत गति अन्य निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में शुरुआत में धीमी रही, जिसे बाद में अतिरिक्त समय देकर कवर किया गया।

बाली में हुए इस बवाल ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित तत्व जानबूझकर उन क्षेत्रों में ईवीएम खराब करवा रहे हैं जहाँ टीएमसी का मजबूत जनाधार है। भाजपा के स्थानीय उम्मीदवार ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि टीएमसी हार के डर से तकनीकी खामियों को साजिश का रूप दे रही है। उन्होंने चुनाव आयोग से बाली के संवेदनशील बूथों पर पुनर्मतदान (Repolling) की मांग की।

हावड़ा जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस कमिश्नर ने शाम को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट की। अधिकारियों ने बताया कि खराब मशीनों को 90 मिनट के भीतर बदल दिया गया था। सेक्टर अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे हर घंटे मशीनों की कार्यक्षमता की रिपोर्ट दें। प्रशासन ने उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया जो तकनीकी खराबी के दौरान कतार में लगे थे। गिरफ्तार किए गए दो व्यक्तियों के राजनीतिक संबंधों और उनके पास से मिले संदिग्ध दस्तावेजों की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है।

बाली विधानसभा सीट हावड़ा जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक है। यहाँ का मतदाता ‘भद्रलोक’ संस्कृति और औद्योगिक श्रमिक वर्ग का मिश्रण है। इस बार बाली में भाजपा, टीएमसी और वाम-कांग्रेस गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है। ईवीएम खराबी और उसके बाद हुए बवाल ने मतदाताओं के ‘स्विंग’ (Swing) होने की संभावना बढ़ा दी है। बाली में शाम 6 बजे तक लगभग 89.45% मतदान दर्ज किया गया। उच्च मतदान और इस प्रकार के बवाल को अक्सर राजनीतिक विश्लेषक ‘परिवर्तन’ या ‘भारी ध्रुवीकरण’ का संकेत मानते हैं।

बाली के डॉन बॉस्को स्कूल में हुई घटना यह याद दिलाती है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, वह मानवीय चूक या तकनीकी खराबी से परे नहीं है। हालांकि, सुरक्षा बलों और पुलिस की तत्परता ने एक संभावित दंगे को रोक लिया और मतदान प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाया। अब सभी की नजरें 4 मई, 2026 के नतीजों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बाली की जनता ने इस हंगामे के बीच अपने विवेक से काम लिया है, या यह तनाव चुनावी परिणामों में किसी नए समीकरण को जन्म देगा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button