अर्थव्यवस्थाराष्ट्रीय

त्योहारी सीजन से ठीक पहले महंगाई का करारा झटका: 19 किग्रा कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में ₹62.50 की बढ़ोतरी

दिल्ली में कीमत ₹2,810 पर पहुंची; होटल, रेस्तरां, ढाबा और कैटरिंग उद्योग पर बढ़ा परिचालन भार

नवरात्रि, दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली और आगामी वैवाहिक लग्न के त्योहारी मौसम से ठीक पहले देश भर के हॉस्पिटैलिटी, फूड सर्विस और वाणिज्यिक खान-पान उद्योग को ऊर्जा लागत का तगड़ा झटका लगा है। देश की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (Commercial LPG) सिलेंडर की कीमतों में ₹62.50 प्रति सिलेंडर की वृद्धि की घोषणा की है।
इस संशोधन के लागू होने के साथ ही देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले नीले कमर्शियल सिलेंडर का खुदरा मूल्य ₹2,747.50 से बढ़कर ₹2,810.00 प्रति सिलेंडर के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। लगातार दूसरे महीने हुई इस मूल्य वृद्धि ने खाद्य खुदरा विक्रेताओं, होटल व्यवसायियों, रेस्तरां मालिकों, पारंपरिक ढाबों, हलवाइयों, स्ट्रीट-फूड स्टॉल्स और छोटे औद्योगिक उपभोक्ताओं के वित्तीय समीकरणों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
हालांकि, आम गृहणियों और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट को ध्यान में रखते हुए राहत की बात यह रही कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडरों (Domestic LPG Cylinder) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राजधानी दिल्ली में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर ₹942.00 की पूर्ववत दर पर स्थिर बना हुआ है।
भारत अपनी एलपीजी खपत का 55% से अधिक हिस्सा विदेशों (विशेषकर खाड़ी देशों) से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी का मूल्य निर्धारण सऊदी अरामको के मासिक कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) पर आधारित होता है। अक्टूबर डिलीवरी के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में वैश्विक स्तर पर लगभग $35 से $42 प्रति मीट्रिक टन का उछाल दर्ज किया गया। उत्तरी गोलार्ध (यूरोप और अमेरिका) में सर्दियों के आगमन से पहले ही हीटिंग फ्यूल के अग्रिम भंडारण के कारण वैश्विक मांग में अचानक तेजी आई है, जिससे एशियाई हाजिर बाजार में गैस आपूर्ति महंगी हो गई।
मध्य-पूर्व (विशेष रूप से लाल सागर और फारस की खाड़ी) में निरंतर बने सैन्य तनाव के कारण वाणिज्यिक तेल एवं गैस टैंकरों को अतिरिक्त ‘वॉर रिस्क प्रीमियम’ (War Risk Insurance) चुकाना पड़ रहा है। कई जहाजों को स्वेज नहर के बजाय केप ऑफ गुड होप के लंबे मार्ग से घूमकर आना पड़ रहा है, जिससे समुद्री माल ढुलाई (Shipping Freight) की लागत लगभग 20% बढ़ गई है। यह अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स व्यय तेल कंपनियों के आयात बिल में सीधे जुड़ गया।
चूंकि तेल विपणन कंपनियां कच्चे तेल और एलपीजी का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करती हैं, इसलिए डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्यह्रास ने आयात लागत को और बढ़ा दिया है। रुपये के कमजोर होने से भारत की बंदरगाहों पर उतरने वाले तरलीकृत गैस कार्गो का लैंडिंग मूल्य (Landed Cost) स्वतः ऊंचा हो गया।
होटल और रेस्तरां उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में पहले से ही खाद्य तेल, डेयरी उत्पाद, मसाले और सब्जियों के दाम ऊंचे बने हुए हैं। गैस सिलेंडर पर ₹62.50 की यह वृद्धि सीधे उनके ‘प्राइम कॉस्ट’ (Prime Operating Cost) में इजाफा करेगी।
दिल्ली-एनसीआर में संचालित एक मध्यम आकार का रेस्तरां रोजाना 3 से 6 सिलेंडरों की खपत करता है। इस हिसाब से केवल गैस पर उनका मासिक व्यय ₹5,500 से ₹11,000 तक बढ़ जाएगा। बड़ी होटल श्रृंखलाओं और बैंक्वेट हॉलों में यह मासिक वृद्धि ₹50,000 के पार निकल जाएगी।
अक्टूबर और नवंबर का महीना मिठाइयों की बिक्री के लिए वर्ष का सबसे बड़ा सीजन होता है। छेना, गुलाब जामुन, काजू कतली, खोया बर्फी और बेसन के लड्डू बनाने के लिए दिन-रात चलने वाली भट्ठियों में शुद्ध रूप से कमर्शियल गैस सिलेंडरों का ही इस्तेमाल होता है।
दिल्ली हलवाई वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि दूध और मेवों के दाम पहले से ही 10-15% बढ़ चुके हैं। अब गैस की इस ताजा वृद्धि के बाद या तो उन्हें मिठाइयों के प्रति किलोग्राम दामों में ₹20 से ₹40 का इजाफा करना पड़ेगा, या फिर मुनाफे में भारी कटौती झेलनी होगी।
नवंबर से शुरू होने वाले शादी-ब्याह के सीजन के लिए अधिकांश इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों और कैटरर्स ने अपने ग्राहकों के साथ पहले ही ‘प्रति प्लेट’ (Per Plate) दरें तय कर रखी हैं। अग्रिम अनुबंध होने के कारण वे ग्राहकों पर तुरंत नया भार नहीं डाल सकते, जिसका सीधा नुकसान छोटे कैटरर्स को अपनी जेब से उठाना पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने मुद्रास्फीति के दबावों को सीधे आम नागरिकों के घरों तक पहुंचने से रोक दिया है। 14.2 किग्रा घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ने से मध्यमवर्गीय परिवारों को त्योहारी पकवान और खान-पान बनाने में अतिरिक्त गैस खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत नामांकित ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बैंक खातों में ₹300 प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) सब्सिडी सीधे जमा होती रहेगी। इसके चलते उनके लिए रसोई गैस की शुद्ध लागत ₹642 ही बनी रहेगी, जो ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा संबल है।
लगातार बढ़ते वाणिज्यिक ईंधन खर्च को देखते हुए विभिन्न व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों (जैसे FICCI, CII और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया – FHRAI) ने वित्त मंत्रालय और जीएसटी परिषद से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है वर्तमान में रेस्तरां क्षेत्र पर 5% जीएसटी बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लागू है। रेस्तरां संघों की मांग है कि उन्हें एलपीजी और अन्य इनपुट पर चुकाए गए 18% जीएसटी का क्रेडिट लेने की अनुमति दी जाए, जिससे उनकी कर देनदारी कम हो सके।
देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस पर अलग-अलग राज्यों द्वारा अलग-अलग वैट (VAT) लगाया जाता है। उद्योग जगत लंबे समय से मांग कर रहा है कि सभी वाणिज्यिक ईंधनों को जीएसटी के एक समान स्लैब के तहत लाया जाए ताकि अंतरराज्यीय मूल्य असमानता समाप्त हो सके। ढाबों और छोटे प्रतिष्ठानों को स्वच्छ ऊर्जा पर स्थानांतरित करने के लिए सरकार द्वारा वाणिज्यिक सौर चूल्हों या इंडक्शन आधारित किचन उपकरणों पर विशेष सब्सिडी दी जानी चाहिए।
1 अक्टूबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में हुआ ₹62.50 का इजाफा केवल एक ऊर्जा मूल्य संशोधन नहीं है, बल्कि यह आगामी त्योहारी महीनों में सेवा अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली लागत चुनौतियों का पूर्व-संकेत है।
दिल्ली में ₹2,810 की नई कीमत होटल, रेस्तरां, हलवाइयों और छोटे भोजन विक्रेताओं के लाभ मार्जिन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी।
आगामी हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या खाद्य सेवा उद्योग इस बढ़े हुए भार को स्वयं वहन करता है या फिर त्योहारी मेनू, बाहर खाने की थाली और मिठाइयों के दामों में वृद्धि कर इसे अंतिम उपभोक्ताओं की जेब पर स्थानांतरित करता है। यद्यपि घरेलू रसोई गैस के ₹942 पर स्थिर रहने से आम परिवारों के घर का बजट सुरक्षित है, लेकिन बाहर का खान-पान, कैटरिंग सेवाएं और रेस्तरां बिल निस्संदेह इस मूल्य वृद्धि की आंच से अछूते नहीं रहेंगे। प्रशासन के लिए भी यह समय अत्यधिक सतर्क रहने का है, ताकि व्यावसायिक और घरेलू सिलेंडरों के बीच बढ़ते मूल्य अंतर के चलते किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, अवैध डायवर्जन या सुरक्षा मानकों की अनदेखी को पनपने न दिया जाए।

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