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चीन करेगा 2027 के 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी: नई दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किया औपचारिक ऐलान
पीएम मोदी ने दी बधाई, 'तीसरे स्वर्णिम दशक' की ओर बढ़ा ब्रिक्स

राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के पहले दिन वैश्विक मंच पर एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम घटित हुआ। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने शनिवार को नेताओं के पूर्ण सत्र (Plenary Session) के दौरान आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की कि चीन वर्ष 2027 में ब्रिक्स समूह की घूर्णन अध्यक्षता (Rotating Chairship) ग्रहण करेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत की धरती पर पहुंचे शी जिनपिंग के इस ऐतिहासिक ऐलान के तुरंत बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़कर उनका अभिवादन किया और चीन को 2027 के अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए हार्दिक बधाई दी। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक वीडियो और चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ (Xinhua) तथा सीसीटीवी (CCTV) ने भी इस घोषणा की पुष्टि करते हुए इसे ब्रिक्स सहयोग के ‘तीसरे स्वर्णिम दशक’ (Third Golden Decade) की शुरुआत करार दिया है।
चीनी सरकारी टीवी नेटवर्क सीसीटीवी के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा:
“वर्ष 2027 में चीन एक बार फिर ब्रिक्स की घूर्णन अध्यक्षता का दायित्व संभालेगा। सभी पक्ष इस बात के लिए उत्सुक हैं कि चीन ब्रिक्स देशों के सामूहिक ज्ञान और शक्तिशाली तालमेल को एकजुट कर सहयोग का एक नया अध्याय लिखे। हम इस अवसर का उपयोग सदस्य राष्ट्रों के बीच आम सहमति बनाने और भविष्य के लिए एक व्यावहारिक व साझा खाका तैयार करने में करेंगे। मिलकर हम ब्रिक्स सहयोग के ‘तीसरे स्वर्णिम दशक’ का शुभारंभ करेंगे।”
भाषण समाप्त होते ही सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय द्वारा प्रसारित आधिकारिक वीडियो में दोनों शीर्ष नेताओं को सौहार्दपूर्ण माहौल में हाथ मिलाते और एक-दूसरे का अभिवादन करते देखा गया।
बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग (Mao Ning) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि 2027 में चीन की अध्यक्षता किन प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित होगी चीन के प्रमुख समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय के अनुसार, बीजिंग अपनी अध्यक्षता का उपयोग सदस्य देशों की राष्ट्रीय विकास रणनीतियों को संरेखित (Align) करने और बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए करेगा।
चीन अपने चार प्रमुख वैचारिक ढांचों वैश्विक विकास पहल (GDI), वैश्विक सुरक्षा पहल (GSI), वैश्विक सभ्यता पहल (GCI) और वैश्विक शासन पहल (GGI) को ब्रिक्स सहयोग के साथ जोड़ेगा। नई दिल्ली में अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करेगा ताकि यह ब्लॉक मध्य पूर्व संघर्ष में एक शांतिदूत (Peacemaker) की भूमिका निभा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के खिलाफ है और इसके स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में ब्रिक्स को सक्रिय योगदान देना चाहिए।
2027 के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की घोषणा के साथ ही, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील और अहम कूटनीतिक पहलू भारत-चीन संबंधों में आई गर्माहट है शिखर सम्मेलन के इतर भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके “मतभेद विवाद न बनें”।
प्रधानमंत्री मोदी ने दो-टूक शब्दों में रेखांकित किया कि 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के सतत विकास का अनिवार्य आधार है। उन्होंने मौजूदा सीमा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। शिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को एक “रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण” से देखता है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत दोनों एक-दूसरे की ताकतों से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सीधी उड़ानों की बहाली जैसे विषयों पर भी सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की।
नई दिल्ली से आई इस घोषणा ने पश्चिमी और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में तीव्र हलचल पैदा कर दी है अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों का मानना है कि नई दिल्ली में शी जिनपिंग द्वारा 2027 की अध्यक्षता का ऐलान करना यह दर्शाता है कि अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों के दबाव के बावजूद ब्रिक्स की संस्थागत निरंतरता (Institutional Continuity) पूरी तरह अक्षुण्ण है।
विश्लेषकों का कहना है कि जहां भारत ने 2026 में ब्रिक्स को ‘मानवता-प्रथम’ और विकासशील देशों की संप्रभु आवाज के रूप में आगे बढ़ाया, वहीं 2027 में चीन इसे तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता के मंच के रूप में प्रस्तुत करेगा। भारत द्वारा इस घोषणा का खुले दिल से स्वागत करना यह साबित करता है कि मतभेदों के बावजूद दोनों एशियाई महाशक्तियां बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 2027 के 19वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी की घोषणा ब्रिक्स समूह की परिपक्वता, स्थिरता और दीर्घकालिक प्रासंगिकता पर मुहर लगाती है। सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सौहार्दपूर्ण मुलाकात और एक-दूसरे की अध्यक्षता का खुला समर्थन यह संदेश देता है कि 21वीं सदी का एशिया और ग्लोबल साउथ अपने साझा भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आपसी सहयोग के रास्ते तलाशने में सक्षम हैं।
नई दिल्ली के भारत मंडपम ने जहां 2026 में 11 देशों के इस विशाल परिवार को एकजुट कर खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार किया, वहीं अब 2027 में चीन इस साझेदारी को ‘तीसरे स्वर्णिम दशक’ में ले जाने का नेतृत्व करेगा। विश्व व्यवस्था के इस संक्रमण काल में ब्रिक्स का यह निर्बाध प्रवाह स्पष्ट करता है कि बहुध्रुवीयता अब केवल एक सैद्धांतिक विचार नहीं, बल्कि एक अटल वैश्विक वास्तविकता बन चुकी है।


