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दीपावली से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को योगी सरकार की बड़ी सौगात: महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी, 60% से बढ़कर हुआ 63%
एक जुलाई 2026 से प्रभावी संशोधन के साथ पीएफ खातों में जाएगा चार माह का एरियर

धनतेरस और दीपावली के पावन पर्व के उल्लास के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के लाखों कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के कर्मियों के लिए खजाना खोलते हुए एक बड़ा त्योहारी तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के स्टाफ तथा स्थानीय निकायों के पात्र कर्मियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी करने के बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय के साथ ही उत्तर प्रदेश में राज्यकर्मियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता अपनी वर्तमान 60 प्रतिशत की दर से बढ़कर सीधे 63 प्रतिशत के नए स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधित दर एक जुलाई 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू मानी जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों को पिछले चार महीनों का संचित वित्तीय एरियर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
वर्ष 2027 के शुरुआती महीनों में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनावों से ठीक पहले लिए गए इस नीतिगत फैसले को प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक तीनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में हो रही वृद्धि और त्योहारी खर्चों के भारी दबाव के बीच कर्मचारी संगठन लगातार केंद्र सरकार के समतुल्य महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री द्वारा दी गई इस त्योहारी मंजूरी ने न केवल राज्य के लगभग पंद्रह लाख से अधिक सेवारत कर्मचारियों और आठ लाख से अधिक सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को तात्कालिक वित्तीय संबल प्रदान किया है, बल्कि राज्य की समग्र बाजार अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता मांग को भी एक नया प्रोत्साहन दिया है।
शासनादेश के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता कर्मचारियों को नवंबर 2026 के नियमित मासिक वेतन के साथ नकद रूप में जोड़कर प्रदान किया जाएगा, जिसका भुगतान दिसंबर के पहले सप्ताह में सुनिश्चित होगा। वहीं दूसरी ओर एक जुलाई 2026 से लेकर इकतीस अक्टूबर 2026 तक के चार महीनों की समयावधि का जो वित्तीय बकाया यानी एरियर बनता है, उसके संवितरण के लिए वित्त विभाग ने एक सुनियोजित और वित्तीय संतुलन बनाए रखने वाली व्यवस्था तय की है। आदेश के तहत सामान्य भविष्य निधि यानी जीपीएफ प्रणाली से आच्छादित पुराने कर्मचारियों के बकाये की शुद्ध धनराशि, आयकर की नियमानुसार कटौती के उपरांत, सीधे उनके संबंधित भविष्य निधि खातों में जमा की जाएगी। इस कदम से राज्य सरकार पर एकमुश्त तात्कालिक नकदी निकासी का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा और कर्मचारियों के दीर्घकालिक बचत कोष में भी ठोस इजाफा दर्ज होगा।
वहीं राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस के अंतर्गत आने वाले अपेक्षाकृत युवा कर्मचारियों के लिए वित्त विभाग ने अलग वित्तीय समायोजन तय किया है। शासनादेश के अनुसार एनपीएस धारक कर्मचारियों के चार माह के कुल एरियर की दस प्रतिशत धनराशि उनके टियर-वन पेंशन खाते में अनिवार्य रूप से जमा की जाएगी, जिसके समतुल्य चौदह प्रतिशत का अतिरिक्त नियोक्ता अंशदान राज्य सरकार द्वारा अपनी ओर से उनके पेंशन खाते में अंतरित किया जाएगा। इस कटौती के पश्चात शेष बचने वाली नब्बे प्रतिशत एरियर राशि कर्मचारियों को राष्ट्रीय बचत पत्रों, पब्लिक प्रोविडेंट फंड अथवा विशेष बचत योजनाओं के रूप में सुरक्षित करने का विकल्प दिया जाएगा। जिन कर्मचारियों की सेवाएं जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच समाप्त हो चुकी हैं अथवा जो इस दौरान सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्हें बकाये का पूरा भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में नकद करने की विशेष छूट प्रदान की गई है।
उत्तर प्रदेश के वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि महंगाई भत्ते में इस तीन प्रतिशत की वृद्धि का सीधा लाभ सातवें वेतन आयोग के पे-मैट्रिक्स के तहत वेतन प्राप्त कर रहे सभी स्तर के कर्मचारियों को मिलेगा। चतुर्थ श्रेणी यानी लेवल-वन के न्यूनतम वेतनमान पर कार्यरत कर्मचारियों से लेकर शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं के लेवल-चौदह के वरिष्ठ अधिकारियों तक के मूल वेतन में इसके अनुसार वृद्धि परिलक्षित होगी। उदाहरण के तौर पर न्यूनतम अठारह हजार रुपये के मूल वेतन पर काम करने वाले किसी कर्मचारी को प्रतिमाह पांच सौ चालीस रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय प्राप्त होगी, जबकि पैंतालीस हजार रुपये के औसत मूल वेतन वाले मध्यम स्तर के कर्मचारियों के मासिक भत्ते में लगभग एक हजार तीन सौ पचास रुपये का शुद्ध इजाफा होगा। इसी क्रम में पचहत्तर हजार रुपये से अधिक के मूल वेतन पर कार्यरत वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारियों के वेतन में दो हजार दो सौ पचास रुपये से अधिक की मासिक वृद्धि दर्ज की जाएगी।
इस डीए बढ़ोतरी का दायरा केवल सिविल सचिवालय या कलेक्ट्रेट के पारंपरिक सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा और व्यापक लाभ राज्य के बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लाखों शिक्षकों, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ताओं व सहायक अध्यापकों, सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के प्रोफेसरों तथा प्राविधिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों के कर्मचारियों को भी मिलेगा। इसके साथ ही नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के नियमित कर्मचारियों को भी इस शासनादेश की परिधि में शामिल किया गया है, बशर्ते संबंधित स्थानीय निकाय अपने स्वयं के आंतरिक वित्तीय स्रोतों से इस अतिरिक्त व्यय भार को वहन करने में सक्षम हों।
वित्त विशेषज्ञों के प्रारंभिक आकलनों के अनुसार महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत में की गई इस तीन प्रतिशत की संयुक्त बढ़ोतरी से उत्तर प्रदेश के राजकीय खजाने पर सालाना लगभग तीन हजार से साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवर्ती वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। चालू वित्तीय वर्ष के शेष महीनों और चार माह के पूर्वव्यापी एरियर को मिलाकर यह तात्कालिक वित्तीय दायित्व लगभग दो हजार करोड़ रुपये के आसपास बैठेगा। हालांकि, वित्त विभाग के नीति नियंताओं का मानना है कि राज्य के स्वयं के कर राजस्व में जीएसटी, वैट और आबकारी संग्रह के माध्यम से हो रही निरंतर वृद्धि के चलते राज्य का राजकोष इस अतिरिक्त व्यय को पूरी तरह आत्मसात करने की मजबूत स्थिति में है। इसके अतिरिक्त त्योहारी सीजन में कर्मचारियों के हाथों में जाने वाला यह अतिरिक्त धन अंततः राज्य के खुदरा बाजारों, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियल एस्टेट सेक्टरों में ही खर्च होगा, जिससे राज्य की आंतरिक आर्थिक गतिविधियों को नई गतिशीलता प्राप्त होगी।
राजनीतिक और नीतिगत विश्लेषक इस फैसले को वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में एक अत्यंत सधा हुआ और समयोचित दांव मान रहे हैं। पिछले कई महीनों से राज्य के विभिन्न कर्मचारी संघ, शिक्षक महासंघ और पेंशनर्स एसोसिएशन पुरानी पेंशन बहाली, पदोन्नति विसंगतियों और महंगाई भत्ते में देरी को लेकर मुखर हो रहे थे और कई जिलों में विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। ऐसे संवेदनशील मोड़ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा केंद्र सरकार के निर्णय के तत्काल बाद बिना किसी अनावश्यक प्रशासनिक विलंब के डीए फाइल को हरी झंडी दिखाना यह दर्शाता है कि सरकार राज्य के सबसे बड़े और संगठित मध्यमवर्गीय कार्यबल को किसी भी सूरत में नाराज नहीं करना चाहती। केंद्र द्वारा 63 प्रतिशत डीए की घोषणा के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश द्वारा भी उसी दर को अपनाना प्रशासनिक समरूपता बनाए रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को पुख्ता करता है।
दीपावली से ठीक पहले इस बहुप्रतीक्षित घोषणा के सार्वजनिक होते ही राज्य भर के कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उत्तर प्रदेश सचिवालय कर्मचारी संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के इस त्वरित और कल्याणकारी निर्णय का गर्मजोशी से स्वागत किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि त्योहारों के मौके पर इस प्रकार का आर्थिक संबल मिलने से लाखों परिवारों में पर्व का उल्लास दोगुना हो जाएगा और वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को अधिक गरिमा और सहजता के साथ पूरा कर सकेंगे। इसके साथ ही कर्मचारी प्रतिनिधियों ने यह मांग भी दोहराई है कि सरकार को आगामी बजट सत्र से पूर्व कर्मचारियों की लंबित पदोन्नतियों, कैशलेस चिकित्सा उपचार के सरलीकरण और पुरानी पेंशन से जुड़े नीतिगत विषयों पर भी इसी प्रकार की सकारात्मक और त्वरित प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए।



