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अश्लील व अमर्यादित सामग्री पर केंद्र सरकार का बड़ा प्रहार; आईटी नियम 2021 के तहत 50 ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक

विधिक व विनियामक प्राधिकार नोड: आईटी नियम 2021 और दंडात्मक विधान

23 July 2026 को भारत के डिजिटल न्यायशास्त्र (Digital Jurisprudence), सूचना प्रौद्योगिकी कानून, साइबर सुशासन और सामाजिक-सांस्कृतिक सुरक्षा के पटल पर एक अत्यंत कड़ा, अभूतपूर्व, व्यापक और निर्णायक विनियामक कदम दर्ज हुआ है। देश के डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम में अनियंत्रित और गैर-कानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) द्वारा चलाए गए एक कड़े विधिक अभियान के तहत केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्षों में देश के भीतर 50 से अधिक ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स को पूरी कड़ाई से प्रतिबंधित और ब्लॉक (Disabled/Blocked) कर दिया है।

यह दंडात्मक कार्रवाई इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बार-बार अत्यधिक आपत्तिजनक, अश्लील (Obscene), कामुक और अमर्यादित सामग्री प्रसारित किए जाने की प्राप्त दर्जनों जन-शिकायतों, नागरिक समाज की अपीलों और न्यायिक समीक्षा के बाद निष्पादित की गई है। सरकार का यह कदम स्पष्ट करता है कि रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) के नाम पर देश के कानूनों और सांस्कृतिक मूल्यों के उल्लंघन को ‘लूपहोल-मुक्त’ (Airtight) तरीके से वर्जित किया जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विनिर्देशों के अनुसार, यह संप्रभु दंडात्मक कार्रवाई भारतीय विधिक ढांचे के तहत उपलब्ध निम्नलिखित अभेद्य कानूनों के तहत निष्पादित की गई है इन 50 डिजिटल ऐप्स, उनकी संबद्ध 19 वेबसाइटों, सोशल मीडिया अकाउंट्स और ऐप स्टोर लिंक्स (गूगल प्ले स्टोर व एप्पल ऐप स्टोर) को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत ब्लॉक किया गया है। यह धारा सरकार को राष्ट्रीय संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और शालीनता के हित में किसी भी डिजिटल सामग्री को ब्लॉक करने का संप्रभु अधिकार देती है। इसके साथ ही, ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ के तहत निर्धारित डिजिटल मीडिया आचार संहिता का उल्लंघन इस कार्रवाई का मुख्य आधार बना।

इन ऐप्स पर प्रसारित कंटेंट को स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 (Indecent Representation of Women Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अश्लीलता-विरोधी धाराओं का सीधे उल्लंघन माना गया। कई प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन के आवरण में स्पष्ट नग्नता, हिंसा और अनैतिक संबंधों को बढ़ावा दे रहे थे, जो वैधानिक सीमाओं से बाहर था।

भारत सरकार ने 2021 में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) शिकायत निवारण ढांचा लागू किया था, जिसका पहला स्तर स्व-नियंत्रण था मुख्यधारा के बड़े प्लेटफॉर्म्स ने इस व्यवस्था का काफी हद तक पालन किया, लेकिन समानांतर रूप से उभरे कई छोटे और अनधिकृत ओटीटी ऐप्स ने इस त्रि-स्तरीय ढांचे की पूरी तरह अनदेखी की। उन्होंने न तो शिकायत अधिकारियों (Grievance Officers) की नियुक्ति की और न ही कंटेंट की आयु-वर्गीकरण (Age Rating) प्रणाली लागू की।

ये 50 ऐप्स अक्सर सोशल मीडिया पर अश्लील ट्रेलरों का विज्ञापन देकर उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करते थे और मासिक या साप्ताहिक सब्स्क्रिप्शन के माध्यम से अवैध वित्तीय कमाई कर रहे थे। सरकार की इस समेकित स्ट्राइक ने इनके डोमेन, सर्वर और पेमेंट गेटवे लिंक्स को एक साथ ब्लॉक कर इनके पूरे वित्तीय चक्र को ध्वस्त कर दिया है।

“सच्चे डिजिटल सुशासन का वास्तविक और विधिक पैमाना केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित, जिम्मेदार और ‘लूपहोल-मुक्त’ (Airtight) डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम तैयार करना है जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अश्लीलता और कानूनी उल्लंघन की अनुमति न मिले। 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर यह बैन इसी कड़े डिजिटल अनुशासन का जीवंत प्रतीक है।”

केंद्र सरकार द्वारा 50 आपत्तिजनक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया जाना देश के डिजिटल कंटेंट क्रिएटर इकोसिस्टम के लिए एक कड़ा संदेश है। यह स्पष्ट करता है कि कलात्मक अभिव्यक्ति (Artistic Expression) का सम्मान करने का अर्थ यह नहीं है कि डिजिटल स्पेस को कानून विहीन क्षेत्र बनने दिया जाए।

भविष्य का सुरक्षित और न्यायसंगत रोडमैप यही मांग करता है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मुख्यधारा के बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (जैसे नेटफ्लिक्स, प्राइम, हॉटस्टार) के साथ मिलकर आयु-वर्गीकरण (Age Rating) और पैरेंटल कंट्रोल (Parental Control) प्रणालियों का नियमित ऑडिट करे। इसके साथ ही, ऐप स्टोर्स (Google & Apple) को भी यह विधिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर किसी भी अनधिकृत और अश्लील ऐप को सूचीबद्ध न होने दें। कार्यपालिका, साइबर सुरक्षा एजेंसियों और डिजिटल मीडिया नियामकों का यह संयुक्त विनियामक चक्र यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर गतिमान रहेगा कि भारत का आंतरिक सुशासन, डिजिटल संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा, नैतिक मूल्य और लोक कल्याण का विज़न सदैव सर्वोच्च, विश्वसनीय, निष्पक्ष, न्यायसंगत और अदम्य बना रहे।

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