आसमान में अदम्य साहस: कैप्टन स्मित मछार
जब जांबाज फैसलों ने मौत के मुंह से खींचीं सैकड़ों जिंदगियां

मध्य-पूर्व के आसमान में 33,000 फीट की ऊंचाई पर जब एक बोइंग 737 मैक्स 8 यात्री विमान 29 सेकंड के भीतर 14,000 फीट नीचे पाताल की ओर गोता लगाने लगा, तब मौत और 174 मासूम यात्रियों के बीच केवल एक शख्स दीवार बनकर खड़ा था भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार (Captain Smit Machchhar)।
फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 (दुबई से तेल अवीव) के कॉकपिट में सह-पायलट द्वारा किए गए जानलेवा चाकू हमले, गंभीर रूप से लहूलुहान होने और शरीर से लगातार बहते खून के बावजूद कैप्टन स्मित ने जिस धैर्य, रणनीतिक सूझबूझ और अदम्य वीरता का परिचय दिया, उसने विमानन इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक को टाल दिया।
सऊदी अरब के तबूक में आपातकालीन सर्जरी के बाद भारतीय दूतावास ने आधिकारिक पुष्टि की है कि कैप्टन स्मित मछार का स्वास्थ्य अब स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। इस अविश्वसनीय कारनामे के बाद मुंबई में उनके पैतृक आवास ‘स्वास्तिक हाइट्स’ (तिलक नगर) से लेकर वैश्विक मंचों तक जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
देशवासी और प्रवासी भारतीय एक सुर में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) अथवा शांतिकालीन सर्वोच्च सैन्य वीरता पदक देने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। कैप्टन स्मित की इस जांबाजी ने भारतीय विमानन के 40 वर्ष पुराने उस गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित कर दिया है, जब 5 सितंबर 1986 को कराची में पैन एम फ्लाइट 73 (Pan Am Flight 73) के अपहरण के दौरान 23 वर्षीय सीनियर फ्लाइट पर्सर नीरजा भनोट (Neerja Bhanot) ने आतंकियों की गोलियों के सामने ढाल बनकर सैकड़ों मुसाफिरों की जान बचाई थी। चार दशकों के अंतराल पर घटित ये दोनों घटनाएं यह प्रमाणित करती हैं कि जब तकनीक, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आधुनिक उपकरण विफल हो जाते हैं, तब केवल मानव का आत्मबल, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च त्याग ही मानवता की रक्षा करता है।
30 सितंबर 2026 की भोर में फ्लाईदुबई की बोइंग 737 मैक्स 8 उड़ान (FZ1073) ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजरायल के तेल अवीव (बेन गुरियन एयरपोर्ट) के लिए सामान्य रूप से उड़ान भरी। विमान में 174 यात्री सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या में इजरायली नागरिक, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। विमान के मुख्य कमांडर 13 वर्षों के अनुभवी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार थे।
उड़ान के लगभग दो घंटे पंद्रह मिनट बीतने के बाद, जब विमान सऊदी अरब और जॉर्डन के सीमावर्ती हवाई क्षेत्र के ऊपर 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी ओमान मूल के सह-पायलट ने अचानक एक धारदार हथियार निकालकर कैप्टन स्मित मछार की गर्दन, कंधे और सीने पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और खुफिया अधिकारियों के अनुसार, हमलावर का स्पष्ट इरादा मुख्य पायलट की हत्या कर विमान को पूरी रफ्तार से जमीन या किसी आबादी वाले क्षेत्र पर क्रैश कराने का था।
हमलावर सह-पायलट ने विमान के नियंत्रण तंत्र (Control Column) को पूरी ताकत से आगे की ओर धकेल दिया और थ्रॉटल को डिस्टर्ब कर दिया। फ्लाइटरडार24 (Flightradar24) के रडार डेटा के मुताबिक, विमान मात्र एक मिनट से भी कम (लगभग 29 सेकंड) में 34,000 फीट से लुढ़क कर 16,600 फीट पर आ गया। केबिन के भीतर भारी जी-फोर्स (G-Force) उत्पन्न हो गई।ऑक्सीजन मास्क नीचे गिर गए, सामान के डिब्बे खुल गए और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। यात्री समझ चुके थे कि उनका विमान क्रैश होने जा रहा है।
शरीर से तेजी से बहते खून और असहनीय दर्द के बावजूद कैप्टन स्मित मछार का पेशेवर प्रशिक्षण और मानसिक संतुलन नहीं डिगा। वे जानते थे कि 9/11 हमलों के बाद बनाए गए कड़े विमानन नियमों के कारण कॉकपिट का दरवाजा बाहर से बुलेटप्रूफ और अभेद्य रूप से लॉक रहता है। यदि वे बेहोश हो गए, तो बाहर से कोई भी व्यक्ति अंदर आकर विमान को नहीं बचा पाएगा।
कैप्टन स्मित ने एक हाथ से हमलावर को पीछे धकेला और दूसरे हाथ से ट्रांसपोंडर पर सीधे कोड 7500 (गैर-कानूनी हस्तक्षेप / हाइजैकिंग) और 7700 (सामान्य आपातकाल) सेट कर दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने कॉकपिट के आंतरिक सुरक्षा पैनल से ‘इमरजेंसी डोर रिलीज’ स्विच को दबा दिया।
दरवाजा खुलते ही कैप्टन स्मित की आवाज केबिन तक पहुंची। अगली पंक्तियों में बैठे इजरायली यात्रियों (जिनमें एक पूर्व सुरक्षा अधिकारी यानीव और एक दंत चिकित्सक शामिल थे) ने कॉकपिट में खून से सने कैप्टन को देखा। यात्री तुरंत कॉकपिट में कूदे और उन्होंने हमलावर सह-पायलट को दबोचकर बाहर खींच लिया और उसे रस्सियों से बांध दिया। उड़ान में सफर कर रहे अन्य ऑफ-ड्यूटी क्रू मेंबर्स ने तुरंत कॉकपिट में प्रवेश किया।
विमान का एल्टीट्यूड स्थिर किया गया और कैप्टन स्मित के मार्गदर्शन में विमान को निकटतम तबूक हवाई अड्डे (Tabuk, सऊदी अरब) की ओर मोड़कर सुरक्षित उतार लिया गया। वहां विमान में सवार एक यात्री डॉक्टर ने तुरंत कैप्टन की प्राथमिक मरहम-पट्टी की, जिसके बाद उन्हें तबूक के किंग फहद अस्पताल में भर्ती कराया गया।
5 सितंबर 1986 को मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही पैन एम फ्लाइट 73 जब कराची में ईंधन भरने के लिए रुकी, तो भारी हथियारों से लैस चार फिलीस्तीनी आतंकियों ने विमान पर कब्जा कर लिया। जैसे ही आतंकियों ने विमान में प्रवेश किया, 23 वर्षीय सीनियर फ्लाइट पर्सर नीरजा भनोट ने बिजली की तेजी से इंटरकॉम पर गुप्त हाईजैक कोड दबा दिया। इस कोड के मिलते ही कॉकपिट में मौजूद अमेरिकी पायलट, को-पायलट और फ्लाइट इंजीनियर विमान की छत पर बने इमरजेंसी हैच से कूदकर बाहर निकल गए। नीरजा के इस एक निर्णय ने आतंकियों की उस बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया जिसके तहत वे विमान को हवा में उड़ाकर किसी सैन्य प्रतिष्ठान पर टकराना चाहते थे।
आतंकी संगठन ‘अबू निदाल’ के आतंकी अमेरिकी नागरिकों को चुन-चुनकर बंधक बनाना और उन्हें मारना चाहते थे। आतंकियों ने नीरजा को आदेश दिया कि वे सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठे करें। नीरजा और उनके साथियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सभी अमेरिकी पासपोर्टों को सीटों के नीचे और कूड़ेदान में छिपा दिया। जब आतंकियों ने पासपोर्ट छांटे, तो उन्हें एक भी अमेरिकी नागरिक नहीं मिला। नीरजा की इस कूटनीतिक सूझबूझ ने 40 से अधिक विदेशी नागरिकों की जान बचाई।
रात के समय जब विमान के जनरेटर बंद हो गए और विमान में घुप्प अंधेरा छा गया, तो आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां और हथगोले चलाने शुरू कर दिए। नीरजा चाहतीं तो आपातकालीन द्वार खोलकर सबसे पहले बाहर कूद सकती थीं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।उन्होंने इमरजेंसी पैराशूट स्लाइड को सक्रिय किया और एक-एक करके 300 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। अंतिम क्षणों में जब आतंकी तीन छोटे बच्चों की ओर बंदूक तानकर गोली चलाने लगे, तो नीरजा उन मासूमों के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गईं।गोलियों से छलनी होने के बावजूद उन्होंने तीनों बच्चों को बाहर धकेला और स्वयं शहादत का जाम पी लिया। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया वे यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की नागरिक थीं।
कैप्टन स्मित मछार की इस वीरता के पीछे उनका वर्षों का पेशेवर अनुशासन और कड़ा प्रशिक्षण रहा है कैप्टन स्मित मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं और उनका परिवार लंबे समय से मुंबई के तिलक नगर में निवास करता है। वर्तमान में वे अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ दुबई में रहते हैं। फ्लाईदुबई में जून 2022 में डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के रूप में शामिल होने से पहले उन्होंने भारत की प्रमुख एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) में 11 वर्षों से अधिक समय तक सेवाएं दी थीं।
वे बोइंग 737 विमानों के एक उच्च-स्तरीय ‘लाइन ट्रेनिंग कैप्टन’ (Line Training Captain) रहे हैं, जिन्होंने सैकड़ों युवा पायलटों को प्रतिकूल परिस्थितियों में विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया है। स्पाइसजेट में रहते हुए उन्होंने 9,500 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव अर्जित किया था, जिसमें 6,400 घंटे से अधिक का समय मुख्य कमांडर के रूप में था। कैप्टन स्मित का एक साल पुराना पॉडकास्ट साक्षात्कार अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था: “जब आप हजारों फीट ऊपर हवा में होते हैं, तो आपको कोई बचाने नहीं आता। वहां केवल आपका प्रशिक्षण, आपका क्रू और आपका संयम ही सब कुछ तय करता है।” आज उनके ये शब्द पूरी दुनिया में गूंज रहे हैं।
1986 में कराची के तपते रनवे पर अपनी देह पर गोलियां झेलने वाली नीरजा भनोट हों, या 2026 में 33,000 फीट की ऊंचाई पर खून से लथपथ होकर विमान का ताला खोलने वाले कैप्टन स्मित मछार दोनों का संदेश एक ही है:”जब संकट आता है, तो कायर भाग जाते हैं, लेकिन भारतीय संस्कार अपनी जान पर खेलकर दूसरों के जीवन की रक्षा करते हैं।”
कैप्टन स्मित मछार ने जो किया, वह केवल एक विमान को सुरक्षित उतारना नहीं था, बल्कि वह 174 घरों के दीपकों को बुझने से बचाना था। उनकी यह बहादुरी आने वाली पीढ़ियों के पायलटों, क्रू मेंबर्स और आम नागरिकों को यह सिखाएगी कि कैसी भी विकट परिस्थिति हो, अंतिम सांस तक हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। समूचा राष्ट्र आज अपने इस जांबाज बेटे के सम्मान में नतमस्तक है और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होकर पुनः खुले गगन में उड़ान भरने की कामना कर रहा है।



