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अंकिता भंडारी को न्याय की हुंकार: एनएसयूआई ने रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक निकाला विशाल कैंडल मार्च
दिल्ली की सड़कों पर गूंजा 'वीआईपी' का नाम उजागर करने का नारा

उत्तराखंड की 19 वर्षीय बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय, मामले से जुड़े कथित ‘वीआईपी’ (VIP) के आधिकारिक नामोल्लेख, निष्पक्ष सीबीआई जांच और साक्ष्य नष्ट करने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में जन-आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर उतर आया है। कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय नेतृत्व, विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र नेताओं, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और युवाओं ने शनिवार शाम मध्य दिल्ली में रायसीना रोड स्थित एनएसयूआई मुख्यालय से जंतर-मंतर की ओर एक विशाल और आक्रोशपूर्ण कैंडल मार्च (Candle March) निकाला।
हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां, तिरंगा झंडा और अंकिता भंडारी के चित्रों वाली तख्तियां थामे सैकड़ों की संख्या में छात्र कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और उत्तराखंड की राज्य सरकार के खिलाफ तीखी नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों का सीधा आरोप है कि कोटद्वार अदालत द्वारा मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बावजूद उस रसूखदार ‘वीआईपी गेस्ट’ को राजनीतिक कवच प्रदान किया जा रहा है, जिसको अनैतिक व अवैध ‘स्पेशल सर्विस’ देने से इनकार करने पर अंकिता को चीला नहर में धकेलकर मार डाला गया था।
कैंडल मार्च जैसे ही रायसीना रोड से आगे बढ़कर संसद मार्ग और जंतर-मंतर की दिशा में बढ़ा, दिल्ली पुलिस ने विंडसर प्लेस और ली मेरिडियन गोलचक्कर के पास लोहे के भारी बैरिकेड्स और वाटर कैनन लगाकर मार्च को रोक दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और आक्रोशित छात्र नेताओं के बीच तीखी धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। छात्रों ने बैरिकेड्स पर ही बैठकर धरना शुरू कर दिया और सड़क पर मोमबत्तियां सजाकर अंकिता की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर संकल्प लिया कि जब तक अंतिम ‘वीआईपी’ सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता, यह आंदोलन देशभर के विश्वविद्यालयों में फैलाया जाएगा।
जैसे ही छात्र नेताओं का जत्था ली मेरिडियन होटल और विंडसर प्लेस गोलचक्कर के नजदीक पहुंचा, दिल्ली पुलिस ने भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों (RAF) के जवानों को आगे कर दिया। लोहे के दोहरे बैरिकेड्स लगाकर छात्रों का रास्ता पूरी तरह रोक दिया गया।
जब छात्रों ने शांतिपूर्वक जंतर-मंतर जाने की अनुमति मांगी, तो पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से घोषणा की कि मध्य दिल्ली के इस क्षेत्र में किसी भी अनधिकृत जुलूस या मार्च की अनुमति नहीं है। इसके बाद छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कई छात्र बैरिकेड्स पर चढ़ने का प्रयास करने लगे, जिन्हें महिला और पुरुष सुरक्षाकर्मियों ने पीछे धकेल दिया।
पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्र सड़क पर ही पालथी मारकर बैठ गए। छात्रों ने अपनी मोमबत्तियों को सड़क के किनारे और पुलिस बैरिकेड्स पर कतारबद्ध तरीके से सजा दिया। छात्रों ने “अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं”, “उत्तराखंड की बेटी को न्याय दो”, और “वीआईपी का नाम बताओ, सरकार बचाना बंद करो” के गगनभेदी नारे लगाए। सड़क पर करीब एक घंटे तक चले धरने के दौरान यातायात पूरी तरह बाधित रहा, जिसे नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को वाहनों को जनपथ और फिरोजशाह रोड की ओर मोड़ना पड़ा।
कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने 30 मई 2025 को मामले के तीनों मुख्य आरोपियों पुलकित आर्य (रिजॉर्ट मालिक और पूर्व भाजपा नेता का बेटा), सौरभ भास्कर (मैनेजर) और अंकित गुप्ता (असिस्टेंट मैनेजर) को हत्या (धारा 302), साक्ष्य मिटाने (धारा 201) और आपराधिक साजिश के तहत सश्रम आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी। अदालत का यह फैसला ऐतिहासिक था, लेकिन इसने अंकिता के परिजनों और न्याय की मांग कर रहे संगठनों के मन में उठे सबसे बड़े सवाल को शांत नहीं किया।
मुकदमे और जांच के दौरान अंकिता की अपने दोस्त पुष्पदीप के साथ हुई व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक हुई थी। उस चैट में अंकिता ने स्पष्ट लिखा था कि पुलकित आर्य उस पर रिजॉर्ट में आने वाले एक “अति-विशिष्ट अतिथि” (VIP) को “एक्स्ट्रा सर्विस” देने के लिए दबाव बना रहा था और इसके बदले उसे ₹10,000 की अतिरिक्त पेशकश की जा रही थी। अंकिता ने स्वाभिमान के साथ इसका विरोध किया था।
सड़क से लेकर संसद तक यह सवाल आज भी गूंज रहा है कि जब हत्या का मूल कारण उस वीआईपी को खुश करना था, तो वह वीआईपी कौन था और आज तक उसके खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र क्यों नहीं दाखिल हुआ?
भारतीय आपराधिक न्यायशास्त्र का नियम है कि किसी भी हत्याकांड के बाद अपराध स्थल (Crime Scene) को सील कर फॉरेंसिक विशेषज्ञों (CFSL) के हवाले किया जाता है। लेकिन वनंतरा रिजॉर्ट के मामले में, पुलिस की औपचारिक जांच पूरी होने से पहले ही आधी रात को बुलडोजर मंगाकर अंकिता के कमरे को तुड़वा दिया गया। परिजनों और वकीलों का सीधा आरोप है कि यह बुलडोजर जनता के गुस्से को शांत करने के लिए नहीं, बल्कि उस कमरे में मौजूद वीआईपी के जैविक और डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने के लिए चलवाया गया था।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता ने आरोप लगाया कि जब तक सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस नियुक्ति को स्थगित रखा जाए। गौतम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है और मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
14 अक्टूबर को जब अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट पर धरने पर बैठे, तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा उनसे मिलने पहुंचे थे। किंतु 15 अक्टूबर की भोर में करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर धरना दे रहे परिजनों और छात्र नेताओं को जबरन हिरासत में ले लिया। इस अमानवीय कार्रवाई ने युवाओं और छात्रों के भीतर रोष की आग भड़का दी, जिसकी परिणति 17 अक्टूबर को रायसीना रोड के इस कैंडल मार्च के रूप में सामने आई।
प्रदर्शन के अंत में एनएसयूआई के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन संसद मार्ग थाने के एसीपी को सौंपा। संगठन ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में आंदोलन को निम्नलिखित चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), जामिया मिलिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) सहित देश के 100 से अधिक प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।
छात्र संगठन की एक विशेष समन्वय समिति गठित की गई है जो अंकिता के पैतृक गांव डोभ-श्रीकोट (पौड़ी) जाकर परिजनों से मिलेगी और देहरादून में राज्य सचिवालय के घेराव की रूपरेखा तैयार करेगी। आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान संसद के बाहर विशाल छात्र संसद आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि नीति-निर्माताओं को इस अनसुलझे वीआईपी रहस्य पर जवाब देने के लिए बाध्य किया जा सके।
अंकिता भंडारी का नाम केवल एक आपराधिक मामले की फाइल का शीर्षक नहीं है, बल्कि यह समकालीन भारत में विशेषाधिकार प्राप्त रसूखदार वर्ग (VIP Culture) और अपनी अस्मिता के लिए संघर्ष कर रहे आम नागरिक के बीच के द्वंद्व का सबसे ज्वलंत प्रतीक बन चुका है। 17 अक्टूबर 2026 की सर्द शाम में दिल्ली के रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर बढ़े कदमों और हाथों में थमी मोमबत्तियों ने यह साबित कर दिया है कि समय बीतने के साथ अंकिता के लिए न्याय की मांग कमजोर नहीं पड़ी है, बल्कि और अधिक प्रखर हुई है।



