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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का ऐतिहासिक प्रशासनिक पुनर्गठन: रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने पहले सीईओ (CEO)

दान में कथित अनियमितताओं के बाद ट्रस्ट डीड में पहला संशोधन और नकदी गिनती के ऑटोमेशन पर बड़ा फैसला

अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का प्रबंधन, निर्माण और संचालन करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रमुख कमांडर रहे रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (Retd. Air Marshal Jeetendra Mishra) को मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में अयोध्या स्थित मणिराम दास छावनी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।
एयर मार्शल मिश्रा की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मंदिर ट्रस्ट दान राशि (Donation and Offerings) में कथित हेराफेरी, गबन और चोरी के आरोपों को लेकर उपजे भारी राष्ट्रीय विवाद से जूझ रहा है। इस प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही ट्रस्ट ने 5 फरवरी 2020 को अपने गठन के बाद पहली बार ट्रस्ट डीड (Trust Deed) में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके तहत दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन को ट्रस्टियों के सीधे दखल से हटाकर सैन्य व कॉर्पोरेट स्तर की पेशेवर निगरानी (Professional Corporate & Operational Oversight) के अधीन कर दिया गया है।
इसके साथ ही, चढ़ावे और नकद दान की गिनती में इंसानी दखल (Human Involvement) को न्यूनतम करने के लिए अत्याधुनिक स्वचालित मशीनों, बायोमेट्रिक सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट प्रणाली को लागू करने पर विस्तृत सहमति बनी है।
जीतेंद्र मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था, जहाँ उनके पिता एक कॉलेज व्याख्याता थे। 1983 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), पुणे में चयनित होने के बाद वे 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच (फाइटर स्ट्रीम) में कमीशंड हुए।
वे भारतीय वायुसेना के शीर्ष ‘फाइटर कॉम्बैट लीडर’ (FCL) और ‘प्रायोगिक टेस्ट पायलट’ (Experimental Test Pilot) बने। उन्होंने वायुसेना टेस्ट पायलट्स स्कूल (ASTE, बेंगलुरु), अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (Air University, Alabama) और लंदन के प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज (RCDS) से उच्च सामरिक व युद्ध प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त की।
1999 के करगिल युद्ध के दौरान एयर मार्शल मिश्रा उस कोर टेक्निकल और ऑपरेशनल टीम का हिस्सा थे, जिसने मिराज-2000 (Mirage 2000) लड़ाकू विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों (LGBs) को सफलतापूर्वक एकीकृत किया था। इन सटीक बमों ने करगिल की दुर्गम चोटियों टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर दुश्मन के बंकरों और सप्लाई डिपो को नष्ट करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
इसके उपरांत, उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एएसटीई के चीफ टेस्ट पायलट के रूप में सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) के ब्लॉक-IV अपग्रेड और ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर-लॉन्च इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया।
1 जनवरी 2025 को उन्होंने भारतीय वायुसेना की सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command – WAC) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाला। मई 2025 में जब पहलगाम आतंकी हमले के प्रत्युत्तर में भारत ने सीमा पार सटीक सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन सिंदूर) शुरू की, तो चार दिनों तक चले इस पूरे वायु अभियान और एयर डिफेंस ग्रिड का संचालन मिश्रा के कमान कक्ष से ही निर्देशित हुआ।
दुश्मन के 314 किलोमीटर गहरे सामरिक ठिकानों को सटीक मिसाइल हमलों से ध्वस्त करने और संपूर्ण पश्चिमी सीमा पर पूर्ण वायु प्रभुत्व स्थापित करने के उनके असाधारण नेतृत्व के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिकालीन/युद्धकालीन सम्मानों में शामिल ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ (SYSM) से अलंकृत किया। वे इससे पहले ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) से भी सम्मानित हो चुके हैं। वे 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए।
मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों (Hundis) और अस्थायी दान काउंटरों से नकदी गायब होने के मामले में पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने कार्रवाई करते हुए सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों और बैंक सहायकों सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं के मद्देनजर, मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे और ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय सहित तीन वरिष्ठ पदाधिकारियों को अपने प्रशासनिक पदों से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

अब तक ट्रस्ट के पूज्य संत और वरिष्ठ सदस्य ही निर्माण, सुरक्षा, दान संग्रह और लॉजिस्टिक्स का सीधा प्रबंधन देख रहे थे। प्रतिदिन 1.5 से 2 लाख श्रद्धालुओं के आगमन और करोड़ों रुपये के मासिक चढ़ावे को संभालने के लिए यह पारंपरिक ढांचा अपर्याप्त साबित हो रहा था। देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों के बीच मंदिर की साख और दान की पवित्रता को पुनर्स्थापित करने के लिए ट्रस्ट ने कॉर्पोरेट और सैन्य स्तर के कठोर अनुशासन, आंतरिक वित्तीय नियंत्रण (Internal Financial Controls) और पेशेवर जवाबदेही को अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
ट्रस्ट ने 6 जुलाई 2026 को सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया, जिसमें सेना के लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) वी.के. चतुर्वेदी और प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक व सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेश हवारे सदस्य थे।
ट्रस्ट सचिवालय के सचिव समीर पांडा के समन्वय में तकनीक-आधारित डेटा स्क्रीनिंग, साइबर बैकग्राउंड चेक और प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड का गहन मूल्यांकन किया गया। अंतिम 16 उम्मीदवारों में उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे और पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र भी शामिल थे। समिति ने सत्यनिष्ठा, विशाल ऑपरेशंस को संभालने की क्षमता और संकट प्रबंधन में बेदाग ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा के नाम को शीर्ष वरीयता दी, जिसे ट्रस्ट बोर्ड ने 2 सितंबर को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।
अब तक ट्रस्ट के स्वयंसेवक, बैंक कर्मी और सुरक्षाकर्मी हाथों से नोटों की गड्डियां गिनते थे, जिसमें समय अधिक लगता था और मानवीय चूक या चोरी की गुंजाइश बनी रहती थी। अब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सहयोग से औद्योगिक स्तर की हाई-स्पीड करेंसी काउंटिंग और सॉर्टिंग मशीनें लगाई जा रही हैं, जो कुछ ही मिनटों में लाखों नोटों की गिनती, मूल्यवर्ग के अनुसार छंटाई और जाली नोटों की पहचान कर सीधे बंडलों में सील कर देंगी।
मंदिर के गर्भगृह, रंग मंडप और दर्शन पथ पर स्थापित दानपात्रों को ‘स्मार्ट हुंडी’ में बदला जा रहा है। इनमें वजन और मात्रा के डिजिटल सेंसर लगे होंगे। इन पेटियों को खोलने के लिए दोहरी चाबी (Dual Key System) और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा जिसमें एक अधिकृत बैंक अधिकारी और दूसरा मंदिर ट्रस्ट के सुरक्षा अधिकारी का बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट आवश्यक होगा।
गिनती कक्ष (Cash Processing Hall) को अत्यधिक सुरक्षित ‘रेड जोन’ घोषित किया गया है। कक्ष में प्रवेश करने वाले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को जेब वाले वस्त्र (Pocketed Clothing) पहनने की अनुमति नहीं होगी। कमरे के भीतर 360-डिग्री 4K पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे और एआई-सक्षम वीडियो एनालिटिक्स लगाए जा रहे हैं, जो किसी भी संदिग्ध शारीरिक गतिविधि या असामान्य हरकत पर सुरक्षा नियंत्रण कक्ष को तुरंत स्वचालित अलर्ट भेज देंगे।
श्रद्धालुओं को नकद चढ़ावे के स्थान पर दर्शन पथ पर लगाए गए सुरक्षित क्यूआर कोड, पीओएस (POS) मशीनों और कियोस्क के माध्यम से डिजिटल रूप से दान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नकद लेन-देन का अनुपात स्वतः घट जाएगा।
2 सितंबर की बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विधिक पहलू ट्रस्ट डीड में किया गया पहला संशोधन था। ट्रस्ट गठन (5 फरवरी 2020) के बाद से अब तक सभी कार्यकारी शक्तियां महासचिव के पास थीं। नए संशोधन के तहत सीईओ संगठन के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा बलों और संविदा कर्मियों के सर्वोच्च प्रशासनिक प्रमुख (Highest Executive Authority) होंगे।
मंदिर के दैनिक दर्शन, वीआईपी प्रोटोकॉल, क्राउड मैनेजमेंट, स्वच्छता, लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की संपूर्ण कमान सीधे सीईओ के अधीन होगी। सभी वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के संचालन, आंतरिक व बाह्य ऑडिट, और एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) से जुड़े नियमों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करना सीईओ का प्राथमिक विधिक दायित्व होगा।
बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज अब केवल व्यापक धार्मिक नीतियों, बड़े निर्माण अनुबंधों और आध्यात्मिक आयोजनों पर निर्णय लेगा, जबकि प्रशासनिक क्रियान्वयन में उनका व्यक्तिगत हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद की जानी-मानी शिक्षाविद् और सेवानिवृत्त डिग्री कॉलेज प्राचार्य डॉ. निर्मला यादव राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में शामिल होने वाली पहली महिला ट्रस्टी बन गई हैं। उनके शामिल होने से महिला श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व को बड़ा बल मिला है।
अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता और उत्तर प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) मदन मोहन पांडे ने दशकों तक फैजाबाद सिविल कोर्ट से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक रामलला विराजमान की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ी थी। उनकी विधिक विशेषज्ञता ट्रस्ट के भूमि और कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण होगी। विहिप के दिवंगत शीर्ष नेता अशोक सिंघल के निकट संबंधी और प्रसिद्ध रियल एस्टेट व मनोरंजन समूह M2K के चेयरमैन महेश भागचंदका को ट्रस्टी नियुक्त करने के साथ ही स्वामी गोविंद देव गिरि की जगह ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष (Treasurer) बनाया गया है।
सीईओ के रूप में चयन के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भावुक हो गए:
“भारतीय वायुसेना में 40 वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद, मुझे प्रभु श्रीराम के चरणों और उनके करोड़ों अनन्य भक्तों की सेवा का यह अवसर मिलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य और ईश्वरीय कृपा है। ऑपरेशन सिंदूर के युद्धक्षेत्र से लेकर अयोध्या धाम के इस पवित्र मंदिर तक की यह यात्रा केवल और केवल भगवान राम की इच्छा और उनका आदेश है।
अतीत में जो घटनाएं या विवाद हुए हैं, हमें इतिहास से सबक जरूर लेना चाहिए, लेकिन हमारा संपूर्ण ध्यान भविष्य को बेहतर, त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने पर होना चाहिए। मैं अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट के पूज्य संतों और सदस्यों के साथ बैठकर प्राथमिकताएं तय करूंगा। हमारा एकमात्र लक्ष्य यह होगा कि अयोध्या आने वाले हर साधारण श्रद्धालु को सुलभ, सुरक्षित और गरिमापूर्ण दर्शन मिलें और मंदिर की व्यवस्थाएं दुनिया के सामने पारदर्शिता और शुचिता का सर्वोच्च उदाहरण बनें।”
रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा, प्रथम सीईओ, राम मंदिर ट्रस्ट
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के धार्मिक इतिहास में मंदिर प्रबंधन का एक नया प्रतिमान (Paradigm Shift) है।
करगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील सैन्य अभियानों में अपने अद्वितीय नेतृत्व, रणनीतिक अनुशासन और बेदाग सत्यनिष्ठा का लोहा मनवाने वाले एक शीर्ष वायुसेना कमांडर के हाथों में मंदिर की बागडोर सौंपना यह दर्शाता है कि ट्रस्ट अब किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
स्वचालित गिनती मशीनों, डिजिटल ऑडिट, पहली महिला ट्रस्टी के समावेश और एक सशक्त सीईओ के नेतृत्व में राम मंदिर ट्रस्ट ने यह सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया है कि करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था, उनके द्वारा अर्पित पाई-पाई का दान और मंदिर की वैश्विक प्रतिष्ठा पूर्णतः सुरक्षित, अक्षुण्ण और पारदर्शी रहे।

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