
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सोमवार को मानसून ने अपना सबसे रौद्र और विध्वंसक रूप दिखाया। सुबह से शुरू हुई मूसलाधार बारिश और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली तेज तूफानी हवाओं ने समूचे क्षेत्र के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद के मुख्य राजमार्ग, अंडरपास, रिहायशी कॉलोनियां और व्यावसायिक केंद्र पानी में डूब गए।
इस मौसम का सबसे गंभीर और व्यापक प्रभाव राष्ट्रीय राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) के संचालन पर देखने को मिला। वैश्विक लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग पोर्टल ‘FlightRadar24’ के आंकड़ों के अनुसार, रनवे पर शून्य के करीब पहुंची दृश्यता (Low Visibility) और तीव्र हवाओं के कारण करीब 400 उड़ानें विलंबित हुईं, 26 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और कम से कम 15 उड़ानों को आपातकालीन रूप से जयपुर, चंडीगढ़ और लखनऊ की ओर मोड़ना (Divert) पड़ा।
दूसरी तरफ, साइबर सिटी गुरुग्राम में बुनियादी ढांचे और जल निकासी व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने के बाद गुरुग्राम जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने आपातकालीन आदेश जारी करते हुए सभी कॉरपोरेट दफ्तरों, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को वर्क फ्रॉम होम (WFH) और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली के ऊपर छाए घने काले बादलों (Cumulonimbus Clouds) और आंधी-तूफान के कारण आईजीआई एयरपोर्ट के तीनों सक्रिय रनवे पर दृश्यता खतरनाक स्तर तक गिर गई। दोपहर के समय जब बारिश चरम पर थी, तब रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग के लिए आवश्यक न्यूनतम विजुअल रेंज नहीं मिल पा रही थी।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई विमानों को हवा में होल्डिंग पैटर्न (चक्कर लगाने) में डालना पड़ा। जब विमानों में निर्धारित ईंधन सीमा समाप्त होने लगी, तब 15 उड़ानों को आपातकालीन रूप से निकटवर्ती शहरों के लिए डायवर्ट कर दिया गया सबसे अधिक दबाव जयपुर एयरपोर्ट पर पड़ा, जहाँ 12 उड़ानों को उतारा गया। इनमें दुबई और सिंगापुर से आ रही 2 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शामिल थीं। 2 उड़ानों को चंडीगढ़ और 1 उड़ान को लखनऊ की ओर मोड़ा गया।
देश की अग्रणी एयरलाइन ने आधिकारिक बयान में कहा, “दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक प्रतिकूल मौसम और भारी जलभराव के कारण उड़ानों के प्रस्थान और आगमन में भारी देरी हो रही है। यात्रियों से अनुरोध है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले उड़ानों की वास्तविक स्थिति जांच लें और सड़कों पर भीषण जाम को देखते हुए अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें।”
एयर इंडिया ने यात्रियों को री-बुकिंग और रद्दीकरण शुल्क में छूट देने की घोषणा करते हुए कहा कि मौसम की खराबी के कारण उनके नेटवर्क की कनेक्टिंग उड़ानें भी शृंखलाबद्ध रूप से प्रभावित हुई हैं। स्पाइसजेट ने सोशल मीडिया पर अपडेट साझा करते हुए दिल्ली और उत्तरी भारत के हवाई अड्डों पर परिचालन में व्यवधान की जानकारी दी।
मिलेनियम सिटी के नाम से विख्यात गुरुग्राम में सोमवार की बारिश ने नगर निगम (MCG) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) की मानसूनी तैयारियों की धज्जियां उड़ा दीं। शहर के लगभग सभी प्रमुख चौराहे और मुख्य एक्सप्रेसवे घुटनों से लेकर कमर तक पानी में डूब गए।
सोमवार देर शाम गुरुग्राम के उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित एक आपातकालीन एडवाइजरी जारी की गई:
“24 अगस्त 2026 को पूरे जिले में हुई असाधारण रूप से भारी बारिश और मौसम विभाग द्वारा अगले 24 से 48 घंटों में जारी बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए, गुरुग्राम के सभी निजी संस्थानों, कॉरपोरेट दफ्तरों, आईटी फर्मों, और शैक्षणिक संस्थानों (सरकारी व निजी स्कूलों) को कड़ा परामर्श दिया जाता है कि वे मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को अपने कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work From Home) की अनुमति दें और स्कूलों में ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य संचालित करें। इस कदम का उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की भीड़ को कम करना है ताकि नगर निगम और आपदा प्रबंधन दल बिना किसी बाधा के जल निकासी और मरम्मत कार्यों को पूरा कर सकें।”
पश्चिमी और उत्तरी दिल्ली को जोड़ने वाला जखीरा अंडरपास पूरी तरह पानी में डूब गया। एक डीटीसी बस और दो ऑटो पानी में फंस गए, जिन्हें क्रेन की मदद से बाहर निकालना पड़ा। इसके बाद यातायात पुलिस ने दोनों तरफ से वाहनों का प्रवेश रोक दिया। पूर्वी दिल्ली से मध्य दिल्ली को जोड़ने वाले आईटीओ जंक्शन पर पानी भर जाने से लक्ष्मी नगर और विकास मार्ग पर 4 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। संगम विहार और वायुसेनाबाद के बीच महरौली-बदरपुर रोड पर वाहन 3 घंटे से अधिक समय तक एक ही जगह खड़े रहे। साकेत कोर्ट जाने वाले वकीलों, डॉक्टरों और हवाई अड्डे जाने वाले यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
मध्य दिल्ली के पुरानी दिल्ली क्षेत्र के चांदनी महल (पहाड़ी भोजला) में लगातार बारिश के कारण एक पुरानी दो मंजिला जर्जर इमारत का पिछला हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। मलबे के नीचे 4-5 दोपहिया वाहन दबकर चकनाचूर हो गए। दिल्ली पुलिस और अग्निशमन विभाग के जवानों ने त्वरित राहत अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित निकाला, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। पश्चिमी दिल्ली के अशोक नगर में जेल रोड पर एक पुराना नीम का पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे तिहाड़ जेल से जनकपुरी की ओर जाने वाला पूरा कैरिजवे कई घंटों तक बाधित रहा।
एनसीआर के पूर्वी हिस्से में भी मानसूनी बारिश ने भयंकर कहर बरपाया नेशनल हाईवे-9 पर इंडस्ट्रियल एरिया अंडरपास के नीचे लगभग 4 फीट पानी भर गया। कई दोपहिया वाहन और कारें पानी में डूबने के कारण बंद हो गईं। वाहन चालकों को पानी में उतरकर अपनी गाड़ियों को धक्का देते देखा गया। नोएडा के सेक्टर 16, 18, 62 और 95 के पास मुख्य मार्गों और सर्विस लेनों में पानी भर जाने से डीएनडी (DND) और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार मानसून की अक्षीय रेखा (Monsoon Trough) इस समय अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसककर सीधे दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश पर एक गहरा चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बना हुआ है।
मौसम विभाग ने 25 और 26 अगस्त को भी दिल्ली और आसपास के जिलों में मध्यम से भारी बारिश, गरज-चमक और 40-50 किमी/घंटा की तूफानी हवाओं की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों, बिजली के खंभों, पुराने पेड़ों और जर्जर इमारतों से दूर रहने तथा केवल अति-आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।
24 अगस्त की यह मूसलाधार बारिश केवल एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर के अनियोजित शहरी विस्तार, प्राकृतिक नालों के अतिक्रमण और लचर आपदा प्रबंधन तंत्र की एक स्पष्ट चेतावनी है।
जब देश की राजधानी का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 400 उड़ानों के विलंब से जूझने लगे और देश की ‘मिलेनियम सिटी’ गुरुग्राम को मात्र एक दिन की बारिश के बाद शहर बंद (वर्क फ्रॉम होम) करने का फैसला लेना पड़े, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारे नीति निर्माताओं और नगर निगमों को कागजी दावों से बाहर निकलकर ड्रेनेज सिस्टम और आपदा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे में युगांतरकारी सुधार करने होंगे।



