राज्य
गुजरात में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाला पर प्रतिबंध एक और वर्ष के लिए बढ़ा
13 सितंबर से लागू होगा नया आदेश, 'ट्विन-पैक' बिक्री पर भी कड़े कानून और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और तंबाकू जनित गंभीर बीमारियों की रोकथाम की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए गुजरात सरकार ने राज्य भर में तंबाकू (Tobacco) या निकोटीन (Nicotine) युक्त गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर लागू पूर्ण प्रतिबंध को एक और वर्ष के लिए बढ़ाने का आधिकारिक निर्णय लिया है।
गुजरात के खाद्य सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Food Safety) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रतिबंध का यह नया आदेश 13 सितंबर 2026 से प्रभावी होकर 12 सितंबर 2027 तक पूरे राज्य में लागू रहेगा।
गुजरात सरकार वर्ष 2012 से लगातार इस प्रतिबंध को वर्ष-दर-वर्ष आधार पर विस्तारित करती आ रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO Gujarat) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और अन्य प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों के वैज्ञानिक शोधों तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) से प्राप्त ज्ञापनों के आधार पर लिया गया है।
गुजरात सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए उन सभी कानूनी खामियों को बंद कर दिया गया है जिनका उपयोग तंबाकू कंपनियां प्रतिबंध से बचने के लिए करती रही हैं अधिसूचना में कहा गया है कि यह प्रतिबंध गुटखा और पान मसाला पर समान रूप से लागू होगा, चाहे वे किसी भी ट्रेडमार्क, ब्रांड नाम, पैकेजिंग डिजाइन या विवरण के तहत बेचे जा रहे हों। यदि किसी भी उत्पाद में रासायनिक विश्लेषण के दौरान तंबाकू या निकोटीन का अंश पाया जाता है, तो उसे तत्काल गैर-कानूनी माना जाएगा।
तंबाकू कंपनियों द्वारा अक्सर प्रतिबंध से बचने के लिए सादा पान मसाला (सुपारी और सुगंधित पदार्थों से युक्त) और शुद्ध चबाने वाले तंबाकू (Zarda/Flavoured Tobacco) के पाउच अलग-अलग बेचे जाते हैं, जिन्हें उपभोक्ता खरीदकर आपस में मिलाते हैं।
अधिसूचना ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी अलग-अलग बेचे जाने वाले अवयव (Separately Marketed Ingredients) भी इस प्रतिबंध के दायरे में आते हैं, जिनका अंतिम उद्देश्य मिलाकर गुटखा या पान मसाला तैयार करना होता है।
प्रतिबंध केवल दुकानों पर बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की सीमाओं के भीतर ऐसे उत्पादों के औद्योगिक विनिर्माण (Manufacture), गोदामों और कोल्ड स्टोरेज में थोक भंडारण (Storage), अंतरराज्यीय और स्थानीय परिवहन/वितरण (Distribution), और पान की दुकानों, किराना स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर खुदरा बिक्री (Sale) सभी पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि यह निर्णय जनता, विशेषकर युवाओं को मुंह के कैंसर और अन्य घातक रोगों से बचाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (Tata Memorial Hospital, Mumbai), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और ‘हैमर’ (HAMER) जैसी प्रमुख अनुसंधान संस्थाओं द्वारा किए गए अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि गुटखा और पान मसाला का सेवन अत्यधिक कैंसरकारी (Carcinogenic) होता है। इसमें मौजूद तंबाकू-विशिष्ट नाइट्रोसामाइन (TSNA) और एरेका नट (सुपारी) के विषैले अल्कलॉइड मुंह के कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं।
सीएमओ ने ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया भारत में लगभग 35% वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। इनमें से 21% वयस्क धुआंरहित तंबाकू (Smokeless Tobacco / Chewing Tobacco) का उपयोग करते हैं, जो चबाने वाले उत्पादों की उच्च लत और व्यापकता को दर्शाता है।
3. ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF) की महामारी:
डॉक्टरों और दंत रोग विशेषज्ञों के अनुसार, गुटखा चबाने वाले युवाओं में ‘ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस’ नामक प्री-कैंसरस स्थिति तेजी से विकसित होती है, जिसमें मुंह की अंदरूनी त्वचा सख्त हो जाती है और व्यक्ति का मुंह पूरी तरह खुलना बंद हो जाता है। समय पर आदत न छोड़ने पर यह स्थिति जानलेवा मुंह के कैंसर में बदल जाती है।
भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 (FSSAI Regulations 2011) के विनियमन 2.3.4 के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि:
“किसी भी ऐसे खाद्य पदार्थ (Food Product) में तंबाकू या निकोटीन का उपयोग एक घटक (Ingredient) के रूप में नहीं किया जा सकता जो मानव उपभोग के लिए अभिप्रेत हो।”
चूंकि सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों में गुटखा और पान मसाला को ‘खाद्य पदार्थ’ के रूप में परिभाषित किया है, इसलिए राज्य सरकारों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इनके निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का विधिक अधिकार प्राप्त है। गुजरात सरकार इसी कानूनी ढांचे का उपयोग करते हुए 2012 से इस अधिसूचना को हर साल नवीनीकृत करती आ रही है।
गुजरात सरकार ने तंबाकू मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता को राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विजन के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया है मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हाल ही में ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027’ के कर्टन रेजर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल उद्योगों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, कुशल और सशक्त मानव संसाधन तैयार करना भी है।
उन्होंने रेखांकित किया कि गुजरात देश के सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर्स, ग्रीन हाइड्रोजन और फिनटेक (गिफ्ट सिटी के माध्यम से) का नेतृत्व कर रहा है, और इस विकास यात्रा को गति देने के लिए राज्य के युवाओं का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कागजों पर 2012 से प्रतिबंध लागू होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर इसके पूर्ण क्रियान्वयन में कई प्रशासनिक और व्यावहारिक बाधाएं सामने आती रही हैं गुजरात की सीमाएं राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से लगती हैं। इन राज्यों से अवैध रूप से ट्रकों और निजी वाहनों के माध्यम से गुटखा और तंबाकू के पाउच की तस्करी की शिकायतें आती रहती हैं।
प्रतिबंध के कारण कई जगहों पर अवैध गुटखा तय एमआरपी (MRP) से दोगुने और तिगुने दामों पर चोरी-छिपे बेचा जाता है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों (SPs) और स्थानीय नगर निगमों के स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 13 सितंबर से पूरे राज्य में थोक गोदामों और संदिग्ध विनिर्माण इकाइयों पर सघन छापेमारी की जाए।
गुजरात सरकार द्वारा गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाला पर प्रतिबंध को 12 सितंबर 2027 तक बढ़ाना राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हालांकि, इस प्रतिबंध की वास्तविक सफलता केवल सरकारी अधिसूचनाओं और पुलिस छापों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता, शैक्षणिक संस्थानों में तंबाकू-विरोधी अभियानों और आम जनता के सहयोग की आवश्यकता है ताकि गुजरात को वास्तव में एक ‘तंबाकू-मुक्त और स्वस्थ’ राज्य बनाया जा सके।



