राज्य
दिल्ली एमसीडी (MCD) का अवैध निर्माण पर महा-प्रहार
सभी 12 जोनों में 40 ठिकानों पर चला बुलडोजर, 8 संपत्तियां सील

देश की राजधानी दिल्ली में अनियंत्रित अवैध निर्माण, आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक दुरुपयोग और छात्रों के पीजी (Paying Guest) आवासों में सुरक्षा मानकों के खुले उल्लंघन के खिलाफ दिल्ली नगर निगम (Municipal Corporation of Delhi – MCD) ने अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त प्रवर्तन अभियान छेड़ दिया है। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हाल ही में एक पांच मंजिला अवैध पीजी हॉस्टल के ताश के पत्तों की तरह ढह जाने और उसमें सात निर्दोष छात्रों व श्रमिकों की मौत के बाद उपजे भारी जनआक्रोश के बीच निगम प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है।
नागरिक निकाय की विशेष जोनल इंजीनियरिंग और एनफोर्समेंट टीमों ने राजधानी के सभी 12 प्रशासनिक जोनों में एक साथ कार्रवाई करते हुए 40 प्रमुख ठिकानों पर अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया और नियमों का घोर उल्लंघन करने वाली 8 बड़ी संपत्तियों को मौके पर ही सील कर दिया। इसके साथ ही निगम ने 14 नए भवनों के खिलाफ विधिवत ध्वस्तीकरण आदेश (Demolition Orders) पारित किए हैं।
इस दंडात्मक कार्रवाई के समानांतर, राजधानी में रह रहे लाखों छात्रों, छात्राओं और कामकाजी युवाओं की जान-माल की हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए एमसीडी ने दिल्ली भर में 2,453 पेइंग गेस्ट (PG) आवासों का व्यापक फील्ड सर्वे पूरा कर लिया है। इस चौंकाने वाले सर्वेक्षण में पाया गया है कि 4 पीजी इमारतें प्रत्यक्ष तौर पर ‘अत्यंत खतरनाक’ (Visibly Dangerous) स्थिति में हैं, जिन्हें किसी भी समय ढहाया जा सकता है। वहीं 25 भवनों में बड़े ढांचागत सुधार (Major Structural Repairs) और 138 से अधिक इमारतों में तत्काल मरम्मत (Minor Repairs) की आवश्यकता चिन्हित की गई है।
सत्य निकेतन में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे इलाके में एक कमजोर नींव वाले पुराने मकान पर अवैध रूप से पांचवीं मंजिल तान दी गई थी। मरम्मत के नाम पर जब अंदर लोड-बेयरिंग दीवार को तोड़ा गया, तो पूरा ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस हादसे ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
एमसीडी की स्थायी समिति की चेयरपर्सन सत्या शर्मा ने आनन-फानन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई और सभी 12 जोनों के उपायुक्तों (DCs) और कार्यकारी अभियंताओं (EEs) को सख्त निर्देश दिए कि वे केवल कागजी आंकड़े जुटाने के बजाय धरातल पर खतरनाक इमारतों को चिन्हित कर तत्काल खाली कराएं या ध्वस्त करें।
एमसीडी द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 40 ठिकानों पर की गई ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई किसी एक इलाके तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी और मध्य दिल्ली के अति-संवेदनशील और घने मोहल्लों में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अंजाम दिया गया यमुनापार के पांडव नगर स्थित टी.सी. कैंप में सरकारी जमीन और संकरी गलियों में बनाए जा रहे अवैध पक्के मकानों और दुकानों को पोकलेन मशीनों की मदद से गिरा दिया गया।
रिहायशी इलाकों में बिना बिल्डिंग प्लान मंजूर कराए बनाई गई अवैध दुकानों और बालकनी के छज्जों को तोड़ा गया। एशिया के सबसे बड़े कपड़ा बाजारों में से एक गांधी नगर के घने रिहायशी मकानों में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे वाणिज्यिक कारखानों और एक्सटेंशन्स को ढहाया गया।
करोल बाग के रैगरपुरा की संकरी गलियों में पुरानी इमारतों के ऊपर अवैध रूप से लोहे के गर्डर डालकर बनाई गई दो मंजिलों को मजदूरों और गैस कटर की मदद से काट दिया गया। रिहायशी प्लॉट्स पर बनाए जा रहे अनधिकृत फ्लैट्स और ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग की जगह बनाए गए अवैध कमरों को हथौड़ों से तोड़ दिया गया। आवासीय परिसरों में नियमों का उल्लंघन कर खड़ी की गई दुकानों और व्यावसायिक संरचनाओं को ध्वस्त किया गया।
औद्योगिक क्षेत्र में निर्धारित एफएआर (Floor Area Ratio) से कई गुना अधिक कब्जा कर बनाए गए विशाल लोहे के शेड्स और अनधिकृत वेयरहाउस निर्माण को जमींदोज किया गया। ग्रामीण और अनधिकृत कॉलोनियों में बिना अनुमति खड़े किए जा रहे व्यावसायिक ढांचे सील किए गए। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस से सटे मलका गंज में छात्रों को किराए पर देने के उद्देश्य से एक पुरानी इमारत की छत पर बिना पिलर के खड़ी की जा रही अवैध चौथी मंजिल को गैस कटर से आरसीसी सरिए काटकर पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया गया।
सर्वेक्षण में चार पीजी हॉस्टलों को अत्यंत असुरक्षित पाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन इमारतों की नींव में भारी सीलन है, लोड-बेयरिंग पिलर्स में झुकाव आ चुका है और दीवारों पर खतरनाक दरारें हैं। वरिष्ठ निगम अधिकारी ने स्पष्ट किया: “इन चार इमारतों के स्वामियों को स्वयं यह ढांचा गिराने का अंतिम नोटिस दिया जा रहा है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो निगम पुलिस बल की मदद से छात्रों को बाहर निकालकर इन इमारतों पर बुलडोजर चलाएगा। किसी भी असुरक्षित ढांचे को कोई कानूनी छूट नहीं दी जाएगी।”
25 पीजी ऐसे पाए गए हैं जहां स्वीकृत नक्शे से अधिक भार डाला गया है। इन इमारतों के मालिकों को किसी मान्यता प्राप्त स्ट्रक्चरल इंजीनियर (Chartered Structural Engineer) से अपनी बिल्डिंग की भार-वहन क्षमता का ऑडिट कराकर उसकी विस्तृत रिपोर्ट एमसीडी के जोनल कार्यालय में जमा कराने का सख्त आदेश दिया गया है। ऑडिट रिपोर्ट में यदि इमारत कमजोर पाई गई, तो अतिरिक्त मंजिलों को तोड़ा जाएगा। सर्वेक्षण में पाया गया कि कई घनी कॉलोनियों में ग्राउंड फ्लोर के ऊपर चार से पांच मंजिलें (G+4 or G+5) तान दी गई हैं। ऐसी 26 इमारतों को ‘अति-संवेदनशील’ (Vulnerable Structures) की श्रेणी में रखकर उनकी 24×7 निगरानी की जा रही है।
फील्ड इंस्पेक्शन के दौरान नगर निगम और अग्निशमन सेवा (Delhi Fire Service) के अधिकारियों ने पीजी हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों की जो बदहाली देखी, वह किसी बड़े अग्निकांड को खुला निमंत्रण दे रही थी अधिकांश पीजी 50 से 100 गज के छोटे भूखंडों पर 5-6 मंजिलों में फैले हैं। ऊपर से नीचे तक आने के लिए केवल एक संकरी सीढ़ी (2.5 से 3 फीट चौड़ी) है। आग लगने या भूकंप की स्थिति में छात्रों के लिए बाहर भागने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
हर कमरे में एयर कंडीशनर (AC), गीजर और इंडक्शन हीटर चलाए जा रहे हैं, जबकि बिजली का कनेक्शन सामान्य घरेलू लोड पर लिया गया है। तारों के लटकते गुच्छे और लकड़ी के प्लाईवुड वाले पार्टीशन किसी भी समय भीषण आग भड़काने के लिए पर्याप्त हैं।
मुखर्जी नगर की तर्ज पर कई इलाकों में बेसमेंट में अवैध रूप से रीडिंग रूम, मेस और लाइब्रेरी चलाई जा रही थीं, जिन्हें तुरंत बंद करने के नोटिस थमाए गए हैं।
अवैध निर्माण के खिलाफ इस जंग को केवल सतही न रहने देने के लिए एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा ने एक नई प्रशासनिक जवाबदेही नीति (Accountability Matrix) लागू करने के निर्देश दिए हैं यदि किसी वार्ड में नया अवैध निर्माण होता पाया गया या किसी पुरानी खतरनाक इमारत की अनदेखी के चलते हादसा हुआ, तो संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के खिलाफ सीधी विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई होगी।
निजी ऑडिट फर्मों की मिलीभगत रोकने के लिए सत्या शर्मा ने मांग की है कि एमसीडी के पास अपनी समर्पित ‘स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स टीम’ होनी चाहिए, जो नागरिकों की शिकायतों पर तुरंत मौके पर जाकर वैज्ञानिक उपकरणों से इमारतों की मजबूती की स्वतंत्र जांच कर सके। यदि कोई भवन स्वामी अपने अवैध हिस्से को खुद नहीं तोड़ता है और निगम को बुलडोजर चलाना पड़ता है, तो उस डिमोलिशन का पूरा प्रशासनिक खर्च मकान मालिक के संपत्ति कर (Property Tax) के बिल में जोड़कर कानूनी रूप से वसूला जाएगा।
एमसीडी के इस बड़े अभियान पर दिल्ली के नागरिकों और छात्र संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) और आइसा (AISA) से जुड़े छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन केवल हादसे के बाद जागता है। छात्रों की मांग है कि दिल्ली सरकार और एमसीडी मिलकर एक ‘दिल्ली पीजी रेगुलेशन एक्ट’ (Delhi PG Regulation Act) लाएं, जिसके तहत हॉस्टलों का किराया नियंत्रित हो और सुरक्षा मानकों की हर छह महीने में अनिवार्य जांच की जाए।
ग्रेटर कैलाश, डिफेंस कॉलोनी और पटेल नगर की आरडब्ल्यूए ने निगम की कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब ये बहुमंजिला इमारतें बन रही होती हैं, तब स्थानीय पुलिस और निगम के अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं। जब तक निर्माण के शुरुआती चरण में ही ईंट-सीमेंट जब्त नहीं किया जाएगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
दिल्ली नगर निगम द्वारा सभी 12 जोनों में 40 अवैध ठिकानों पर बुलडोजर चलाना, 8 संपत्तियों को सील करना और 2,453 पीजी इमारतों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करना यह साबित करता है कि सत्य निकेतन की त्रासदी ने तंत्र की नींद तोड़ी है। राजधानी दिल्ली कोई खुला मैदान नहीं है जहां कोई भी बिल्डर या मुनाफाखोर मकान मालिक चंद रुपयों के लालच में कमजोर नींव पर पांच-पांच मंजिलें खड़ी करके मासूम जिंदगियों को दांव पर लगा दे।
पहचाने गए चार अत्यंत खतरनाक पीजी हॉस्टलों को ढहाने की तैयारी और 25 इमारतों के अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट का फैसला यह कड़ा संदेश देता है कि अब नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, इस अभियान की असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह बुलडोजर अभियान कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद थम जाएगा, या फिर नगर निगम एक पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त तंत्र स्थापित करके दिल्ली को वास्तव में एक सुरक्षित, व्यवस्थित और रहने योग्य महानगर बनाएगा। कानून का राज केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने से ही दिल्ली का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।



