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डिजिटल क्रांति या प्रतीकों की जंग? जब ‘X’ ने बदला ईरान का इतिहास

प्रतीकों की अहमियत: पहचान की लड़ाई

इंटरनेट की दुनिया में अक्सर छोटे-छोटे बदलाव बड़े तूफान लेकर आते हैं। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कुछ ऐसा ही हुआ जिसने पूरी दुनिया, खासकर मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति में खलबली मचा दी। एलन मस्क के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म ‘X’ ने ईरान के आधिकारिक झंडे के इमोजी (Emoji) को बदल दिया है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद आए ‘लाल निशान’ वाले झंडे की जगह अब सदियों पुराने ऐतिहासिक ‘शेर और सूरज’ (Lion-and-Sun) वाले प्रतीक ने ले ली है।

यह बदलाव इतना गहरा है कि अब ईरान के सरकारी अधिकारियों और तस्नीम न्यूज़ जैसी सरकारी संस्थाओं के अकाउंट्स पर भी वही पुराना राजशाही दौर का प्रतीक दिखाई दे रहा है। आइए समझते हैं कि यह महज एक ‘इमोजी’ का बदलना है या इसके पीछे कोई बड़ी कूटनीति छिपी है।

किसी भी देश का झंडा उसकी पहचान और विचारधारा का सबसे बड़ा प्रतीक होता है। 1979 में जब ईरान में रूहल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में इस्लामी क्रांति हुई, तो उन्होंने शाह के दौर के ‘शेर और सूरज’ वाले झंडे को हटाकर बीच में एक लाल रंग का ‘अल्लाह’ शब्द जैसा दिखने वाला प्रतीक (Emblem) लगाया था। यह ‘नए ईरान’ की पहचान थी। अब, ‘X’ द्वारा पुराने प्रतीक को वापस लाना इस बात का संकेत है कि डिजिटल दुनिया में ईरान की मौजूदा सत्ता की पहचान को चुनौती दी जा रही है। ईरान में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों (Unrest) के बीच यह कदम उन प्रदर्शनकारियों के मनोबल को बढ़ा सकता है जो मौजूदा शासन से छुटकारा पाना चाहते हैं।

यह पहली बार है जब किसी ग्लोबल टेक कंपनी ने किसी संप्रभु देश (Sovereign State) के आधिकारिक प्रतीक को इस तरह बदला है। ईरान के अधिकारियों के लिए यह किसी अपमान से कम नहीं है। कल्पना कीजिए कि किसी देश के राष्ट्रपति के आधिकारिक हैंडल पर वह झंडा दिखे जिसे उनकी सरकार ने दशकों पहले अवैध घोषित कर दिया हो। एलन मस्क हमेशा से ‘फ्री स्पीच’ और स्थापित व्यवस्थाओं को चुनौती देने के लिए जाने जाते हैं। क्या यह उनका व्यक्तिगत फैसला है या ईरान के भीतर बढ़ते जनाक्रोश के प्रति एक समर्थन? यह सवाल भविष्य में ‘X’ के लिए कानूनी मुश्किलें भी खड़ा कर सकता है।

ईरान के इतिहास में ‘शेर और सूरज’ का प्रतीक केवल राजशाही का नहीं, बल्कि वहां की प्राचीन सभ्यता का हिस्सा रहा है। यह शक्ति, न्याय और गौरव का प्रतीक माना जाता था। प्रदर्शनकारियों के लिए यह प्रतीक उस ‘स्वतंत्र ईरान’ की याद दिलाता है जहाँ धर्म और राजनीति का मेल आज जैसा कट्टर नहीं था। जब डिजिटल प्लेटफॉर्म इस पुराने प्रतीक को बहाल करता है, तो वह अनजाने में ही सही, लेकिन उन लोगों की आवाज बन जाता है जो बदलाव की मांग कर रहे हैं।

ईरान में पिछले कुछ समय से महिलाएं और युवा अपनी आजादी के लिए सड़कों पर हैं। ‘X’ पर हुआ यह बदलाव इस बात को पुख्ता करता है कि अब क्रांतियां सड़कों के साथ-साथ ‘सर्वर’ पर भी लड़ी जा रही हैं। तस्नीम न्यूज़ जैसे आउटलेट्स, जो सरकार का पक्ष रखते हैं, उनके प्रोफाइल पर पुराने झंडे का दिखना उनके दावों को कमजोर करता है। यह एक तरह का ‘डिजिटल विरोध’ है जिसे रोकना फिलहाल ईरान के साइबर सेल के बस में नहीं दिख रहा।

यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है: क्या अब टेक कंपनियां तय करेंगी कि किस देश का झंडा क्या होगा?अगर आज ईरान के साथ ऐसा हुआ है, तो कल किसी और विवादित देश के मामले में भी ऐसा हो सकता है। यह ‘डिजिटल डिप्लोमेसी’ के एक नए युग की शुरुआत है जहाँ सोशल मीडिया कंपनियां किसी देश की सरकार से ज्यादा ताकतवर साबित हो रही

ईरान के झंडे का यह बदलाव केवल स्क्रीन पर दिखने वाला एक पिक्सेल नहीं है। यह उन लाखों ईरानियों की भावनाओं से जुड़ा है जो अपनी पहचान को फिर से परिभाषित करना चाहते हैं। हालांकि, यह देखना बाकी है कि ईरान सरकार इस ‘डिजिटल हमले’ का क्या जवाब देती है। क्या वे ‘X’ को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देंगे, या मस्क के सामने झुकने को मजबूर होंगे?

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