सत्ता, षड्यंत्र और सुलगते सवाल: एपस्टीन फाइल्स और अमेरिकी राजनीति का संकट
टेड लियू के आरोप: दावों का केंद्र और संदर्भ

अमेरिकी राजनीति के इतिहास में जेफरी एपस्टीन का मामला एक ऐसा काला अध्याय है, जिसने वाशिंगटन की सत्ता के उच्चतम स्तरों को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस सदस्य टेड लियू (Ted Lieu) द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर लगाए गए ताजा आरोप केवल एक राजनीतिक हमला नहीं हैं, बल्कि ये अमेरिकी लोकतंत्र की शुचिता और न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर एक गंभीर प्रहार हैं। चुनावी वर्ष 2026 की शुरुआत में इस विवाद का पुनरुत्थान यह संकेत देता है कि अमेरिका का राजनीतिक ध्रुवीकरण अब अपने चरम पर है।
जब न्याय विभाग (DOJ) ने ‘एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट’ के तहत लाखों पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक करने का निर्णय लिया, तो दुनिया को उम्मीद थी कि अब एपस्टीन के काले साम्राज्य के सभी संरक्षकों के नाम उजागर होंगे। लेकिन पारदर्शिता के इस प्रयास ने एक नए राजनीतिक युद्ध को जन्म दे दिया है। टेड लियू के “गंभीर कदाचार” के आरोपों ने ट्रंप प्रशासन के लिए एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस सदस्य टेड लियू, जो अपनी आक्रामक विधायी शैली के लिए जाने जाते हैं, ने आरोप लगाया है कि डोनाल्ड ट्रंप के एपस्टीन के साथ संबंध केवल “सामाजिक जान-पहचान” तक सीमित नहीं थे। लियू का दावा है कि न्याय विभाग द्वारा जारी 30 लाख से अधिक पन्नों के डिजिटल डेटाबेस में ट्रंप का उल्लेख हजारों बार है। उन्होंने विशेष रूप से ‘एपस्टीन जेट’ (जिसे लोलिता एक्सप्रेस कहा जाता था) की उड़ानों और एपस्टीन के पाम बीच स्थित आवास पर ट्रंप की उपस्थिति के विवरणों की ओर इशारा किया है। लियू ने आरोप लगाया कि वर्तमान न्याय विभाग ने “राजनीतिक दबाव” में आकर ट्रंप से जुड़े संवेदनशील पन्नों को अत्यधिक काला (Blacked out) कर दिया है, जिससे जनता को पूरी सच्चाई नहीं मिल पा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा की तरह इन आरोपों को “विच हंट” (Witch Hunt) और “चुनाव में हस्तक्षेप” करार दिया है। ट्रंप का तर्क है कि यदि इन फाइलों में कुछ भी गलत होता, तो यह वर्षों पहले ही सामने आ जाता। वे बार-बार यह दोहराते हैं कि उन्होंने एपस्टीन के साथ अपने संबंध वर्षों पहले (2004 में) ही तोड़ लिए थे और वे ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने जांच में सहयोग किया था। ट्रंप समर्थकों और रिपब्लिकन सांसदों ने तर्क दिया है कि टेड लियू जानबूझकर बिल क्लिंटन के नामों को अनदेखा कर रहे हैं, जिनका जिक्र भी इन फाइलों में प्रमुखता से है। रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि डेमोक्रेट्स अपनी साख बचाने के लिए ट्रंप को निशाना बना रहे हैं।
इस पूरे विवाद का सबसे विवादास्पद पहलू वह तकनीकी ‘ग्लिच’ (Glitch) है, जिसने न्याय विभाग की वेबसाइट से कुछ प्रमुख फाइलों को हटा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, वेबसाइट लाइव होने के कुछ ही घंटों बाद कम से कम 16 पीडीएफ फाइलें हटा ली गईं। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि इन फाइलों में ट्रंप और एपस्टीन की ऐसी तस्वीरें और गवाहों के बयान थे जो “चरित्र हनन” के लिए पर्याप्त थे। इस घटना ने अमेरिकी जनता के बीच यह संदेश दिया है कि न्याय विभाग अब एक निष्पक्ष संस्था नहीं रही। रिपब्लिकन इसे “अक्षमता” बताते हैं, जबकि डेमोक्रेट्स इसे “कवर-अप” (साजिश को दबाना) कहते हैं।
2026 का चुनावी वर्ष नीतियों से अधिक व्यक्तिगत नैतिकता पर केंद्रित होता जा रहा है। अमेरिका के स्वतंत्र मतदाता, जो अक्सर अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर मतदान करते हैं, अब इन चरित्र-आधारित आरोपों से प्रभावित हो सकते हैं। “गंभीर कदाचार” जैसे शब्द किसी भी राजनेता की छवि को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचा सकते हैं। फॉक्स न्यूज (Fox News) जहाँ इसे ट्रंप को फंसाने की साजिश बता रहा है, वहीं सीएनएन (CNN) और एमएसएनबीसी (MSNBC) लियू के आरोपों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी मान रहे हैं।
कानूनी रूप से, टेड लियू के आरोप अभी केवल ‘आरोप’ हैं। जब तक न्याय विभाग इन फाइलों के आधार पर कोई औपचारिक अभियोग (Indictment) नहीं चलाता, तब तक ट्रंप के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। कुछ कट्टरपंथी डेमोक्रेट्स ने इन फाइलों के आधार पर फिर से महाभियोग (Impeachment) की चर्चा शुरू कर दी है, हालांकि इसकी संभावना कम है। एफबीआई (FBI) ने इन फाइलों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जिससे रहस्य और अधिक गहरा गया है।
एपस्टीन फाइल्स का विवाद केवल डोनाल्ड ट्रंप के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि क्या अमेरिकी न्याय प्रणाली सभी के लिए समान है? टेड लियू के आरोप गंभीर हैं और उनकी अनदेखी करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि ये आरोप बिना किसी ठोस कानूनी आधार के केवल चुनावी लाभ के लिए लगाए गए हैं, तो यह राजनीतिक नैतिकता का पतन है।
अमेरिका के लिए यह समय आत्ममंथन का है। जब तक ‘एपस्टीन फाइल्स’ का एक-एक पन्ना बिना किसी काट-छाँट के जनता के सामने नहीं आता, तब तक यह विवाद एक नासूर की तरह अमेरिकी राजनीति को सड़ाता रहेगा। पारदर्शिता ही एकमात्र रास्ता है जिससे इस विवाद को हमेशा के लिए दफन किया जा सकता है।



