दिल्ली में 18 साल का रिकॉर्ड टूटा: न्यूनतम तापमान 21°C पर लुढ़का
2008 के बाद सितंबर की सबसे ठंडी और धुंध भरी सुबह

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में मंगलवार की सुबह मौसम ने एक दुर्लभ, अप्रत्याशित और ऐतिहासिक करवट ली। दिल्लीवासियों की जब आंखें खुलीं, तो आसमान में हल्की धुंध (Haze) की चादर लिपटी हुई थी और फिजाओं में अक्टूबर के अंत या नवंबर जैसी ‘गुलाबी ठंड’ का स्पष्ट अहसास था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राजधानी के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला (Safdarjung Observatory) में न्यूनतम तापमान गिरकर 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य औसत से 2.3 डिग्री सेल्सियस कम (-2.3°C below normal) है।
आईएमडी के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह वर्ष 2008 के बाद से यानी पिछले 18 वर्षों में सितंबर के महीने में दिल्ली में दर्ज किया गया सबसे कम न्यूनतम तापमान (Lowest Minimum Temperature in September since 2008) है। इससे पूर्व 6 सितंबर 2008 को राष्ट्रीय राजधानी का न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
मौसम वैज्ञानिकों ने इस तीव्र मौसमी बदलाव की मुख्य वजह दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में हुई मानसूनी बारिश, आसमान में बादलों की निरंतर मौजूदगी से दिन के तापमान में आई गिरावट, और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अंतिम विदाई चरण (Monsoon Withdrawal Phase) के साथ उत्तर-पश्चिम से आ रही ठंडी व शुष्क हवाओं के मेल को बताया है। सर्द सुबह के साथ शहर की क्षितिज रेखा पर छाई धुंध ने जहां लोगों को समय से पहले आ रही सर्दी का अहसास कराया, वहीं दूसरी ओर इसने आने वाले विंटर पॉल्यूशन सीजन को लेकर भी एक नई वैज्ञानिक बहस छेड़ दी है।
आईएमडी के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर के अंतिम दिनों में पारे का गिरकर 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचना कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह कई समकालिक वायुमंडलीय परिघटनाओं (Atmospheric Phenomena) का संयुक्त परिणाम है
दिल्ली-एनसीआर में पिछले सप्ताह के अंत में हुई झमाझम बारिश के कारण जमीन की सतह में नमी का स्तर काफी बढ़ गया था। बारिश के दौरान लगातार घने बादल छाए रहने के कारण सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे ‘दिन की हीटिंग’ (Daytime Heating) में भारी कमी आई। सफदरजंग में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस नीचे गिरकर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट गया था। जब दिन में जमीन गर्म ही नहीं हुई, तो रातों के दौरान वायुमंडल को गर्म रखने के लिए पर्याप्त अवशिष्ट ताप (Residual Heat) बचा ही नहीं।
दिल्ली वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विदाई चरण (Monsoon Withdrawal) से गुजर रही है। इस समय हवा का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र और गर्म पूर्वी हवाओं (Easterlies) की जगह अब पश्चिमी हिमालय (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश) से आने वाली ठंडी और शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाओं (North-Westerlies) ने ले ली है। पहाड़ों के ऊपरी इलाकों में हाल ही में हुए हल्के हिमपात और वर्षा के कारण इन हवाओं में प्राकृतिक ठंडक मौजूद थी, जिसने मैदानी इलाकों में प्रवेश करते ही तापमान को तेजी से नीचे खींच लिया।
सोमवार रात को जैसे ही बारिश का सिस्टम आगे बढ़ा, दिल्ली के ऊपरी वायुमंडल से बादलों की परत छंट गई। मौसम विज्ञान में यह स्थापित सिद्धांत है कि जब आसमान पूरी तरह साफ होता है और हवा की गति शांत या बेहद धीमी (4 से 6 किमी/घंटा) होती है, तो धरती दिनभर अवशोषित की गई गर्मी को विकिरण (Radiation) के जरिए तेजी से अंतरिक्ष में छोड़ देती है। बादल न होने के कारण यह गर्मी वापस परावर्तित होकर सतह पर नहीं रुकती। भोर के समय (तड़के 4:30 से 6:00 बजे के बीच) विकिरण शीतलन अपने चरम पर पहुंच गया, जिसके चलते पारा गिरकर 21°C के स्तर पर जा पहुंचा।
मंगलवार की सुबह जब दिल्ली के निवासी सैर के लिए निकले या दफ्तरों के लिए रवाना हुए, तो इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, अक्षरधाम, धौला कुआं और बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे प्रमुख स्थलों पर धुंध की एक मोटी चादर दिखाई दे रही थी। दृश्यता घटकर कई स्थानों पर 1,200 से 1,500 मीटर रह गई थी। इसने लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या दिल्ली में समय से पहले ही कुख्यात ‘विंटर स्मॉग’ ने दस्तक दे दी है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह धुंध रासायनिक या विषैला स्मॉग नहीं थी, बल्कि यह मुख्य रूप से रेडिएशन मिस्ट या प्राकृतिक धुंध (Natural Haze) थी। सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता (Relative Humidity) 92 प्रतिशत दर्ज की गई। जब हवा में अत्यधिक नमी हो और तापमान गिरकर ओसांक (Dew Point Temperature) के बेहद करीब पहुंच जाता है, तो हवा की जलवाष्प धारण करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप जलवाष्प के सूक्ष्म कण हवा में संघनित होकर तैरने लगते हैं, जिससे दृश्यता कम हो जाती है।
सुबह के समय धरातलीय हवा की गति 5 किमी प्रति घंटे से भी कम थी। शांत मौसम के कारण स्थानीय उत्सर्जन (गाड़ियों का धुआं और सड़कों की बारीक धूल) हवा के साथ उड़ने के बजाय सतह के करीब ही जमा हो गए। जलकणों ने इन सूक्ष्म धूल कणों (Aerosols) के इर्द-गिर्द नाभिक (Condensation Nuclei) बनाकर एक धुंधली परत का निर्माण कर दिया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक समीर (SAMEER) ऐप के अनुसार, मंगलवार सुबह दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 132 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ (Moderate) श्रेणी में आता है। यह आंकड़ा प्रमाणित करता है कि आसमान में दिखने वाली धुंध किसी पराली के धुएं या औद्योगिक जहर का नतीजा नहीं थी, बल्कि यह शुद्ध रूप से मौसमी बदलाव और नमी का दृश्य प्रभाव था।
कई हलकों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या इस समय से पहले आई ठंड का संबंध प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे ‘ला नीना’ (La Niña) प्रभाव से है? मौसम विज्ञानियों ने इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है मौसम विज्ञानियों ने स्पष्ट किया कि मंगलवार की रिकॉर्ड ठंडक को सीधे तौर पर किसी वैश्विक अल नीनो या ला नीना घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह पूरी तरह से उत्तरी भारत के ऊपर बने एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून गर्त (Monsoon Trough) के गुजरने के बाद का स्थानीय मौसम प्रभाव था।
हालांकि, दीर्घकालिक मॉडल्स यह संकेत दे रहे हैं कि वर्ष 2026 के अंतिम महीनों में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ला नीना की स्थितियां और मजबूत होंगी। इतिहास बताता है कि ला नीना वर्षों के दौरान उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी के महीनों में कड़ाके की ठंड पड़ती है और शीतलहर (Cold Waves) के दौर अधिक लंबे और तीव्र होते हैं।
तापमान में आई इस अचानक 2.3 डिग्री की गिरावट ने दिल्लीवासियों की दैनिक दिनचर्या और जीवनशैली को रातों-रात बदल दिया है सितंबर के महीने में सामान्यतः दिल्ली में उमस भरी चिपचिपी गर्मी रहती है, जिसके कारण घरों और दफ्तरों में 24 घंटे एयर कंडीशनर चलाने पड़ते हैं। लेकिन मंगलवार तड़के तापमान 21 डिग्री तक गिर जाने के कारण अधिकांश घरों में एसी पूरी तरह बंद हो गए और लोगों को पंखों की गति भी 1 या 2 पर करनी पड़ी।
सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए लोधी गार्डन, नेहरू पार्क, डियर पार्क और इंडिया गेट जाने वाले बुजुर्गों और बच्चों को हल्के स्वेटर, जैकेट या फुल-स्लीव्स टी-शर्ट पहने देखा गया। न्यूनतम तापमान में आई इस गिरावट और दिन में 30-32 डिग्री के सामान्य पारे के चलते दिल्ली की दैनिक बिजली मांग (Peak Power Demand) में लगभग 1,200 मेगावाट की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बिजली ग्रिड पर दबाव काफी कम हुआ है।
आईएमडी का अनुमान है कि अगले 48 घंटों में बारिश की कोई संभावना नहीं है। दिन के समय चटख धूप निकलने के कारण अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा, जिससे दोपहर में हल्की गर्मी का अहसास हो सकता है। हालांकि, न्यूनतम तापमान 21 से 23 डिग्री के बीच ही बना रहेगा। अक्टूबर के पहले हफ्ते से हवा में नमी कम होगी और शुष्क ठंडक का दायरा बढ़ेगा।
दिन का तापमान 32°C और रात का 21°C होने से दिन और रात के पारे में लगभग 11 डिग्री सेल्सियस का अंतर आ चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, यह तापमान अंतर मानव शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) को प्रभावित करता है। एम्स और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने विशेष रूप से अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सुबह की ठंडी हवा से बचने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है।
तापमान में इस रिकॉर्ड गिरावट ने दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में घोषित ‘विंटर पॉल्यूशन मास्टरप्लान’ (1 नवंबर से निर्माण कार्य बंद, 50% वर्क-फ्रॉम-होम और दोगुनी पार्किंग दरें) की प्रासंगिकता को सही साबित कर दिया है। जैसे-जैसे तापमान गिरेगा, वायुमंडल की ‘मिक्सिंग हाइट’ कम होती जाएगी, जिससे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अग्रिम कदम उठाना अनिवार्य हो जाएगा।
मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को दिल्ली के सफदरजंग में दर्ज हुआ 21 डिग्री सेल्सियस का न्यूनतम तापमान केवल मौसम विभाग की लॉगबुक का एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजधानी के बदलते जलवायु और मौसमी मिजाज का एक ऐतिहासिक प्रतीक है। 18 वर्षों के लंबे अंतराल (2008 से 2026) के बाद सितंबर के महीने में ऐसी ठंडक और धुंध का दोबारा लौटना यह दर्शाता है कि प्रकृति का अपना एक चक्र होता है, जो कई वर्षों के अंतराल पर खुद को दोहराता है।
यह रिकॉर्ड ठंडक इस बात का औपचारिक ऐलान है कि वर्ष 2026 का लंबा और उमस भरा मॉनसून अब विदा ले चुका है और दिल्ली-एनसीआर ने एक शुष्क, सुहावने और ‘गुलाबी ठंड’ वाले पोस्ट-मॉनसून दौर में कदम रख दिया है। आने वाले दिनों में दोपहर की खिली धूप और रात की यह ताजगी भरी ठंडक दिल्ली के जनजीवन को सुकून देती रहेगी। हालांकि, इस खूबसूरत मौसम के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि प्रशासन और आम नागरिक प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर अभी से सतर्क रहें, ताकि 18 साल बाद लौटी यह सुहानी ठंडक आने वाले हफ्तों में धुएं और स्मॉग के अंधकार में तब्दील न होने पाए।



