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भारत मंडपम में पर्यावरण और सतत विकास का महा-संदेश

पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग समेत ब्रिक्स नेताओं ने मिलकर किया संयुक्त पौधरोपण; 'ग्रीन ब्रिक्स' का ऐतिहासिक संकल्प

राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के पहले दिन वैश्विक कूटनीति के मंच से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु लचीलेपन और सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता का एक ऐतिहासिक संदेश दिया गया। प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम के सेंट्रल लॉन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों ने एक साथ मिलकर संयुक्त पौधरोपण (Joint Tree Plantation) समारोह में हिस्सा लिया।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने हाथ में खुरपी और फावड़ा थामकर भारतीय बरगद (Great Banyan Tree) के पौधों की रोपाई की।
यह संयुक्त पर्यावरणीय पहल भारत की अध्यक्षता के मूल विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” और भारत की वैश्विक पर्यावरण पहलों ‘मिशन LiFE’ (Lifestyle for Environment) तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ के अनुरूप आयोजित की गई।
शिखर सम्मेलन के पहले दिन बहुपक्षीय शासन और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ के सर्वसम्मत अंगीकरण के बाद आयोजित इस पौधरोपण ने यह स्पष्ट कर दिया कि ब्रिक्स केवल आर्थिक और भू-राजनीतिक गठजोड़ नहीं है, बल्कि यह धरती के हरित भविष्य और प्रकृति के संरक्षण के लिए भी पूरी तरह संकल्पबद्ध है।
औपचारिक कोट-टाई और कूटनीतिक औपचारिकता से परे हटकर नेताओं के बीच अत्यंत सहज और आत्मीय माहौल देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मिलकर पौधों की क्यारियों में फावड़े से मिट्टी डाली। इसके बाद पारंपरिक पीतल की झारियों (Watering Cans) से पौधों की जड़ों में जल अर्पित किया गया।
आयोजन समिति ने इस अवसर के लिए विशेष रूप से भारतीय बरगद (Ficus benghalensis) के पौधों का चयन किया। बरगद का पेड़ अपनी विशालता, दीर्घायु (सैकड़ों वर्षों का जीवनकाल), गहरी जड़ों और पर्यावरण में भारी मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बरगद का यह रूपक ब्रिक्स समूह के निरंतर विस्तार, स्थिरता और गहरी जड़ों का प्रतीक है।
भारत मंडपम परिसर में इन पौधों को एक विशेष गोलाकार विन्यास (Circular Layout) में रोपा गया है, जिसे आधिकारिक रूप से ‘ब्रिक्स ग्रीन ग्रोव’ (BRICS Green Grove) के रूप में समर्पित किया गया है। प्रत्येक पौधे के आधार पर धातु की सुंदर पट्टिका लगाई गई है, जिस पर संबंधित देश का नाम, राष्ट्रीय ध्वज और पौधे रोपने वाले राष्ट्राध्यक्ष का नाम अंकित किया गया है।
ऐसे समय में जब दुनिया पश्चिम एशिया के गंभीर सैन्य संघर्ष, यूक्रेन युद्ध, व्यापारिक प्रतिबंधों और सीमा विवादों के चलते ध्रुवीकरण और अविश्वास के दौर से गुजर रही है, भारत, चीन, रूस, मिस्र और खाड़ी देशों के नेताओं का एक साथ खड़े होकर पौधे लगाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि मानवता और पृथ्वी का अस्तित्व किसी भी राजनीतिक मतभेद से कहीं बड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर ‘मिशन LiFE’ शुरू किया था और विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया था। भारत मंडपम में आयोजित यह समारोह उसी भारतीय दृष्टि का बहुपक्षीय विस्तार है, जहां दुनिया के सबसे बड़े देशों के शासनाध्यक्षों ने इस विचार को अपना समर्थन दिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ में यह स्पष्ट किया गया है कि विकासशील देशों को अपनी आर्थिक वृद्धि और गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ हरित ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाना है। ब्रिक्स नेताओं ने जोर दिया कि ऐतिहासिक रूप से कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार पश्चिमी विकसित देशों को विकासशील देशों को बिना किसी कठोर राजनीतिक शर्त के जलवायु वित्त (Climate Finance) और हरित तकनीक उपलब्ध करानी चाहिए।
पौधरोपण समारोह से ठीक पहले भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स नेताओं ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026′ (New Delhi Declaration 2026) को अंगीकार किया। इस घोषणापत्र में सतत विकास और पर्यावरण सहयोग को लेकर कई क्रांतिकारी बिंदुओं पर मुहर लगाई गई घोषणापत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स देश प्रतिस्पर्धा कानूनों और नीतियों के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करेंगे ताकि नवीकरणीय ऊर्जा, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में एक निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धी और लचीला बाजार वातावरण तैयार किया जा सके। नेताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह को किसी भी एकतरफा प्रतिबंध या युद्ध की स्थिति से मुक्त रखा जाना चाहिए, ताकि विकासशील देशों की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित न हो।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान इस शिखर सम्मेलन को केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे भारतीय सांस्कृतिक लोकाचार और प्रकृति-पूजा की प्राचीन परंपरा से जोड़ा भारतीय वैदिक परंपरा का यह सिद्धांत कि जो प्रकृति की रक्षा करता है, प्रकृति उसकी रक्षा करती है, सम्मेलन के हर सत्र में परिलक्षित हुआ।
सम्मेलन के मुख्य स्वागत स्थल पर रामेश्वरम के ऐतिहासिक रामनाथस्वामी मंदिर के भव्य गलियारे को सुंदर पृष्ठभूमि के रूप में सजाया गया था, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह भारत की आध्यात्मिक गहराई और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का परिचायक था। रोपे गए बरगद के पौधे केवल छायादार वृक्ष नहीं हैं, बल्कि वे मिट्टी के कटाव को रोकने, भूजल स्तर को सुधारने और पक्षियों व कीटों की सैकड़ों प्रजातियों को आश्रय देने वाले पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संरक्षक हैं।
भारत मंडपम के लॉन में आयोजित संयुक्त पौधरोपण केवल कैमरों के लिए की गई कोई कूटनीतिक रस्म नहीं थी, बल्कि यह 21वीं सदी के बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच मानवता के साझा भविष्य का घोषणापत्र था। ऐसे समय में जब दुनिया युद्धों, हथियारों की होड़ और जलवायु संकट के तिहरे दबाव से जूझ रही है, भारत की धरती पर दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्तियों के नेताओं का एक साथ झुककर मिट्टी छूना और बरगद के पौधों को सींचना यह प्रमाणित करता है कि विकास की सच्ची परिभाषा प्रकृति के विनाश में नहीं, बल्कि उसके संरक्षण में निहित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल पर भारत मंडपम में स्थापित यह ‘ब्रिक्स ग्रीन ग्रोव’ आने वाले दशकों तक वैश्विक नेताओं को यह स्मरण कराता रहेगा कि जब राष्ट्र अपने मतभेदों को भुलाकर धरती की सेवा के लिए एक साथ आते हैं, तो शांति, समृद्धि और स्थिरता का वटवृक्ष स्वतः पल्लवित हो उठता है।

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