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ग्रैमी और गुरु: 90 वर्ष की आयु में दलाई लामा की ‘ध्वनि’ का वैश्विक अभिषेक

'Meditations' एल्बम: शब्दों में बुनी गई शांति का दर्शन

तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु, 14वें दलाई लामा को 90 वर्ष की परिपक्व आयु में उनके जीवन के पहले ग्रैमी अवार्ड (Grammy Award) से सम्मानित किया जाना वैश्विक संस्कृति और आध्यात्मिकता के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कारों के मंच पर जब ‘सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, नरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग’ की श्रेणी में उनके एल्बम ‘Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama’ की घोषणा हुई, तो यह केवल एक कलात्मक जीत नहीं थी, बल्कि यह उस अटूट वैश्विक प्रभाव की स्वीकृति थी जो उन्होंने पिछले छह दशकों में मानवता पर छोड़ा है।

लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें ग्रैमी समारोह में दुनिया भर के संगीत दिग्गजों की उपस्थिति में एक बौद्ध भिक्षु की आवाज़ को सर्वोच्च सम्मान मिलना यह सिद्ध करता है कि सच्ची ‘स्टोरीटेलिंग’ वही है जो आत्मा के भीतर तक उतर जाए। दलाई लामा का यह एल्बम, जो उनके गहन चिंतन और ध्यान अभ्यासों का संकलन है, आज के अशांत और डिजिटल शोर से भरे युग में एक ‘आध्यात्मिक मरहम’ (Spiritual Balm) के रूप में उभरा है।

यह एल्बम केवल संगीत या प्रवचन की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह एक अनुभव है। इसमें दलाई लामा की आवाज़ का वह कंपन (Resonance) है जो श्रोता को स्वतः ही अंतर्मुखी होने पर विवश कर देता है। इस एल्बम की सबसे बड़ी विशेषता इसका सादगी भरा ‘कथावाचन’ है। दलाई लामा अपनी सहज हँसी और गंभीर स्वर के साथ उन रहस्यों को खोलते हैं जो क्रोध, भय और चिंता से मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। एल्बम के केंद्र में ‘करुणा’ (Compassion), ‘पारस्परिक निर्भरता’ (Interdependence) और ‘मानसिक अनुशासन’ जैसे विषय हैं। यह श्रोताओं को सिखाता है कि कैसे बाहरी दुनिया की आपाधापी के बीच अपने भीतर एक ‘अजेय शांति’ का द्वीप बनाया जा सकता है।

ग्रैमी अवार्ड को संगीत और ध्वनि की दुनिया का ‘ऑस्कर’ माना जाता है। दलाई लामा का यहाँ तक पहुँचना उनके व्यक्तित्व के एक नए पहलू को उजागर करता है 90 वर्ष की आयु में भी दलाई लामा ने यह दिखाया है कि वे समय के साथ चलने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। पारंपरिक मठों और ग्रंथों से निकलकर पॉडकास्ट, ऑडियो बुक्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स तक पहुँचने की उनकी यह यात्रा प्रेरणादायक है। संगीत उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Meditations’ एल्बम ने ‘स्पोकन वर्ड’ (Spoken Word) श्रेणी को एक नई गरिमा प्रदान की है। यह दर्शाता है कि आवाज़ केवल धुन नहीं, बल्कि चेतना का वाहक भी है।

दलाई लामा की यह जीत उनकी दीर्घायु और निरंतर प्रासंगिकता का उत्सव है। 1959 में तिब्बत से निर्वासन के बाद से उन्होंने कभी भी हिंसा या प्रतिशोध का मार्ग नहीं चुना। नोबेल शांति पुरस्कार से लेकर ग्रैमी तक, उनके सम्मानों की सूची यह बताती है कि दुनिया उन्हें केवल एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि एक ‘वैश्विक चेतना’ के रूप में देखती है। उनके अनुयायियों और दुनिया भर के शांति प्रेमियों के लिए यह ग्रैमी उनके 90वें जन्मदिन के पूर्व संध्या पर एक महान उपहार की तरह है। यह पुरस्कार उनके द्वारा साझा किए गए संदेशों की ‘कालातीत’ (Timeless) प्रकृति को प्रमाणित करता है।

इस पुरस्कार का एक महत्वपूर्ण पहलू पूर्व (East) के प्राचीन ज्ञान और पश्चिम (West) की आधुनिक उत्पादन तकनीक का मिलन है।एल्बम को इस तरह से तैयार किया गया है कि दलाई लामा के प्रत्येक शब्द के पीछे सूक्ष्म संगीत ध्वनियाँ (Ambient Sounds) हैं, जो ध्यान की अवस्था पैदा करती हैं। ग्रैमी जैसे मंच से पुरस्कृत होने के कारण, यह एल्बम अब उन युवाओं तक भी पहुँच रहा है जो शायद उनके पारंपरिक प्रवचनों को न सुनते हों। यह ‘आध्यात्मिकता का लोकतंत्रीकरण’ है।

ऐसे समय में जब दुनिया यूक्रेन से लेकर मध्य-पूर्व तक युद्धों और विभाजनकारी विचारधाराओं से जूझ रही है, दलाई लामा की आवाज़ को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता यह दुनिया को याद दिलाती है कि अंततः जीत करुणा और संवाद की ही होती है। यह पुरस्कार उन मूल्यों (स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा) के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिनके लिए दलाई लामा ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।

दलाई लामा का ग्रैमी जीतना केवल संगीत जगत की एक हेडलाइन नहीं है, बल्कि यह एक ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ का हिस्सा है। ‘Meditations’ एल्बम के माध्यम से उन्होंने दुनिया को बताया है कि “शांति बाहर ढूँढने की वस्तु नहीं, बल्कि भीतर की एक गूँज है।” 90 वर्ष की आयु में उनकी यह सफलता युवाओं को यह सिखाती है कि रचनात्मकता और प्रभाव की कोई आयु सीमा नहीं होती। जब तक आपके पास साझा करने के लिए एक ‘सत्य’ है, तब तक दुनिया उसे सुनने के लिए ग्रैमी जैसे भव्य मंच तैयार रखेगी। दलाई लामा की आवाज़ अब ग्रैमी के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है, जो आने वाली पीढ़ियों को करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।

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