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ट्विशा शर्मा मृत्यु मामला: CBI ने भोपाल कोर्ट में दाखिल की 636 पन्नों की चार्जशीट

पूर्व जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह पर दहेज हत्या, क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप

मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी पहली विस्तृत और महत्वपूर्ण चार्जशीट विशेष सीबीआई अदालत (Special CBI Court, Bhopal) में दाखिल कर दी है। 636 पन्नों के इस आरोपपत्र में जांच एजेंसी ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह (अधिवक्ता) और उनकी सास गिरिबाला सिंह (सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश) को मुख्य आरोपी बनाया है।

सीबीआई ने दोनों आरोपियों के खिलाफ नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की कई गंभीर एवं गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपपत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि विवाह के मात्र 5 महीनों के भीतर आरोपियों द्वारा लगातार की गई गंभीर मानसिक प्रताड़ना, चरित्र हनन, घरेलू हिंसा और दहेज की मांगों के कारण नवविवाहिता को आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा।

नोएडा की रहने वाली 31 वर्षीय मॉडल, अभिनेत्री और एमबीए स्नातक ट्विशा शर्मा का विवाह 9 दिसंबर 2025 को भोपाल के कटारा हिल्स निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह के साथ धूमधाम से हुआ था। समर्थ की मां गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश न्यायपालिका में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।

सीबीआई द्वारा अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, शादी में दिए गए उपहारों और दहेज से ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था। विवाह के कुछ ही हफ्तों बाद से ट्विशा पर मायके से और नकदी लाने और महंगे सामान की मांग को लेकर ताने मारे जाने लगे।

चार्जशीट में सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह अपने प्रभाव और पद का रौब दिखाते हुए लगातार अपने बेटे समर्थ को ट्विशा के खिलाफ भड़काती थीं। पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता करने के बजाय वे अपने बेटे को प्रताड़ना के लिए उकसाती थीं, जिसके चलते दोनों के खिलाफ BNS की धारा 3(5) (साझा मंशा) लागू की गई है।

सीबीआई की जांच में सामने आया कि ट्विशा द्वारा अपने लगभग ₹20 लाख के व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड्स और निवेश को आरोपियों के नाम करने से मना करने पर घरेलू विवाद चरम पर पहुंच गया था। जब ट्विशा का एक्टिंग और मॉडलिंग प्रोजेक्ट छूटा, तो उनके बुनियादी खर्चों तक पर बंदिशें लगा दी गईं।

चार्जशीट में दर्ज व्हाट्सएप चैट और गवाहों के बयानों से यह साबित हुआ है कि समर्थ सिंह अपनी पत्नी के पुराने जीवन और सोशल सर्कल को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग करता था और उसका लगातार चरित्र हनन करता था। ट्विशा को घर के भीतर एक तरह से ‘बंदी’ बनाकर रखा जाता था और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी। 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे समर्थ सिंह अपनी पत्नी ट्विशा को अचेत अवस्था में लेकर एम्स भोपाल पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल लाने से पहले ही मृत) घोषित कर दिया।

परिवार द्वारा स्थानीय पुलिस पर पूर्व जज के प्रभाव में साक्ष्य छुपाने के आरोप लगाए जाने के बाद, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) के चार वरिष्ठ फॉरेंसिक डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा 24 मई 2026 को भोपाल में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराया गया। दूसरे पोस्टमॉर्टम में फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मेटल रिंग वाले जिम्नास्टिक बेल्ट (Gymnastics Belt) का मिलान ट्विशा की गर्दन पर बने चोट के निशानों (Ligature Mark) से किया। हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में बेल्ट पर ट्विशा के स्किन टिशू (त्वचा के ऊतक) पाए गए, जिससे यह साबित हुआ कि इसी बेल्ट का उपयोग किया गया था।

मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में दर्ज किया कि हैंगिंग के अलावा मृतका के शरीर पर 6 अन्य बाहरी चोटें (Ante-mortem Injuries) भी मौजूद थीं, जो घटना से ठीक पहले हुई शारीरिक खींचतान या हिंसा की ओर संकेत करती हैं।

सीबीआई ने विशेष अदालत को सूचित किया है कि मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के साथ ही उसने दंड प्रक्रिया के तहत पूरक जांच (Further Investigation) का विकल्प खुला रखा है कटारा हिल्स स्थित ससुराल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर (DVR) से फुटेज डिलीट किए जाने के संदेह पर फॉरेंसिक लैब से रिकवरी कराई जा रही है। शादी के समय और उसके बाद दोनों परिवारों के बीच हुए सभी बैंक ट्रांजेक्शन और संपत्तियों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच जारी है।

ट्विशा शर्मा की मौत का मामला केवल एक घरेलू हिंसा या दहेज हत्या का केस नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि जब कानून के रखवाले (पूर्व जज और वकील) स्वयं कटघरे में खड़े हों, तो न्याय प्रणाली कितनी निष्पक्षता से काम करती है।

सीबीआई द्वारा 636 पन्नों की इस विस्तृत चार्जशीट के दाखिल होने से यह साफ हो गया है कि एजेंसी ने मामले में आरोपियों की आपराधिक जवाबदेही तय करने के लिए पुख्ता वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए हैं। अब पूरे देश की निगाहें भोपाल की विशेष सीबीआई अदालत में शुरू होने वाले ट्रायल पर टिकी हैं।

इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत में पेशी से जुड़े दृश्य देखने के लिए आप ट्विशा केस: आरोपियों की कोर्ट में पेशी का वीडियो देख सकते हैं। यह वीडियो सीबीआई द्वारा मामले के मुख्य आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने और कानूनी घटनाक्रम की प्रत्यक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

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