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उत्तराखंड के चमोली में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन THDC हाइड्रो टनल में अचानक घुसा पानी और मलबा

7 श्रमिकों की मौत, 14 घायल व 3 की तलाश में महा-रेस्क्यू जारी

हिमालयी राज्य उत्तराखंड के संवेदनशील पहाड़ी जिले चमोली में जलविद्युत परियोजना निर्माण के दौरान एक और भीषण आपदा सामने आई है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पीपलकोटी के समीप मायापुर क्षेत्र में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की 444 मेगावाट क्षमता वाली ‘विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना’ (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project – VPHEP) की एक निर्माणाधीन टनल में पहाड़ के ऊपरी हिस्से से अचानक भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा (Slush and Debris) भर गया।
इस अप्रत्याशित और भीषण दुर्घटना में अब तक 7 श्रमिकों की दुखद मृत्यु हो चुकी है, जबकि 14 अन्य श्रमिक घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल आपातकालीन प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना के समय टनल के भीतर कुल 22 श्रमिक कार्यरत थे। राहत एवं बचाव दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 श्रमिकों की स्थिति स्पष्ट कर ली है, जिनमें से घायल व हताहत शामिल हैं, जबकि मलबे और जलभराव के बीच अंदर फंसे शेष 3 लापता श्रमिकों की तलाश में भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी द्वारा युद्धस्तर पर महा-रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
पीपलकोटी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और गोपेश्वर जिला अस्पताल में उपचाराधीन घायल श्रमिकों ने टनल के भीतर के खौफनाक मंजर को बयां किया श्रमिकों ने बताया कि शाम की शिफ्ट में सामान्य ड्रिलिंग और कंक्रीट लाइनिंग का कार्य चल रहा था। अचानक टनल के भीतरी हिस्से से एक तेज धमाके जैसी गड़गड़ाहट सुनाई दी। इसके कुछ ही सेकंड के भीतर अत्यधिक वायुदाब (Air Pressure) का ऐसा भयंकर झोंका आया कि कई मजदूर हवा में उड़कर टनल की दीवारों और लोहे के गर्डरों से जा टकराए।
हवा के दबाव के तुरंत बाद लाखों लीटर मटमैला पानी, बोल्डर और गाद तेजी से टनल में भर गया। टनल के भीतर मौजूद लाइटें और आपातकालीन बिजली व्यवस्था तुरंत ठप हो गई, जिससे वहां पूरी तरह अंधेरा छा गया। बाहर निकलने का मुख्य मार्ग भारी मलबे से अवरुद्ध हो गया। जिन मजदूरों को तैरना आता था या जो मुहाने के करीब थे, वे किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि अंदरूनी छोर पर काम कर रहे श्रमिक सीधे मलबे की चपेट में आ गए।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में घटना के तुरंत बाद जिले के सभी आपातकालीन संसाधनों को मायापुर की ओर मोड़ दिया गया। टनल के लगभग 300 से 400 मीटर के हिस्से में पानी और कीचड़ गले तक भरा हुआ है। इसे खाली करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और THDC ने भारी क्षमता वाले औद्योगिक डीवाटरिंग पंप लगाए हैं, जो लगातार लाखों लीटर पानी बाहर फेंक रहे हैं।
पानी का स्तर अधिक होने के कारण एसडीआरएफ के जवानों ने विशेष इन्फ्लेटेबल ड्रम-बोट्स और रबर राफ्ट्स के जरिए टनल के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश किया है। मलबे के कारण टनल के भीतर जहरीली गैसों (जैसे मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड) के जमाव का खतरा बना हुआ है। बचाव दल लगातार ऑक्सीजन वेंटिलेशन पाइप्स के जरिए अंदर ताजी हवा भेज रहे हैं और गैस डिटेक्टर्स से वायु गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से स्थिति की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जब तक टनल में फंसे अंतिम व्यक्ति को बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक बचाव अभियान दिन-रात जारी रहेगा। सभी घायल श्रमिकों को बिना किसी शुल्क के सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस से एम्स ऋषिकेश (AIIMS Rishikesh) एयरलिफ्ट करने की व्यवस्था तैयार रखी गई है।
इस गंभीर हादसे के कारणों की पड़ताल के लिए भूवैज्ञानिकों, संरचनात्मक इंजीनियरों और केंद्रीय जल आयोग के विशेषज्ञों की एक संयुक्त तकनीकी जांच समिति गठित की जा रही है, जो यह पता लगाएगी कि क्या टनल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई थी या यह पूर्ण प्राकृतिक भू-गर्भीय हलचल का परिणाम था।
चमोली जिले में हुई यह भीषण दुर्घटना एक बार फिर 2021 की तपोवन-रैणी आपदा (Tapovan Disaster) और 2023 के सिलक्यारा टनल हादसे की यादें ताजा करती है।
भू-वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि उत्तराखंड का उच्च हिमालयी क्षेत्र अत्यंत नाजुक और भूकंपीय रूप से संवेदनशील (Seismic Zone V) है। जब इन क्षेत्रों में टनल निर्माण के लिए ब्लास्टिंग और गहरी खुदाई की जाती है, तो भूमिगत जल स्रोत और कमजोर भू-गर्भीय परतों में दरारें आ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचने के लिए टनल निर्माण के दौरान एडवांस्ड जियोलॉजिकल प्रेडिक्शन (AGP) और आधुनिक सेंसर-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) का कड़ाई से अनुपालन अनिवार्य किया जाना चाहिए।
मायापुर-पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन टनल में हुए इस हादसे ने एक बार फिर विकास और सुरक्षा के संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 श्रमिकों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। इस समय पूरी प्रशासनिक मशीनरी, बचाव दल और स्थानीय लोगों की उम्मीदें उन 3 लापता श्रमिकों पर टिकी हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत दल मौत और मलबे से जूझते हुए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।

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