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भारतीय तेज गेंदबाजी के आधुनिक युग के अगुआ मोहम्मद शमी का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास

13 वर्षों के ऐतिहासिक सफर पर लगा विराम, 64 टेस्ट मैचों में 229 विकेटों के साथ सफेद जर्सी को कहा अलविदा

भारतीय टेस्ट क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में अपनी अचूक सीम, पैनी गति और घातक रिवर्स स्विंग से दुनिया भर के दिग्गज बल्लेबाजों के होश उड़ाने वाले देश के प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। तैंतीस साल से अधिक समय तक लाल गेंद के प्रारूप में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की सबसे मजबूत रीढ़ रहे इस दिग्गज सीमर ने शुक्रवार देर शाम सोशल मीडिया पर एक भावुक और विस्तृत संदेश साझा करते हुए अपने तेरह वर्ष लंबे गौरवशाली टेस्ट करियर के समापन की औपचारिक घोषणा की। वर्ष 2013 के ऐतिहासिक नवंबर महीने में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में सचिन तेंदुलकर के विदाई टेस्ट मैच के दौरान पदार्पण करने वाले शमी ने अपने टेस्ट जीवन का अंत 64 टेस्ट मुकाबलों में 27.71 की बेहतरीन गेंदबाजी औसत से 229 विकेटों के साथ किया। अपनी बेजोड़ कला और कलाई की जादुई स्थिति के लिए दुनिया भर में मशहूर इस गेंदबाज ने साफ किया है कि लाल गेंद के लंबे प्रारूप से संन्यास लेने के बावजूद वे सीमित ओवरों के क्रिकेट यानी वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारतीय टीम के लिए खेलना जारी रखेंगे।
शमी के इस संन्यास के ऐलान के साथ ही भारतीय क्रिकेट के उस स्वर्णिम तेज गेंदबाजी दौर के एक बड़े अध्याय का पटाक्षेप हो गया है, जिसने पिछले एक दशक में भारत को केवल उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड की तेज व उछाल भरी पिचों पर भी टेस्ट मैच और टेस्ट सीरीज जीतने वाली दुनिया की सबसे खौफनाक टीम में तब्दील कर दिया था। जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा और उमेश यादव के साथ मिलकर शमी ने जिस पेस-चौकड़ी का निर्माण किया था, उसने विश्व क्रिकेट में भारतीय टीम की पहचान को पूरी तरह बदलकर रख दिया था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों, पूर्व कप्तानों और वर्तमान साथियों ने शमी के इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय टेस्ट इतिहास के सर्वकालिक महानतम तेज गेंदबाजों में से एक बताया है।
मोहम्मद शमी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर भारतीय टेस्ट कैप नंबर 279 और सफेद जर्सी की तस्वीर के साथ एक बेहद मार्मिक नोट साझा किया। उन्होंने लिखा कि जब उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक छोटे से गांव सहजपुर अलीनगर से निकलकर उन्होंने पहली बार हाथ में चमचमाती लाल गेंद थामी थी, तब उनके पास सिर्फ एक सपना था कि वे अपने देश का मान बढ़ाने के लिए मैदान पर अपनी जान लड़ा देंगे। उन्होंने कहा कि 2013 में ईडन गार्डन्स की हरी घास पर जब उन्हें टेस्ट कैप सौंपी गई थी, उस पल की धड़कनें वे आज भी महसूस कर सकते हैं। शमी ने आगे लिखा कि पिछले तेरह सालों में उन्होंने हर एक टेस्ट मैच अपने दिल और आत्मा से खेला। इस दौरान उन्हें अनगिनत सफलताएं मिलीं, ऐतिहासिक जीतें देखने को मिलीं, लेकिन साथ ही कई गंभीर चोटों, व्यक्तिगत दुखों, शारीरिक सर्जरी और मानसिक तनावों का सामना भी करना पड़ा। हर चोट के बाद जब लोगों ने यह सोचा कि उनका करियर खत्म हो गया है, तब वे केवल टेस्ट क्रिकेट के प्रति अपने बेपनाह प्यार के दम पर दोबारा मैदान में उतरे और टीम के लिए पसीना बहाया।
अपने भावुक विदाई नोट में शमी ने स्पष्ट रूप से लिखा कि आज वे बहुत भारी मन लेकिन असीम संतोष और अनगिनत अविस्मरणीय यादों के साथ टेस्ट क्रिकेट के इस लंबे सफर से खुद को अलग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका शरीर और विशेष रूप से उनकी टखने और घुटने की स्थिति अब इस बात की गवाही दे रही है कि पांच दिनों के भीषण शारीरिक और मानसिक तनाव को लगातार झेलना अब उनके लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। शमी ने कहा कि वे किसी भी सूरत में आधी-अधूरी फिटनेस के साथ मैदान पर उतरकर अपने देश और अपनी कैप के सम्मान से समझौता नहीं करना चाहते थे। उन्होंने भारतीय टीम के सभी कप्तानों महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा का विशेष आभार व्यक्त किया जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उन पर अटूट भरोसा जताया और गेंद उनके हाथों में थमाई। इसके अलावा उन्होंने बीसीसीआई, राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के फिजियो और डॉक्टरों, बंगाल क्रिकेट संघ तथा अपने करोड़ों प्रशंसकों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने हर उतार-चढ़ाव में उनका हाथ थामे रखा।
यदि मोहम्मद शमी के टेस्ट करियर के पन्नों को पलटा जाए, तो उनकी यात्रा किसी प्रेरणादायक फिल्मी पटकथा से कम नजर नहीं आती। उत्तर प्रदेश में पर्याप्त अवसर न मिलने के बाद कोलकाता की क्लब क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने वाले इस युवा गेंदबाज ने घरेलू क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी के दौरान लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार और रिवर्स स्विंग से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। नवंबर 2013 में जब वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आई, तो उन्हें कोलकाता के ईडन गार्डन्स में डेब्यू करने का मौका मिला। यह वही ऐतिहासिक टेस्ट मैच था जिसमें पूरा देश महान सचिन तेंदुलकर के 199वें टेस्ट का गवाह बन रहा था। लेकिन उस मुकाबले की दूसरी पारी में जब पुरानी गेंद रिवर्स होना शुरू हुई, तो उन्नीस साल के शमी ने कैरेबियाई बल्लेबाजों के स्टंप्स उखाड़कर तहलका मचा दिया। उन्होंने उस पदार्पण मैच की पहली पारी में चार और दूसरी पारी में पांच विकेट झटकते हुए कुल 118 रन देकर नौ विकेट अपने नाम किए। किसी भी भारतीय तेज गेंदबाज द्वारा टेस्ट डेब्यू पर किया गया यह आज भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
शमी की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत उनकी कलाई की सीध और गेंद की सीम का हवा में बिल्कुल सीधा घूमना था। क्रिकेट की दुनिया में कई तेज गेंदबाज हुए हैं, लेकिन विश्व के जाने-माने तेज गेंदबाजों और कमेंटेटरों का हमेशा से मानना रहा है कि शमी की कलाई की स्थिति और सीम प्रेजेंटेशन दुनिया में सबसे सुंदर और घातक थी। जब वे गेंद छोड़ते थे, तो गेंद की चमड़े की सिलाई नब्बे डिग्री के कोण पर बिल्कुल सीधी तैरती हुई बल्लेबाज की तरफ बढ़ती थी। पिच पर टप्पा खाने के बाद गेंद किसी भी दिशा में हरकत करने में सक्षम होती थी, जिसके कारण बल्लेबाज कभी यह भांप नहीं पाते थे कि गेंद अंदर आ रही है या बाहर जा रही है। इसी घातक कला के दम पर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में साठ से अधिक बल्लेबाजों को सीधे बोल्ड मारा या पगबाधा आउट किया, जो उनकी स्टंप-टू-स्टंप लाइन की निरंतरता को दर्शाता है।
भारतीय क्रिकेट के पारंपरिक ढांचे में हमेशा से यह माना जाता था कि भारत केवल अपने घरेलू मैदानों पर स्पिनरों की बदौलत टेस्ट जीत सकता है और विदेशी दौरों पर भारतीय टीम की हार लगभग तय होती है। लेकिन विराट कोहली और रवि शास्त्री के नेतृत्व में जब भारतीय टेस्ट टीम ने विदेशी पिचों पर आक्रामकता के साथ जीतने की संस्कृति विकसित की, तो शमी उसके सबसे बड़े सिपहसालार बने। वर्ष 2018 के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जोहानिसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम की बेहद खतरनाक और असमान उछाल वाली पिच पर जब बल्लेबाजों के लिए खड़े रहना भी मुश्किल था, शमी ने दूसरी पारी में अट्ठाईस रन देकर पांच विकेट चटकाए और भारत को एक ऐतिहासिक और यादगार जीत दिलाई। इसी तरह वर्ष 2018 के अंत में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम की सबसे तेज और बाउंस वाली पिच पर उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को अपनी बाउंसर और स्विंग से आतंकित करते हुए 56 रन देकर छह विकेट हासिल किए, जो उनके करियर की किसी एक पारी का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन बना।
शमी की टेस्ट क्रिकेट में सबसे घातक पहचान ‘सेकंड इनिंग्स बॉलर’ यानी दूसरी या चौथी पारी के विशेषज्ञ के रूप में बनी। जब टेस्ट मैच अपने तीसरे, चौथे या पांचवें दिन में प्रवेश करता था, पिच टूट चुकी होती थी और धूप के कारण लाल गेंद अपनी चमक खोकर खुरदरी हो जाती थी, तब शमी का मुकाबला करना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक डरावना अनुभव बन जाता था। वे पुरानी गेंद से इतनी तेजी और नियंत्रण के साथ रिवर्स स्विंग कराते थे कि बल्लेबाजों के पास उनके इन-स्विंगर्स को रोकने के लिए फुटवर्क ही कम पड़ जाता था। विशाखापट्टनम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2019 में उनके द्वारा तोड़े गए स्टंप्स या लॉर्ड्स के मैदान पर जो रूट और बेयरस्टो के खिलाफ उनके इनस्विंगर स्पेल टेस्ट क्रिकेट की अमर धरोहरों में शामिल हो चुके हैं।
गेंदबाजी के अलावा मोहम्मद शमी ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट में बल्ले से भी एक ऐसा कारनामा किया है जिसे इतिहास कभी नहीं भूल सकता। अगस्त 2021 में ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के पांचवें दिन भारतीय टीम दूसरी पारी में हार के मुहाने पर खड़ी थी। भारत के आठ प्रमुख बल्लेबाज 209 रन पर पवेलियन लौट चुके थे और टीम की बढ़त बेहद मामूली थी। ऐसे नाजुक मोड़ पर मोहम्मद शमी ने दसवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए जसप्रीत बुमराह के साथ मिलकर नौवें विकेट के लिए अट्ठासी रनों की अविश्वसनीय और नाबाद साझेदारी की। शमी ने उस दबाव भरे माहौल में इंग्लिश तेज गेंदबाजों की शॉर्ट गेंदों की धज्जियां उड़ाते हुए लॉर्ड्स के ऐतिहासिक ऑनर बोर्ड के सामने नाबाद 56 रनों की ताबड़तोड़ अर्धशतकीय पारी खेली। इस साझेदारी ने न केवल भारत को हार से बचाया, बल्कि मैच का पासा ऐसा पलटा कि भारत ने उसी दोपहर इंग्लैंड को मात्र 120 रनों पर समेटकर लॉर्ड्स के मैदान पर तिरंगा लहरा दिया।
शमी का टेस्ट करियर जितनी सफलताओं से भरा रहा, उतनी ही बार उन्होंने अपने जीवन में अप्रत्याशित व्यक्तिगत और शारीरिक विपदाओं का सामना भी किया। 2015 विश्व कप के दौरान उनके घुटने में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद वे लगभग दो साल तक टेस्ट क्रिकेट से बाहर रहे। इसके बाद 2018 में उनके निजी जीवन में पारिवारिक विवादों और कानूनी मुकदमों का ऐसा दौर आया जिसने किसी भी सामान्य खिलाड़ी के मानसिक संतुलन को हिलाकर रख दिया होता। लेकिन शमी का चरित्र अलग मिट्टी का बना था। वे जब भी मैदान पर सफेद जर्सी पहनकर उतरे, उन्होंने अपने व्यक्तिगत दर्द को पीछे छोड़ दिया और गेंद हाथ में आते ही एक शेर की तरह दहाड़ते नजर आए। 2021 में वे कपिल देव, जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और इशांत शर्मा के बाद टेस्ट क्रिकेट में दो सौ विकेटों का ऐतिहासिक आंकड़ा छूने वाले भारत के पांचवें तेज गेंदबाज बने। सेंचुरियन के मैदान पर जब उन्होंने अपना दो सौवां विकेट लिया, तो उन्होंने आसमान की ओर देखकर अपने दिवंगत पिता को याद किया था, जिन्होंने उन्हें अमरोहा के खेतों में नेट्स बनाकर गेंदबाजी का ककहरा सिखाया था।
शमी के संन्यास की घोषणा के बाद भारतीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत से भावुक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। भारत के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने कहा कि शमी एक सच्चे योद्धा और टेस्ट क्रिकेट के बेताज बादशाह रहे हैं। उनके हाथ से निकलने वाली सीम की खूबसूरती को क्रिकेट की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज किया जाना चाहिए। पूर्व साथी और दिग्गज तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने लिखा कि लाल गेंद अब भले ही शमी के हाथों में न हो, लेकिन जिस तरह से उन्होंने पिछले एक दशक में भारतीय तेज गेंदबाजी की नई संस्कृति को गढ़ा है, उसकी सुगंध हमेशा ड्रेसिंग रूम में महकती रहेगी। वहीं कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि टेस्ट टीम में शमी की मौजूदगी ही विरोधी कप्तानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींचने के लिए काफी होती थी और उनका अनुभव और कौशल टेस्ट टीम के लिए हमेशा अपूरणीय रहेगा।
भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के लिए शमी का यह संन्यास एक बड़ी चुनौती लेकर आया है। भारतीय टीम को आगामी महीनों में कई महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के चक्र में भाग लेना है। ऐसे में 229 टेस्ट विकेटों के अपार अनुभव, पुरानी गेंद से मैच पलटने की जादुई कला और विदेशी पिचों पर निरंतर दबाव बनाने की क्षमता वाले गेंदबाज का विकल्प खोजना आसान नहीं होगा। हालांकि, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, आकाश दीप और मुकेश कुमार जैसे युवा तेज गेंदबाजों के लिए अब यह एक सुनहरा अवसर होगा कि वे शमी द्वारा स्थापित किए गए उच्च मानकों पर खरे उतरें और भारतीय तेज गेंदबाजी की इस महान मशाल को आगे लेकर चलें।

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