
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने सोमवार को कोलकाता के साइंस सिटी के निकट स्थित ‘मिलन मेला प्रांगण’ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समन्वय बैठक में राज्य के सबसे बड़े धार्मिक व सांस्कृतिक उत्सव दुर्गा पूजा 2026 के लिए नए प्रशासनिक दिशानिर्देशों और नीतिगत फैसलों की घोषणा की है।
राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत नई सरकार के तहत यह पहली दुर्गा पूजा है। परंपरा, सनातन मर्यादा, जनसुरक्षा और वित्तीय शुचिता को प्राथमिकता देते हुए अधिकारी प्रशासन ने कई युगांतरकारी कदम उठाए हैं। सबसे बड़ा फैसला महा अष्टमी (Maha Ashtami – 19 अक्टूबर 2026) के पावन दिन पूरे राज्य भर में शराब की दुकानों और बारों पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Liquor Ban) लगाने का लिया गया है।
इसके साथ ही, अधिकारी प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में वर्ष 2016 से शुरू किए गए रेड रोड स्थित बहुचर्चित ‘दुर्गा पूजा कार्निवल’ (Durga Puja Carnival) को समाप्त करने की घोषणा की है। इसके स्थान पर महालया (10 अक्टूबर) के दिन कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित एक भव्य 4 घंटे का कार्यक्रम और तीन विशाल ड्रोन शो आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने पूजा पंडालों और विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) संगीत पर पूर्ण पाबंदी, देवी पक्ष (महालया) से पहले पंडालों के समय-पूर्व औपचारिक उद्घाटन पर रोक, राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध न करने और विसर्जन के दौरान गंगा से क्रेन द्वारा मूर्तियों को उठाने पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
साथ ही उन्होंने पूजा आयोजकों से अपील की कि वे अपनी मूर्तियों, पंडालों और थीमों में सनातन धार्मिक व सांस्कृतिक मर्यादा का सम्मान करें और ऐसी कोई विकृति न लाएं जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचे। यह आह्वान हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा की गई अपील के अनुरूप है।
पश्चिम बंगाल के सामाजिक और आबकारी इतिहास में यह पहला अवसर है जब दुर्गा पूजा के सबसे पवित्र दिन महा अष्टमी पर शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध लगाया गया है, बैठक में पूजा कमेटियों और मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
“महा अष्टमी वह पावन दिन है जब इस राज्य का प्रत्येक श्रद्धालु, पुरुष, महिला और युवा उपवास रखकर मां भगवती के चरणों में पुष्पांजलि और अंजलि अर्पित करता है। उस पवित्र दिन राज्य भर की सभी शराब की दुकानें और बार पूरी तरह बंद रहेंगे। अष्टमी के दिन शराब की बिक्री या परोसना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह त्योहार केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का सर्वोच्च प्रतीक है। हम इस पावन दिन को नशे और हुड़दंग का शिकार नहीं बनने दे सकते। बंगाल की जनता को इस दिन आत्म-संयम और श्रद्धा के साथ मां की आराधना करनी चाहिए।
पारंपरिक रूप से दुर्गा पूजा के पांच दिनों षष्ठी से नवमी के दौरान पश्चिम बंगाल में शराब की बिक्री अपने चरम पर पहुंचती थी, जिससे राज्य सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त होता था और केवल दशमी (दशहरा) को ही ड्राई डे रखा जाता था।
अधिकारी प्रशासन ने वित्तीय राजस्व के नुकसान की परवाह न करते हुए जनभावना, महिला सुरक्षा और त्योहार की गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शुरू किया गया रेड रोड दुर्गा पूजा कार्निवल विसर्जन से पहले कोलकाता के शीर्ष 100 पूजा पंडालों की झांकियों और नृत्यों के प्रदर्शन का एक भव्य आयोजन बन चुका था। हालांकि, पिछले वर्षों में यह कार्निवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन, सरकारी धन की फिजूलखर्ची और विसर्जन में कई दिनों के अनावश्यक विलंब के आरोपों से घिरा रहा।
विसर्जन के बाद भी मूर्तियों को रोककर रखना और कार्निवल के लिए कोलकाता के सबसे व्यस्त मध्यवर्ती मार्ग (रेड रोड) को हफ्तों तक ब्लॉक रखना यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए भारी चुनौती बनता था। धार्मिक परंपराओं के अनुसार दशमी को दर्पण विसर्जन और सिंदूर खेला के बाद मूर्तियों का शीघ्र विसर्जन होना चाहिए, जबकि कार्निवल के कारण मूर्तियां दिनों तक सड़कों पर घूमती रहती थीं।
कार्निवल के स्थान पर, पश्चिम बंगाल सरकार आगामी 10 अक्टूबर (महालया) को कोलकाता के प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियम ईडन गार्डन्स में एक भव्य 4 घंटे का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगी। आसमान में आधुनिक तकनीक के जरिए मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, महिषासुर मर्दिनी की कथा और बंगाल की पारंपरिक कला को ड्रोन लाइट शो के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम में बंगाल के 23 जिलों के पारंपरिक ढाकी, बाउल गायक, छऊ नर्तक, संथाली नर्तक और प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों द्वारा चंडी पाठ की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही राज्य के छह प्रमुख शहरों (सिलीगुड़ी, दुर्गापुर, आसनसोल, मालदा, बहरामपुर और खड़गपुर) में भी दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष आयोजन किए जाएंगे।
विसर्जन जुलूसों और पूजा पंडालों के आसपास अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण और अवांछनीय गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पूजा पंडालों और नदी घाटों तक जाने वाले विसर्जन जुलूसों में डीजे (DJ) और कानफोड़ू साउंड बॉक्स पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। जुलूसों में केवल बंगाल के पारंपरिक ढाक, कांसोर-घंटा, शंख और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ही अनुमति होगी।
पूर्व सरकार द्वारा विसर्जन के तुरंत बाद प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर गंगा से क्रेन लगाकर मूर्तियों को पानी से खींचने की जो प्रथा शुरू की गई थी, उस पर मुख्यमंत्री ने रोक लगा दी है। अधिकारी ने कहा: “विसर्जन के तुरंत बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं को क्रेन से घसीटकर बाहर निकालना उनकी गरिमा और धार्मिक मर्यादा का अपमान है। हम वैज्ञानिक और सम्मानजनक जल-शोधन व्यवस्था लागू करेंगे, लेकिन क्रेन से मां की प्रतिमा का अनादर अब बर्दाश्त नहीं होगा।”
इस वर्ष 25 अक्टूबर को कोजागरी लक्ष्मी पूजा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि 24 अक्टूबर तक सभी प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न कर लिया जाए ताकि दोनों बड़े धार्मिक पर्वों के बीच कोई प्रशासनिक गतिरोध न हो।
वर्ष 2018 से तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा राज्य की लगभग 43,000 पूजा कमेटियों को बिना किसी वित्तीय जांच के सरकारी खजाने से एकमुश्त नकद अनुदान दिया जाता था (जो 2025 में बढ़कर ₹1.10 लाख प्रति कमेटी हो गया था)। अधिकारी सरकार ने इस नीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसमें बुनियादी बदलाव किए हैं मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब सरकारी खजाने से हर किसी को आंख मूंदकर चेक नहीं बांटे जाएंगे। केवल वही ग्रामीण या छोटी शहरी पूजा कमेटियां, जो सत्यापन (Scrutiny) के बाद वास्तव में वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं, ₹1,00,000 की वित्तीय सहायता के लिए पात्र होंगी।
मुख्यमंत्री ने श्रीभूमि, चेतला अग्रणी, सुरुचि संघ और बाबूबागान जैसी करोड़ों रुपये के बजट वाली हाई-प्रोफाइल कमेटियों से अपील की कि वे सरकारी अनुदान न लें और इसे जरूरतमंद ग्रामीण कमेटियों के लिए छोड़ें। छोटे और बड़े सभी आयोजकों को सीधी राहत देते हुए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि पूजा पंडालों का संपूर्ण बिजली बिल राज्य सरकार वहन करेगी (CESC और WBSEDCL के सहयोग से)। इसके अलावा, दमकल विभाग से मिलने वाले अनिवार्य फायर सेफ्टी लाइसेंस की फीस पूरी तरह माफ कर दी गई है।
हाल के वर्षों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण महालया से एक सप्ताह पहले ही, पितृ पक्ष (Pitru Paksha) के दौरान ही कई बड़े पूजा पंडालों का फीता काटकर उद्घाटन कर दिया जाता था, जिसे लेकर हिंदू विद्वानों और पुजारियों ने घोर आपत्ति जताई थी मुख्यमंत्री ने कड़ा निर्देश दिया कि देवी पक्ष (महालया) की शुरुआत से पहले किसी भी पूजा पंडाल का औपचारिक उद्घाटन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पितरों के स्मरण के समय मां दुर्गा के पंडालों का राजनीतिक उद्घाटन करना शास्त्र-सम्मत नहीं है।
यातायात व्यवस्था को सुगम रखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर किसी भी प्रकार के पूजा पंडाल, तोरण द्वार या विसर्जन अवरोध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही, कोलकाता की 13 सबसे व्यस्त सड़कों (जिनमें रेड रोड, कैथेड्रल रोड, एजेसी बोस रोड आदि शामिल हैं) को पूजा गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
पिछले कुछ वर्षों में कोलकाता के कुछ थीम-आधारित पंडालों में मां दुर्गा की पारंपरिक प्रतिमा के स्थान पर आधुनिक अमूर्त मूर्तियां बनाने, अस्त्र-शस्त्रों को हटाने, महिषासुर के स्वरूप को बदलने और अजीबोगरीब परिधान पहनाने को लेकर तीखा विवाद उत्पन्न हुआ था मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आयोजकों को आगाह किया कि वे ऐसी कोई भी थीम, कलाकृति या मूर्ति न बनाएं जिससे सनातन परंपरा और जनमानस की धार्मिक भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता की एक सीमा होती है और वह सीमा हमारे धर्मग्रंथों और आस्था के सम्मान पर समाप्त होती है।
यह रुख विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा हाल ही में जारी उस मांग-पत्र के बिल्कुल समान है, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार और आयोजकों से अपील की थी कि मां दुर्गा के ‘महिषासुरमर्दिनी’ स्वरूप की दिव्यता को विकृत न किया जाए। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘शरद सम्मान’ पुरस्कारों के लिए एक पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जूरी गठित की जाएगी, जिसमें कला, संस्कृति और वैदिक परंपराओं के वास्तविक विद्वान शामिल होंगे, न कि सत्ताधारी दल के राजनीतिक कार्यकर्ता।
त्योहार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राज्य प्रशासन ने विशेष संवेदनशीलता दिखाई है राज्य भर के वृद्धाश्रमों, अनाथालयों और आश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग बच्चों को विशेष सरकारी वाहनों के माध्यम से पंडालों के दर्शन कराने की व्यवस्था की जाएगी। कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा चौबीसों घंटे काम करने वाले संयुक्त नियंत्रण कक्ष (Joint Control Rooms) स्थापित किए जाएंगे, जो सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइटिंग, अग्निशमन सुरक्षा, निर्बाध बिजली और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता (Food Hygiene) पर लगातार नजर रखेंगे।
पश्चिम बंगाल की नई सरकार द्वारा दुर्गा पूजा 2026 के लिए घोषित ये व्यापक दिशानिर्देश राज्य के सबसे बड़े लोकोत्सव को एक नई गरिमा, अनुशासन और पवित्रता प्रदान करने का साहसिक प्रयास हैं। महा अष्टमी के पावन दिन शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर जहां सरकार ने धार्मिक शुचिता और सामाजिक मर्यादा को स्थापित किया है, वहीं डीजे संगीत पर रोक और क्रेन व्यवस्था को हटाकर पूजा के आध्यात्मिक स्वरूप को पुनर्स्थापित किया है।
ममता बनर्जी के दौर के खर्चीले रेड रोड कार्निवल की जगह ईडन गार्डन्स में महालया का लोक-केंद्रित पारंपरिक उत्सव आयोजित करना एक जन-सुलभ सांस्कृतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
सरकारी खजाने से अंधाधुंध नकद बांटने की प्रथा को रोककर केवल जरूरतमंदों की मदद करना और सभी पंडालों को मुफ्त बिजली देना वित्तीय जवाबदेही और जन-कल्याण का एक आदर्श संतुलन बनाता है। यह स्पष्ट संकेत है कि बंगाल की दुर्गा पूजा अब दिखावे और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन से मुक्त होकर अपनी प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों की ओर लौट रही है।



