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अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें: ₹16.61 करोड़ के लोन डिफॉल्ट मामले में शाहजहांपुर की संपत्तियों की होगी नीलामी
सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने चिपकाया नोटिस

बॉलीवुड के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) एक बार फिर गंभीर कानूनी और वित्तीय संकट में घिर गए हैं। सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) ने ₹16.61 करोड़ (16 करोड़ 61 लाख रुपये) के बकाए लोन की वसूली के लिए उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) स्थित उनकी दो अचल संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बैंक अधिकारियों और रिकवरी टीम ने अभिनेता के पैतृक गांव कुंदरा (Kundra) स्थित आवास और शहर में स्थित संपत्ति पर नीलामी के आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिए हैं। बैंक द्वारा तय की गई प्राथमिक शर्तों के अनुसार, दोनों संपत्तियों की संयुक्त रिजर्व प्राइस (आरक्षित मूल्य) ₹3.19 करोड़ रखी गई है और इनकी ई-नीलामी (E-Auction) 9 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।
यह लोन राजपाल यादव द्वारा वर्ष 2010-12 में बतौर निर्देशक अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘अता पता लापता’ (Ata Pata Laapata) के निर्माण के लिए लिया गया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप होने के बाद लोन की किश्तें जमा नहीं हो सकीं, जिसके चलते ब्याज और बकाए की रकम बढ़कर ₹16.61 करोड़ तक पहुँच गई है।
राजपाल यादव के इस वित्तीय संकट की जड़ें लगभग 14-16 साल पुरानी हैं। वर्ष 2005 में उन्होंने अपने माता-पिता के नाम पर ‘नवरंग गोदावरी एंटरटेनमेंट लिमिटेड’ (Navrang Godavari Entertainment Ltd.) नाम की प्रोडक्शन कंपनी बनाई थी। वर्ष 2010 में उन्होंने फिल्म ‘अता पता लापता’ का निर्माण और निर्देशन करने के लिए सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई शाखा से ₹5 करोड़ का व्यावसायिक लोन लिया था।
लोन प्राप्त करने के लिए राजपाल यादव ने अपनी मां गोदावरी यादव और पत्नी राधा यादव की अचल संपत्तियों को गारंटर के तौर पर बैंक के पास गिरवी (Mortgage) रखा था। वर्ष 2012 में रिलीज हुई यह व्यंग्यात्मक संगीतमय फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई। इसके बाद फिल्म से हुई आय न के बराबर रही और बैंक लोन की किश्तें बाउंस होने लगीं। पिछले 14 वर्षों में लोन का भुगतान न हो पाने के कारण मूल धन पर चक्रवृद्धि ब्याज और पेनाल्टी जुड़ती गई, जिससे बकाया राशि बढ़कर ₹16,61,64,000 पहुँच गई।
सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की रिकवरी टीम ने वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतीकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (SARFAESI) अधिनियम के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। बैंक अधिकारियों की टीम ने शाहजहांपुर के ग्राम कुंदरा पहुँचकर राजपाल यादव की पैतृक कोठी और कृषि भूमि के मुख्य गेट पर नीलामी का औपचारिक नोटिस चिपका दिया है। इससे पहले अगस्त 2024 में भी बैंक ने शाहजहांपुर के डाक बंगले के पास स्थित उनके एक भवन के हिस्से को सील कर दिया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केवल शाहजहांपुर ही नहीं, बल्कि मुंबई में स्थित राजपाल यादव की कुछ व्यावसायिक व आवासीय संपत्तियों की कुर्की और नीलामी की कानूनी प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। बैंक का उद्देश्य विभिन्न संपत्तियों को बेचकर अपने ₹16.61 करोड़ के कुल बकाए की शत-प्रतिशत वसूली करना है।
नीलामी की इस कार्रवाई पर राजपाल यादव के परिवार और सेन्ट्रल बैंक प्रबंधन की ओर से बयान सामने आए हैं राजपाल यादव के बड़े भाई श्रीपाल यादव ने नीलामी नोटिस की बात स्वीकार करते हुए कहा कि मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है:
“यह कोई नया मामला नहीं है बल्कि पुराना बकाया है। बैंक अधिकारियों के साथ लोन सेटलमेंट (One Time Settlement) को लेकर बातचीत चल रही है। हमें पूरी उम्मीद है कि नीलामी की तारीख (9 सितंबर) से पहले बैंक के साथ समाधान निकाल लिया जाएगा और संपत्ति नीलाम होने की नौबत नहीं आएगी।”
बैंक के शाखा प्रबंधक अनुज वर्मा ने पुष्टि करते हुए कहा “मुंबई स्थित रिकवरी टीम के निर्देशों के तहत कुंदरा स्थित पैतृक संपत्ति पर नीलामी की अग्रिम सूचना चस्पा की गई है। लगभग दो साल पहले भी बैंक ने समझौता न होने पर संपत्ति सील की थी। यदि तय समयावधि (34 दिन) के भीतर बकाए का भुगतान या वैध सेटलमेंट नहीं होता है, तो नियमानुसार 9 सितंबर को ऑनलाइन बोली लगाई जाएगी।”
राजपाल यादव के लिए यह वित्तीय झटका ऐसे समय में आया है जब वे दिल्ली में भी एक बड़े चेक बाउंस मामले का सामना कर रहे हैं।
जुलाई 2026 में ही दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘अता पता लापता’ फिल्म के लिए लिए गए एक अन्य ₹5 करोड़ के निजी कर्ज से जुड़े 7 चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव को 3 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें शिकायतकर्ता कंपनी को ₹7.35 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया था। इस मामले में वे तिहाड़ जेल में भी रह चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं।
बॉलीवुड में अपनी बेहतरीन कॉमेडी से करोड़ों दर्शकों को हंसाने वाले राजपाल यादव इस वक्त अपने जीवन के सबसे कठिन वित्तीय व कानूनी दौर से गुजर रहे हैं। 9 सितंबर 2026 को प्रस्तावित इस ई-नीलामी को रोकने के लिए उनके पास केवल एक माह का समय बचा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राजपाल यादव और उनका परिवार 9 सितंबर से पहले बैंक के साथ कोई वित्तीय समझौता करने में सफल हो पाता है या फिर उनकी शाहजहांपुर की पैतृक संपत्ति नीलाम हो जाएगी।



