
महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में अभूतपूर्व नीतिगत और भाषाई सुधार की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989’ में संशोधन करने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करते हुए ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026’ का प्रस्ताव रखा है। इस नए संशोधन के तहत राज्य में काली-पीली टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और ओला, उबर व रैपिडो जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर कैब (App-based Cab Aggregators) चलाने वाले सभी चालकों के लिए ‘मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान’ (Working Knowledge of Marathi) होना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद स्पष्ट घोषणा की है कि गैर-मराठी भाषी चालकों को व्यावहारिक मराठी सीखने के लिए दी गई 15 अगस्त की अंतिम समय सीमा (Deadline) में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा।
15 अगस्त के बाद राज्य भर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) द्वारा सघन जांच अभियान शुरू किया जाएगा। जो चालक या परमिट धारक मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान प्रदर्शित करने में असमर्थ रहेंगे, उनके ड्राइविंग लाइसेंस का प्राधिकार पहले निलंबित (Suspended) किया जाएगा और लगातार नियम उल्लंघन करने की स्थिति में उनका परमिट पूरी तरह से रद्द (Revoked) कर दिया जाएगा।
परिवहन विभाग द्वारा विधि एवं न्याय विभाग (Law and Judiciary Department) की मंजूरी मिलने के बाद जारी किए गए मसौदे (Draft Notification) के अनुसार, चालकों की पात्रता शर्तों में ‘चारित्रिक सत्यापन’ (Antecedents) और योग्यता मानकों के साथ “मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान” वाक्यांश को जोड़ा गया है।
सरकार और परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि गैर-मराठी भाषी चालकों के खिलाफ कार्रवाई किसी दुर्भावना से प्रेरित नहीं होगी, बल्कि कानून का पालन सुनिश्चित कराने के लिए चरणबद्ध (Phased Penalty Approach) रूप से अमल में लाई जाएगी यदि RTO जांच अधिकारी को निरीक्षण या शिकायत के दौरान यह मिलता है कि चालक व्यावहारिक मराठी में बात करने या समझने में असमर्थ है, तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी चालक को लिखित नोटिस जारी कर 30 दिनों (एक महीने) का समय देगी।
यदि एक महीने की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी चालक मराठी भाषा का अपेक्षित ज्ञान हासिल करने में विफल रहता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर अंकित ‘सार्वजनिक परिवहन चालन प्राधिकार’ (Passenger Vehicle Driving Authorisation) को तीन महीने की अवधि तक के लिए निलंबित कर दिया जाएगा। तीन महीने के निलंबन के बाद भी यदि चालक नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो सक्षम अधिकारी द्वारा लिखित कारण दर्ज करते हुए उसका ड्राइविंग लाइसेंस या वाहन का परमिट स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा। हालाँकि, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन करते हुए रद्दीकरण का अंतिम आदेश पारित करने से पहले चालक को सुनवाई का वाजिब मौका (Reasonable Opportunity of Being Heard) दिया जाएगा।यह नियम केवल नए ड्राइवरों तक सीमित नहीं है। जब कोई पुराना चालक अपने वाहन परमिट का नवीनीकरण (Renewal) कराने जाएगा, तो उसे RTO अधिकारी के समक्ष मराठी भाषा की व्यावहारिक दक्षता प्रदर्शित करनी होगी।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सरकार के रुख को दोहराते हुए कहा कि चालकों को पर्याप्त समय दिया जा चुका है और अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“हमने 1 मई 2026 को ही इस नियम की अधिसूचना पुनर्जीवित कर दी थी। चालक संघों की मांग पर हमने उन्हें भाषा सीखने के लिए 105 दिनों (15 अगस्त तक) का पर्याप्त समय दिया। अब 15 अगस्त की सीमा को एक दिन भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।”
“महाराष्ट्र में सेवा देने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान होना ही चाहिए। जब कोई महिला, बुजुर्ग या पर्यटक गाड़ी में बैठता है, तो गंतव्य स्थान समझने, रास्ते के मार्गदर्शन और आपातकालीन स्थिति में संवाद स्थापित करने के लिए मराठी अनिवार्य है। यह यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए है।”
“कुछ अड़ियल चालक यह दावा कर रहे हैं कि वे केवल हिंदी में बात करेंगे और नियम नहीं मानेंगे। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कानून का राज (Rule of Law) सभी पर लागू होगा। जो चालक कानून का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ बिना किसी रियायत के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
परिवहन विभाग ने भाषा शिक्षा के लिए 1,100 से अधिक शिक्षकों को नियुक्त किया और मराठी साहित्य परिषदों के सहयोग से 4 घंटे का व्यावहारिक संवाद मॉड्यूल तैयार किया। राज्य भर में 1,10,000 (एक लाख दस हजार) से अधिक ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों ने सफलतापूर्वक इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को पूरा किया है। 15 अगस्त की डेडलाइन के बाद, 17 अगस्त 2026 को ठाणे में आयोजित एक विशेष राज्यस्तरीय समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य वरिष्ठ मंत्री प्रशिक्षण पूरा करने वाले सैकड़ों चालकों को आधिकारिक ‘मराठी भाषा ज्ञान प्रमाणपत्र’ (Language Proficiency Certificate) प्रदान करेंगे।
सरकार के इस कदम पर राज्य के राजनीतिक गलियारों और चालक यूनियनों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता संजय राउत ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सेवा देने वाले किसी भी नागरिक सेवा प्रदाता को स्थानीय भाषा आनी ही चाहिए, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने 15 अगस्त की समय सीमा पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे अन्यायपूर्ण करार दिया और आरोप लगाया कि यह निर्णय चुनाव केंद्रित राजनीतिक मंशा से प्रेरित है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यद्यपि स्थानीय भाषा सीखना अच्छी बात है, लेकिन किसी पर जबरन भाषा थोपना अनुचित है। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कंपनियों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी और उनके चालकों को भी अनिवार्य रूप से इस नियम का अनुपालन करना होगा।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर ऑटो, टैक्सी और ऐप-कैब चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का फैसला राज्य की भाषाई पहचान और यात्री सुरक्षा के समन्वय की दिशा में एक दूरगामी कदम है। 15 अगस्त की समय सीमा समाप्त होने के बाद, 18 अगस्त से RTO की विशेष प्रवर्तन टीमें सड़कों पर उतरकर चालकों की दक्षता का सत्यापन करेंगी। जहां एक तरफ 1.10 लाख चालकों द्वारा प्रशिक्षण पूरा करना एक सकारात्मक पहल है, वहीं दूसरी तरफ नियमों के कड़ाई से क्रियान्वयन के दौरान सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी रहेंगी।



