शिक्षा

मीडिया के नजरिए से GST सुधारों पर शारदा विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सम्मेलन, विकसित भारत के लिए जन-जागरूकता पर जोर

ग्रेटर नोएडा: शारदा विश्वविद्यालय में वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों को लेकर मीडिया की भूमिका पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। शारदा स्कूल ऑफ मीडिया, फिल्म एंड एंटरटेनमेंट (SSMFE) की ओर से 17 और 18 अगस्त को आयोजित इस सम्मेलन को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), उत्तरी क्षेत्रीय केंद्र, नई दिल्ली का सहयोग प्राप्त हुआ।’

सम्मेलन का मुख्य विषय “मीडिया परिप्रेक्ष्य में GST सुधार: विकसित भारत के लिए नागरिक सशक्तिकरण एवं जन-जागरूकता का संवर्धन” रहा। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सरकारी अधिकारियों और मीडिया क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने GST सुधारों को आम नागरिक तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की।

कार्यक्रम में डॉ. यशोवर्धन पाठक, आयुक्त, GST एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क, भारत सरकार की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने आर्थिक और कर संबंधी सुधारों को आम जनता तक स्पष्ट जानकारी के साथ पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। इनमें प्रो. (डॉ.) दुर्गेश त्रिपाठी, प्रो. दुष्यंत कुमार राय, प्रो. (डॉ.) सचिन भारती, प्रो. रमेश कुमार शर्मा, डॉ. राजेश शुक्ला, डॉ. निवेदिता शर्मा और श्री सनीउद्दीन खान सहित कई शिक्षाविद शामिल रहे।

मीडिया विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

सम्मेलन में मीडिया जगत की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही। NDTV की वरिष्ठ पत्रकार एवं पॉडकास्टर सुश्री शालिनी कपूर तिवारी, जागरण न्यूज़ मीडिया की बिजनेस प्रोड्यूसर सुश्री आयुषी मोदी, Times Now के वरिष्ठ मीडिया प्रोफेशनल श्री अनुज मिश्रा और News18 के श्री आनंद तिवारी ने समकालीन मीडिया के सामने मौजूद चुनौतियों और आर्थिक सुधारों की रिपोर्टिंग से जुड़े अनुभव साझा किए।

वक्ताओं ने कहा कि GST जैसे विषय आम नागरिक के लिए अक्सर तकनीकी और जटिल होते हैं। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह नीतिगत बदलावों को सरल भाषा में प्रस्तुत करे, ताकि नागरिक सही जानकारी के आधार पर अपनी समझ विकसित कर सकें।

चार प्रमुख विषयों पर हुआ मंथन

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें GST सुधार और मीडिया संचार, शासन एवं नागरिक जागरूकता, संस्कृति एवं विकास संचार, मीडिया साक्षरता, उभरती प्रौद्योगिकियां और रचनात्मक अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन में जिम्मेदार पत्रकारिता और प्रभावी जनसंचार को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने विशेष रूप से भ्रामक सूचनाओं और गलत जानकारी की चुनौती से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकार, शिक्षा जगत और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि आर्थिक और सामाजिक सुधारों की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए सरकार, अकादमिक जगत और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि जननीति से जुड़ी जानकारी तभी प्रभावी बन सकती है, जब उसे नागरिकों की जरूरत और समझ के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविदों और मीडिया विशेषज्ञों की भागीदारी रही। सम्मेलन के माध्यम से GST सुधार, मीडिया, शासन, जन-जागरूकता और नई तकनीकों के बीच संबंधों पर व्यापक राष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

आयोजन में प्रो. (डॉ.) रितु एस. सूद, डीन, SSMFE ने सम्मेलन अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभाई। डॉ. आकिब अनवर बट सम्मेलन संयोजक रहे, जबकि डॉ. मुक्ता मारटोलिया और डॉ. सोनाली श्रीवास्तव ने सह-संयोजक के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

सम्मेलन ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के संदर्भ में नागरिक जागरूकता, जिम्मेदार मीडिया और प्रभावी नीति संचार की भूमिका पर संवाद को नई दिशा देने का प्रयास किया।

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