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उत्तराखंड के हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज: ‘शुद्धीकरण’ विवाद में SC/ST एक्ट और BNS की गंभीर धाराओं में केस

दलित नेता के अपमान का आरोप, राजनीतिक घमासान तेज

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर उत्तराखंड से उठा सियासी बवंडर अब एक गंभीर कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले की हल्द्वानी नगर कोतवाली (Haldwani City Kotwali) में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) के तहत आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
यह मामला हिंदू दक्षिणपंथी संगठन ‘श्री राम सेना धर्माथ सेवा न्यास’ से जुड़े और वाल्मीकि (अनुसूचित जाति) समुदाय के सदस्य अमित कुमार की विस्तृत शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने अधूरे और भ्रामक तथ्यों के आधार पर धार्मिक और स्वच्छता अनुष्ठान को जानबूझकर ‘जातिगत रंग’ दिया और उन्हें सार्वजनिक पटल पर ‘छुआछूत का समर्थक’ व ‘दलित विरोधी’ चित्रित कर पूरे अनुसूचित जाति समाज की भावनाओं को आहत किया है।
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) टी. सी. मंजूनाथ ने प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अमित सैनी को जांच अधिकारी (IO) नियुक्त किया गया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया था। रैली के दो दिन बाद 10 अगस्त को ‘श्री राम सेना धर्माथ सेवा न्यास’ के कार्यकर्ताओं ने रामलीला मैदान में गंगाजल छिड़ककर सफाई की और एक हवन का आयोजन किया। संगठन का दावा था कि कांग्रेस रैली के दौरान की गई नारेबाजी और खड़गे द्वारा दिए गए कुछ राजनीतिक बयानों के विरोध तथा मैदान की सांस्कृतिक पवित्रता की बहाली के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान किया गया था।
कांग्रेस ने इस अनुष्ठान को तत्काल ‘दलित विरोधी मानसिकता’ और ‘अस्पृश्यता’ (छुआछूत) का प्रत्यक्ष रूप करार दिया। राज्यसभा में खुद मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाया और आरोपियों के खिलाफ अस्पृश्यता उन्मूलन कानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। उत्तराखंड भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में रैलियां निकालीं।
शनिवार (29 अगस्त) को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय (इंदिरा भवन) में राहुल गांधी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला बोला:
“हमारे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश और संविधान के लिए समर्पित कर दिया, वे हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं और उसके बाद वहां ‘शुद्धीकरण’ कराया जाता है। यह कौन करता है? यह भाजपा और आरएसएस की मानसिकता है। भारतीय संविधान में ‘शुद्धीकरण’ छुआछूत का ही दूसरा नाम है। संविधान के तहत अस्पृश्यता एक संज्ञेय अपराध है। जब आप शुद्धीकरण करते हैं, तो आप यह संदेश दे रहे हैं कि दलित अछूत हैं। 20 दिन बीत जाने के बाद भी उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार तत्काल एससी/एसटी एक्ट के तहत दोषियों पर मुकदमा दर्ज करें।”
राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष (लोकसभा)
इस दौरान राहुल गांधी ने उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का एक वीडियो भी प्रदर्शित किया, जिसमें कथित तौर पर शुद्धीकरण अनुष्ठान का बचाव किया गया था। इसके साथ ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे “अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक मानसिकता का प्रतीक” बताया।
राहुल गांधी के बयानों के बाद, 10 अगस्त के अनुष्ठान में शामिल रहे अमित कुमार ने रविवार को हल्द्वानी नगर कोतवाली पहुंचकर लिखित तहरीर और साक्ष्य सौंपे अमित कुमार ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि कांग्रेस रैली के बाद रामलीला मैदान में भारी मात्रा में कचरा और गंदगी फैली हुई थी। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने मैदान की सफाई की और धार्मिक पवित्रता के लिए हवन किया।
अमित कुमार ने कहा, “मैं स्वयं वाल्मीकि (अनुसूचित जाति) समुदाय से संबंध रखता हूँ। राहुल गांधी ने बिना सच्चाई जाने पूरे प्रकरण को जातिगत मोड़ दे दिया और मुझे सार्वजनिक मंच से ‘छुआछूत का अभ्यास करने वाला’ और ‘दलित विरोधी’ बताकर अपमानित किया। इससे मेरी और मेरे समुदाय की प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है।” उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा झूठे और भ्रामक बयानों के जरिए समाज में वर्ग-शत्रुता और तनाव पैदा करने की कोशिश की गई है।
नैनीताल पुलिस ने तहरीर और प्राथमिक वीडियो साक्ष्यों की जांच के बाद औपचारिक मुकदमा पंजीकृत किया “अमित कुमार ने अपनी शिकायत के समर्थन में आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, जिसके आधार पर हल्द्वानी नगर कोतवाली में प्राथमिकी पंजीकृत कर ली गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अमित सैनी के नेतृत्व में जांच दल गठित किया गया है। कानून के अनुसार निष्पक्ष विवेचना की जाएगी।”
टी. सी. मंजूनाथ, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), नैनीताल
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उत्तराखंड के शुद्धीकरण वीडियो में कोई जातिगत कोण (Caste Angle) नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी हिंदू समाज को जातिगत आधार पर बांटने और राजनीतिक लाभ के लिए हर सामान्य घटना को दलित बनाम गैर-दलित बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि देश के सबसे बड़े विपक्षी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार भाजपा-आरएसएस की दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही दबाव बनाने के लिए जवाबी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
हल्द्वानी में दर्ज हुई यह प्राथमिकी दर्शाती है कि समकालीन भारतीय राजनीति में जातिगत अस्मिता, धार्मिक अनुष्ठान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की रेखाएं कितनी संवेदनशील और जटिल हो चुकी हैं। चूंकि प्राथमिकी में एससी/एसटी एक्ट और बीएनएस की गैर-जमानती धाराएं शामिल हैं, इसलिए अब सभी की निगाहें उत्तराखंड पुलिस की विवेचना और कोर्ट में पेश की जाने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला उत्तराखंड के साथ-साथ राष्ट्रीय संसद के पटल पर भी बड़े राजनीतिक टकराव का केंद्र बनने जा रहा है।

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