राष्ट्रीयसोशल-मीडिया
दिल्ली एयरपोर्ट पर फर्जी बाढ़ व उड़ानों के ठप होने की अफवाह फैलाने पर बड़ा एक्शन
DIAL ने 63 सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ दर्ज कराई FIR

राष्ट्रीय राजधानी स्थित देश के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Indira Gandhi International Airport – IGIA) का संचालन करने वाले कंसोर्टियम दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने डिजिटल स्पेस में फैलाई जा रही फर्जी खबरों, झूठे दावों और भ्रामक वीडियो के खिलाफ ऐतिहासिक कानूनी कार्रवाई की है। DIAL ने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के समक्ष 63 सोशल मीडिया हैंडल्स (Social Media Handles) के खिलाफ एक व्यापक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई है।
इन सोशल मीडिया हैंडल्स पर आरोप है कि उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली में हुई अत्यधिक मानसूनी वर्षा के बाद एयरपोर्ट परिसर, टर्मिनलों और रनवे पर भयावह बाढ़ जैसी स्थिति दिखाने और उड़ानों के पूरी तरह ठप होने से संबंधित मनगढ़ंत पोस्ट, तस्वीरें और वीडियो साझा किए।
DIAL के अनुसार, कई सोशल मीडिया खातों ने जानबूझकर दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अप्रैल 2024 के बाढ़ से जुड़े पुराने वीडियो को ‘दिल्ली एयरपोर्ट का ताजा दृश्य’ बताकर वायरल किया। हवाई अड्डा प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक तकनीकी या सूचनात्मक त्रुटि नहीं थी, बल्कि महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा (Critical Public Utility Service) की साख पर हमला करने, यात्रियों में घबराहट और भय (Public Mischief) पैदा करने और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल करने की सोची-समझी साजिश थी।
विमानन विशेषज्ञों और DIAL के तकनीकी दल ने सिलसिलेवार ढंग से स्पष्ट किया है कि 4 सितंबर को एयरपोर्ट पर वास्तव में क्या हुआ था और सोशल मीडिया पर इसे किस प्रकार तिल का ताड़ बनाकर प्रस्तुत किया गया 4 सितंबर 2026 की दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और विशेष रूप से पालम वेधशाला क्षेत्र में भारी बादल फटने जैसी स्थिति बनी, जहां मात्र तीन घंटों में 72.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इस अप्रत्याशित जलप्रवाह के कारण टर्मिनल 3 के अराइवल फोरकोर्ट (बाहरी टैक्सी पिक-अप लेन) में कुछ समय के लिए पानी जमा हो गया था। DIAL के आपातकालीन त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Teams) ने भारी क्षमता वाले औद्योगिक सक्शन पंपों और ग्रेविटी ड्रेनेज सिस्टम को तुरंत सक्रिय किया और जमा हुए पानी को मात्र 20 मिनट के भीतर पूरी तरह से निकाल दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल किए गए दावों में कहा गया कि भारी बाढ़ के कारण दिल्ली एयरपोर्ट का संचालन कई घंटों के लिए बंद कर दिया गया और रनवे डूब गए। सच्चाई यह थी कि भारी बारिश, तेज हवाओं और कम दृश्यता के चलते विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल (Aviation Safety Protocol) के तहत एटीसी (ATC) द्वारा एहतियातन लगभग 11 उड़ानों को निकटवर्ती हवाई अड्डों (जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़) पर डायवर्ट किया गया था, जो कि अंतरराष्ट्रीय मानक प्रक्रिया है। किसी भी समय रनवे बंद नहीं हुआ और हवाई अड्डे ने उस दिन भी अपने दैनिक औसत के अनुसार 1,300 से अधिक उड़ानों का सुरक्षित संचालन किया।
अप्रैल 2024 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 75 वर्षों की सबसे भयानक बारिश हुई थी, जिसके दौरान दुबई एयरपोर्ट के एप्रन एरिया में फ्लाईदुबई और एमिरेट्स के विमान गहरे पानी में खड़े दिखाई दिए थे। 63 में से कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने उसी वीडियो को उठाकर हिंदी और अंग्रेजी में भ्रामक शीर्षकों जैसे “दिल्ली एयरपोर्ट बना स्विमिंग पूल”, “T3 टर्मिनल पर तैर रहे विमान” के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब शॉर्ट्स पर अपलोड कर दिया। इन वीडियोज को लाखों बार देखा गया और रिपोस्ट किया गया। इसके परिणामस्वरूप दिल्ली आने और यहां से उड़ान भरने वाले हजारों घरेलू व अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, उनके परिजनों और टूर ऑपरेटरों में दहशत फैल गई। एयरलाइंस और एयरपोर्ट हेल्पलाइन पर पूछताछ और टिकट कैंसिल कराने के लिए कॉल्स की बाढ़ आ गई।
दिल्ली एयरपोर्ट के आधिकारिक प्रवक्ता ने कानूनी कदम उठाने के बाद एक कड़ा सार्वजनिक बयान जारी किया:
“दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश की सेवा में चौबीसों घंटे समर्पित एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिता सेवा (Critical Public Utility Service) है। कतिपय सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा भ्रामक, तथ्यहीन और छेड़छाड़ किए गए वीडियो का प्रसार कोई अनजाने में हुई गलती नहीं है, बल्कि यह जानबूझकर जनता में घबराहट पैदा करने (Public Mischief), यात्रियों में अनावश्यक भय व चिंताएं उत्पन्न करने और देश के सबसे बड़े एविएशन गेटवे की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास है।
हम यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन विश्वसनीयता के उच्चतम मानकों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। कानून के तहत ऐसे असामाजिक डिजिटल तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हम आम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे असत्यापित सोशल मीडिया पोस्ट्स पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक चैनलों (@DelhiAirport) से जारी बुलेटिन पर ही ध्यान दें।”
साइबर सेल की शुरुआती तकनीकी पड़ताल में पुष्टि हुई है कि इन 63 सोशल मीडिया हैंडल्स में से अधिकांश देश की सीमाओं के भीतर से ही संचालित किए जा रहे थे। इनमें कुछ तथाकथित स्वतंत्र डिजिटल न्यूज पोर्टल, सनसनीखेज यूट्यूब चैनल और राजनीतिक/व्यक्तिगत एजेंडा चलाने वाले अकाउंट्स शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स (X Corp), मेटा (Meta) और यूट्यूब (Google) को आधिकारिक नोटिस जारी कर इन फर्जी और भ्रामक वीडियोज को तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटाने (Takedown) और संबंधित अकाउंट्स के आईपी लॉग्स व यूजर क्रेडेंशियल्स साझा करने को कहा है। नोटिस जारी होते ही कई हैंडल्स ने अपने वीडियो डिलीट कर दिए हैं, लेकिन पुलिस ने पहले ही उनके डिजिटल साक्ष्य (Hash Values & Archival Proofs) सुरक्षित कर लिए हैं।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश की राजधानी में 11 से 13 सितंबर 2026 तक 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी प्रतिनिधि और वैश्विक मीडिया दिल्ली पहुंच रहे हैं सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जब वैश्विक समुदाय की नजरें नई दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टिकी हैं, ऐसे नाजुक समय में हवाई अड्डे के डूबने और व्यवस्थाएं चरमराने की झूठी खबरें फैलाना देश की कूटनीतिक और लॉजिस्टिक छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से भी किया जा सकता है।
दिल्ली के उपराज्यपाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले ही एनएचएआई (NHAI), पीडब्ल्यूडी (PWD) और DIAL के साथ समन्वय बैठकें कर एयरपोर्ट के आसपास के अंडरपासों (द्वारका अंडरपास और महिपालपुर लिंक रोड) पर जल निकासी व्यवस्था को 24 घंटे चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं ताकि विदेशी मेहमानों और आम नागरिकों को कोई असुविधा न हो।
दिल्ली एयरपोर्ट पर जलभराव के झूठे वीडियो और उड़ानों के ठप होने की अफवाह फैलाने वाले 63 सोशल मीडिया हैंडल्स पर DIAL की कानूनी स्ट्राइक यह साफ करती है कि डिजिटल स्पेस में अभिव्यक्ति की आजादी किसी भी नागरिक या संस्था को यह अधिकार नहीं देती कि वह पुराने, विदेशी या फर्जी दृश्यों का सहारा लेकर राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की छवि बिगाड़े और जनता में दहशत फैलाए।
प्राकृतिक आपदा या तेज मानसूनी बारिश के दौरान बुनियादी ढांचे पर क्षणिक दबाव आना एक स्वाभाविक चुनौती हो सकती है, लेकिन उसका सामना पारदर्शी सूचना और त्वरित इंजीनियरिंग से किया जाता है। DIAL का 20 मिनट के भीतर पानी निकाल देना उसकी तत्परता का प्रमाण था, जबकि दुबई के फुटेज को दिल्ली का बताना सोशल मीडिया का सबसे घिनौना और गैर-जिम्मेदाराना चेहरा था।
दिल्ली पुलिस की इस दंडात्मक कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि व्यूज और फॉलोअर्स की भूख में देश की सुरक्षा, साख और यात्रियों के मानसिक सुकून से खिलवाड़ करने वाले डिजिटल उपद्रवियों को कानून के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ेगा।



