राष्ट्रीय
लंदन में टेम्स नदी के तट पर पहली बार गूंजा ‘हर हर गंगे’: ग्रीनविच में ऐतिहासिक गंगा आरती का आयोजन
चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ पर उमड़े हजारों श्रद्धालु

भारत के पवित्र तीर्थस्थलों काशी (वाराणसी), हरिद्वार और ऋषिकेश के पावन गंगा घाटों पर सदियों से प्रवाहित हो रही आध्यात्मिक व सांस्कृतिक परंपरा ने सात समंदर पार ब्रिटेन की धरती पर एक नया इतिहास रच दिया है। चिन्मय मिशन यूके (Chinmaya Mission UK) के 75वें स्थापना वर्ष समारोह (चिन्मय अमृत महोत्सव) और लंदन के वार्षिक ‘टोटली टेम्स फेस्टिवल’ (Totally Thames Festival) के संयुक्त तत्वावधान में रविवार, 13 सितंबर 2026 की शाम लंदन के ऐतिहासिक ग्रीनविच (Greenwich) में टेम्स नदी (River Thames) के तट पर ब्रिटेन की पहली आधिकारिक ‘गंगा आरती’ का भव्य आयोजन किया गया।
‘गंगा आरती ऑन द टेम्स: अ सेरेमनी ऑफ लाइट’ (Ganga Aarti on the Thames: A Ceremony of Light) शीर्षक से आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में पारंपरिक बहु-स्तरीय पीतल के दीपों, शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और भक्ति संगीत के बीच हजारों की तादाद में ब्रिटिश हिंदू, प्रवासी भारतीय, व्यापक दक्षिण एशियाई समुदाय और स्थानीय ब्रिटिश नागरिक शामिल हुए। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, ज्ञान के प्रकाश और वैश्विक एकता के इस अनुष्ठान ने लंदन के दिल में सनातन धर्म की जल-पूजन परंपरा और समकालीन पर्यावरण चेतना का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
रेशमी धोती, कुर्ते और उत्तरीय में सजे पुजारियों ने वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। शंखों की गूंज और पीतल की घंटियों की ध्वनि से टेम्स का शांत तट आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट और हरिद्वार के हर की पौड़ी की तरह, पुजारियों ने भारी, बहु-स्तरीय पीतल के दीपों (Multi-tiered Brass Oil Lamps) में कपूर और घी की ज्योत प्रज्वलित की। इन दीपों को हाथों में उठाकर लयबद्ध तरीके से घुमाते हुए आरती संपन्न की गई। टेम्स नदी से गुजरने वाली नौकाओं और क्रूज़ जहाजों पर सवार विदेशी पर्यटकों के लिए यह एक जादुई क्षण था। हजारों लोगों ने अपने हाथों में जलते हुए छोटे दीप और मोमबत्तियां लेकर एक स्वर में आरती गाई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस ऐतिहासिक आयोजन का सबसे अनूठा वैचारिक पहलू यह था कि इसने दो महान सभ्यताओं की जीवनरेखाओं भारत की पवित्र गंगा और ब्रिटेन की ऐतिहासिक टेम्स को एक साझा आध्यात्मिक धरातल पर ला खड़ा किया
चिन्मय मिशन यूके ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा:
“हजारों वर्षों से मां गंगा को संध्या के समय उसके तटों पर दीपों और भजनों के माध्यम से कृतज्ञता अर्पित की जाती रही है। अब यह जीवंत वैदिक अनुष्ठान टेम्स के तट पर आया है। ये दोनों नदियां वे हैं जिन्होंने अपने-अपने समाजों, सभ्यताओं और पीढ़ियों की प्रार्थनाओं को आकार दिया है। ग्रीनविच के ऐतिहासिक रॉयल स्टेप्स पर उनका यह मिलन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति और जल के प्रति संपूर्ण मानव जाति की साझा आस्था का प्रतीक है।”
इस पावन अवसर पर चिन्मय मिशन के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेतृत्व ने सभा को संबोधित करते हुए गंगा और सनातन परंपरा के दार्शनिक मर्म को स्पष्ट किया
समारोह का नेतृत्व करते हुए स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गंगा केवल जल की एक भौतिक धारा नहीं है, बल्कि वह पवित्रता, ज्ञान के अखंड प्रवाह और सार्वभौमिक मातृत्व का प्रतीक है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब हम किसी नदी की आरती करते हैं, तो हम वास्तव में उस परमात्मा की शक्ति को नमन कर रहे होते हैं जो जल के रूप में संपूर्ण चराचर जगत का भरण-पोषण करती है।
ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य (रेजिडेंट टीचर, चिन्मय मिशन यूके):
“पीढ़ियों से भारतीय समुदाय जीवनदायिनी नदियों, प्रकृति और सृष्टि के प्रति आभार प्रकट करने के लिए गंगा तटों पर एकत्रित होते रहे हैं। टेम्स पर आयोजित यह पहली गंगा आरती उसी पवित्र चेतना को लंदन में लेकर आई है, जो विविधता से भरे लोगों को कृतज्ञता, आशा और एकता के एक सूत्र में बांधती है। हमारे पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी ने अपना संपूर्ण जीवन हिमालय के ऋषियों के वेदांत ज्ञान को आम जनमानस की दैनिक जिंदगी तक पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया था। चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष में यह आयोजन उस ज्ञान, सेवा और कृतज्ञता की धारा का उत्सव है जो किसी भौगोलिक सीमा में नहीं बंधती।”
इस भव्य आयोजन की सबसे सराहनीय और अनुकरणीय विशेषता इसका पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन रहा। जहां अक्सर विशाल धार्मिक आयोजनों में नदियों में फूल, पूजन सामग्री या तेल बह जाने की चिंताएं रहती हैं, वहीं चिन्मय मिशन और टोटली टेम्स के आयोजकों ने एक अभूतपूर्व मिसाल कायम की आयोजकों ने पूर्व निर्धारित नियम के तहत पूरी आरती को तट की ठोस जमीन पर ही संपन्न किया। टेम्स नदी के पानी में न तो कोई जलता हुआ दीपक छोड़ा गया, न ही फूल, प्रसाद या कोई रासायनिक सामग्री डाली गई।
सभी आरती दीपकों को स्टैंड और धातु की ट्रे पर तट पर ही सुरक्षित रखा गया। इससे नदी की जैव विविधता और जलीय जीवों को तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचा। चिन्मय मिशन के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा: “गंगा आरती का मूल तत्व यही है कि हम प्रकृति को हल्के में न लें। प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता केवल प्रार्थनाओं में नहीं, बल्कि हमारे जिम्मेदार आचरण और पर्यावरण की रक्षा में भी झलकनी चाहिए।”
लंदन के ग्रीनविच में आयोजित इस समारोह ने ब्रिटिश समाज में भारतीय प्रवासियों के गहरे सांस्कृतिक योगदान को एक बार फिर रेखांकित किया इस कार्यक्रम में ब्रिटेन में बसे वरिष्ठ प्रवासी भारतीयों से लेकर ब्रिटेन में जन्मी दूसरी और तीसरी पीढ़ी के युवाओं और छोटे बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। युवाओं के लिए यह आयोजन अपनी सांस्कृतिक जड़ों, वैदिक मंत्रों और सनातन दर्शन को लंदन के आधुनिक परिवेश में अनुभव करने का अवसर बना।
यूके के प्रमुख हिंदू मंदिरों, इस्कॉन, बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था, हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन और विभिन्न दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। टोटली टेम्स फेस्टिवल के तहत होने के कारण बड़ी संख्या में गैर-भारतीय स्थानीय नागरिकों ने भी इस आयोजन में रुचि ली। कई ब्रिटिश नागरिकों ने परिवार सहित बैठकर मंत्रोच्चार सुना, भारतीय शास्त्रीय संगीत का आनंद लिया और दीपों के सौंदर्य को अपने कैमरों में कैद किया।
1997 से लगातार आयोजित हो रहे ‘टोटली टेम्स’ महोत्सव में इस वर्ष पहली बार गंगा आरती को शामिल किया गया था। आयोजन की भारी सफलता, टिकटों के पहले ही बिक जाने (Sold-Out) और जनता के सकारात्मक उत्साह को देखते हुए आयोजक अब इसे एक नियमित वार्षिक परंपरा बनाने पर विचार कर रहे हैं टोटली टेम्स फेस्टिवल ट्रस्ट और चिन्मय मिशन यूके के प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में हर सितंबर के महीने में टेम्स के किनारे इस ‘सेरेमनी ऑफ लाइट’ को लंदन के सांस्कृतिक कैलेंडर का एक स्थायी वार्षिक आकर्षण बनाया जा सकता है। लंदन में मिली इस सफलता के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका के अन्य प्रमुख शहरों जैसे न्यूयॉर्क (हडसन नदी), पेरिस (सीन नदी) और टोरंटो में भी भारतीय प्रवासी संगठन इसी प्रकार के पर्यावरण-अनुकूल नदी आरती आयोजनों की योजना बनाने पर विचार कर रहे हैं।
लंदन के ग्रीनविच में टेम्स नदी के तट पर पहली बार आयोजित हुई यह गंगा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं थी, बल्कि यह भारत के प्राचीन वैदिक ज्ञान और प्रकृति-पूजा के सार्वभौमिक संदेश की वैश्विक विजय थी। गंगा का अध्यात्म और टेम्स का आधुनिक प्रवाह जब एक साथ मिले, तो उसने यह सिद्ध कर दिया कि नदियां संस्कृतियों को बांटती नहीं, बल्कि उन्हें जोड़ती हैं।
चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष में लंदन की धरती पर जलाई गई इन दीपों की लौ ने न केवल टेम्स के किनारे को आलोकित किया, बल्कि दुनिया को यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि जल, वायु और प्रकृति का सम्मान ही मानवता के अस्तित्व की पहली शर्त है। वैदिक मंत्रों के निनाद, शंखों की ध्वनि और ‘हर हर गंगे’ के उद्घोष के साथ लंदन में रचा गया यह इतिहास आने वाले वर्षों तक ब्रिटिश-भारतीय सांस्कृतिक सेतु का सबसे चमकदार और पावन प्रतीक बना रहेगा।



