
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी गढ़वाल क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में शुक्रवार देर रात से मौसम ने विकराल और सर्द रूप धारण कर लिया है। संपूर्ण केदारनाथ घाटी और धाम परिसर में शुक्रवार की रात से शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का सिलसिला शनिवार को भी अनवरत जारी रहा। भारी बारिश और तेज बर्फीली हवाओं के कारण पूरी केदारपुरी घने काले बादलों और कोहरे की चादर में सिमट गई है, जिससे दिन के समय भी दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है।
लगातार हो रही बारिश के कारण समुद्र तल से 11,755 फीट की ऊंचाई पर बसे धाम में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और क्षेत्र में समय से पहले ही कड़ाके की हाड़ कंपाने वाली ठंड शुरू हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और उत्तरकाशी सहित उच्च पर्वतीय जनपदों के लिए जारी 48 घंटे के भारी बारिश के रेड व ऑरेंज अलर्ट के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग बनी हुई है। बरसाती (रेनकोट) और छातों के सहारे देश-विदेश से पहुंचे हजारों तीर्थयात्री कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच बाबा केदार के गर्भगृह में दर्शन पाने के लिए लंबी कतारों में डटे हुए हैं।
हालांकि, घाटी में घने बादलों, तेज हवाओं और अत्यंत खराब दृश्यता (Low Visibility) को देखते हुए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा के हेलीपैडों से केदारनाथ धाम के लिए संचालित होने वाली सभी नौ एविएशन कंपनियों की हेलिकॉप्टर सेवाओं को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), मौसम विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा धाम के संबंध में जारी आधिकारिक स्थिति का व्यापक विवरण शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे से शुरू हुई तेज बारिश ने रात चढ़ने के साथ विकराल रूप ले लिया। शनिवार की सुबह जब मंदिर के कपाट मंगला आरती के लिए खुले, तो पूरी केदारपुरी घने कोहरे और बादलों के बीच छुपी नजर आई लगातार हो रही बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही सर्द हवाओं ने केदारनाथ में तापमान को सामान्य से 5 से 7 डिग्री सेल्सियस नीचे धकेल दिया है।
दिन के समय भी तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जा पा रहा है, जबकि देर रात पारा 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क रहा है।आसमान में बादलों का ऐसा सघन जमावड़ा है कि दोपहर 12 बजे भी दृश्यता 50 मीटर से कम दर्ज की गई, जिसके चलते मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन को मंदिर प्रांगण और मुख्य मार्गों पर हाई-मास्ट लाइटें जलानी पड़ीं।
केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे स्थित चौखंभा (Chaukhamba), केदार डोम (Kedarnath Dome) और सुमेरु पर्वत की 20,000 फीट से अधिक ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी दर्ज की गई है। पड़ोसी चमोली जनपद में स्थित पवित्र हेमकुंड साहिब में भी ताजा हिमपात होने के कारण संपूर्ण गढ़वाल हिमालय में ठंडी हवाओं का दबाव बन गया है, जिससे केदारनाथ धाम में ठिठुरन कई गुना बढ़ गई है।
मंदिर के दोनों ओर बहने वाली पवित्र मंदाकिनी और सरस्वती नदियों के जलस्तर में बारिश के चलते उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यद्यपि जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष (DEOC) के अनुसार दोनों नदियां वर्तमान में चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, फिर भी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नदी तटों और 2013 की आपदा के बाद निर्मित सुरक्षा दीवारों के समीप श्रद्धालुओं की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।
हिमालयी मौसम के इस अप्रत्याशित और कठोर मिजाज के बावजूद बाबा केदार के भक्तों के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं आई है शनिवार तड़के से ही मंदिर प्रांगण में भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला। भारी बारिश और गिरते पारे के बीच हजारों श्रद्धालु बरसाती सूट (Raincoats), तिरपाल और छातों की ओट में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते नजर आए। कड़ाके की ठंड के बावजूद जब भी आरती का शंखनाद होता, पूरा केदारनाथ धाम ‘जय बाबा केदार’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठता।
श्रद्धालुओं को असुविधा से बचाने के लिए मंदिर समिति ने विशेष दर्शन प्रबंध किए हैं। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर कतार तक लगाए गए वाटरप्रूफ कैनोपी (Canopy) और टिन शेड्स की वजह से यात्रियों को सीधी बारिश से कुछ राहत मिली। मंदिर के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या और ठंड को देखते हुए दर्शन की गति को नियंत्रित रखा जा रहा है ताकि किसी भी स्थान पर अनावश्यक भीड़ जमा न हो और भगदड़ जैसी स्थिति न बने। विभिन्न धार्मिक ट्रस्टों और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों द्वारा धाम में पहुंचे तीर्थयात्रियों को हाइपोथर्मिया (Hypothermia) और ठंड से बचाने के लिए निरंतर गर्म पानी, अदरक की चाय और खिचड़ी का वितरण किया जा रहा है।
खराब मौसम और घने बादलों का सबसे गंभीर प्रभाव केदारनाथ की हवाई यात्रा पर पड़ा है नागर विमानन महानिदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हिमालयी घाटियों में हेलिकॉप्टर परिचालन केवल ‘विजुअल फ्लाइट रूल्स’ (VFR) यानी दृश्य उड़ान नियमों के तहत ही अनुमत होता है। इसके लिए कम से कम 5,000 मीटर की दृश्यता और बादलों की छत (Cloud Base) का एक निश्चित ऊंचाई से ऊपर होना अनिवार्य है। शुक्रवार रात से ही केदारनाथ घाटी में बादल जमीन से मात्र 100 से 200 फीट की ऊंचाई पर मंडरा रहे हैं, जिससे पायलटों के लिए पहाड़ों के बीच उड़ान भरना जानलेवा साबित हो सकता था।
रुद्रप्रयाग के उप-जिलाधिकारी और हेली नोडल अधिकारी के अनुसार, फाटा, सिरसी, गुप्तकाशी, जामू और नारायणकोटी स्थित सभी हेलीपैडों से पवन हंस, हिमालयन हेली, आर्यन एविएशन, ट्रांसभारत, कैस्ट्रल एविएशन और चिपसन एविएशन सहित सभी ऑपरेटरों की उड़ानें शनिवार सुबह से ही रोक दी गई हैं। हेलीपैडों पर खड़े सभी हेलिकॉप्टरों को हैंगर या सुरक्षित बंधनों में रखा गया है।
उड़ानें रद्द होने के कारण उन सैकड़ों बुजुर्ग, दिव्यांग और बीमार यात्रियों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा है जिन्होंने महीनों पहले ऑनलाइन हेलीकॉप्टर टिकट बुक कराए थे। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) और आईआरसीटीसी (IRCTC) ने घोषणा की है कि जो यात्री उड़ान रद्द होने के कारण यात्रा नहीं कर पाए हैं, उन्हें या तो मौसम साफ होने पर अगली उड़ानों में समायोजित किया जाएगा अथवा उनके टिकट की पूरी राशि बिना किसी कटौती के उनके बैंक खातों में वापस (Full Refund) कर दी जाएगी।
गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक जाने वाला 16 किलोमीटर का दुर्गम पैदल ट्रैक इस समय सबसे संवेदनशील बना हुआ है लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से पानी का तीव्र बहाव रास्तों पर आ रहा है। चीरबासा, जंगलचट्टी, भीमबली और लिनचोली के समीप कच्चे रास्तों पर कीचड़ और फिसलन बहुत बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त, पहाड़ी के ऊपरी हिस्सों से छोटे-मोटे पत्थरों के गिरने का जोखिम हमेशा बना रहता है।
राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और रुद्रप्रयाग पुलिस की विशेष टीमों को पूरे 16 किलोमीटर के मार्ग पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। जवान रस्सियों, हेलमेट और आपातकालीन स्ट्रेचर के साथ संवेदनशील स्थानों पर खड़े हैं। जैसे ही किसी पहाड़ी से मलबा या पत्थर आने की आहट होती है, सायरन बजाकर यात्रियों को सुरक्षित शेल्टरों में रोक दिया जाता है और रास्ता साफ होने के बाद ही आगे बढ़ाया जा रहा है।
यदि बारिश की तीव्रता और अधिक बढ़ती है, तो पुलिस प्रशासन ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड बैरियर पर यात्रियों को रोकने की योजना बनाई है। सोनप्रयाग से दोपहर 12 बजे के बाद किसी भी नए श्रद्धालु को केदारनाथ की ओर पैदल चढ़ाई करने की अनुमति नहीं दी जा रही है, ताकि कोई भी यात्री रात के अंधेरे में जंगल वाले रास्तों में न फंसे।
तीर्थयात्रियों को सख्त सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग के अपडेट और स्थानीय पुलिस की लाउडस्पीकर घोषणाओं को सुनने के बाद ही होटल या धर्मशाला से बाहर निकलें। सभी श्रद्धालु अपने साथ वॉटरप्रूफ जैकेट, रेनकोट, मजबूत ग्रिप वाले जूते, दस्ताने और पर्याप्त ऊनी कपड़े अवश्य रखें। अत्यधिक ठंड और कम वायुमंडलीय दबाव के कारण रक्तचाप और ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट आ सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह और जरूरी दवाएं साथ रखें। शाम ढलने के बाद पैदल मार्ग पर चलने से पूरी तरह बचें और निकटतम सुरक्षित पड़ाव (भीमबली या लिनचोली) पर ही रात्रि विश्राम करें।
केदारनाथ धाम में शुक्रवार रात से जारी यह मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड एक बार फिर यह स्मरण कराती है कि हिमालय जितना दिव्य और आध्यात्मिक है, उसकी प्राकृतिक परिस्थितियां उतनी ही अप्रत्याशित और चुनौतीपूर्ण हैं। एक ओर जहां हेलिकॉप्टर सेवाएं निलंबित होने और दृश्यता शून्य होने से आधुनिक परिवहन व्यवस्थाएं प्रकृति के आगे बेबस नजर आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बर्फबारी की संभावना और बर्फीली हवाओं के बीच छाते ताने कतारों में खड़े श्रद्धालुओं का यह जनसैलाब यह सिद्ध करता है कि सच्ची आस्था किसी भी भौतिक बाधा से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है।
रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और एसडीआरएफ के जवानों की निरंतर मुस्तैदी के चलते अब तक यात्रा बिना किसी अप्रिय घटना के नियंत्रित और सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रही है। आने वाले 24 से 48 घंटे निश्चित रूप से मौसम और सुरक्षा प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे। किंतु जब तक ‘बाबा केदार’ का आशीर्वाद और प्रशासन की सजगता यात्रियों के साथ है, तब तक हिमालय की इस कठोर भूमि पर आस्था का यह महा-उत्सव इसी प्रकार अक्षुण्ण बना रहेगा।



