
15 अगस्त के पावन अवसर पर जब 140 करोड़ से अधिक भारतवासी देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े गर्व और उल्लास के साथ मना रहे थे, ठीक उसी समय नीदरलैंड्स की धरती से भारतीय खेलों के लिए एक और गौरवशाली एवं अविस्मरणीय खुशखबरी सामने आई। कप्तान हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh) की अगुवाई में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपने एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 (FIH Men’s Hockey World Cup 2026) अभियान का शानदार और विजयी आगाज किया है।
शनिवार, 15 अगस्त को ऐतिहासिक वैगनर स्टेडियम, एम्सटेलवीन (Amstelveen) में खेले गए ग्रुप-डी (Group D) के अपने बहुप्रतीक्षित शुरुआती मुकाबले में भारत ने उच्च कोटि के सामरिक तालमेल, सटीक पासिंग और आक्रामक ड्रैग-फ्लिक आक्रमण का मुजाहिरा करते हुए वेल्स (Wales) को 3-1 के अंतर से पराजित कर दिया। इस शानदार और अधिकारिक जीत के साथ भारत ने टूर्नामेंट के अपने पूल में 3 बहुमूल्य अंक अर्जित कर क्वार्टर फाइनल और शीर्ष स्थान की ओर अपने कदम मजबूती से बढ़ा दिए हैं।
मैच की चारों अवधियों (Four Quarters) के दौरान भारतीय टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और विपक्षी वेल्स की रक्षापंक्ति पर निरंतर दबाव बनाए रखा।
मैच की पहली सीटी बजते ही भारतीय अग्रिम पंक्ति ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। मिडफील्ड में उप-कप्तान हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद ने गेंद की गति को नियंत्रित करते हुए वेल्स के डिफेंस को दोनों छोरों (Flanks) से घेरना शुरू किया।
खेल के 8वें मिनट में भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने वेल्स के डी-एरिया (Shooting Circle) में शानदार मूव बनाया। दाहिने विंग से आए एक सटीक क्रॉस को फॉरवर्ड खिलाड़ी अभिषेक ने बेहद चतुराई से डिफलेक्ट करते हुए गेंद को वेल्स के गोलकीपर के पैरों के बीच से नेट में डाल दिया और भारत को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी। वेल्स ने शुरुआती झटके के बाद जवाबी हमले करने की कोशिश की, लेकिन अनुभवी डिफेंडर अमित रोहिदास और जरमनप्रीत सिंह ने वेल्स के काउंटर-अटैक को हाफ लाइन पर ही रोक दिया।
दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने अपनी गति को और तेज कर दिया। खेल के 22वें मिनट में ललित उपाध्याय के तेज रन के चलते भारत को मैच का पहला पेनल्टी कॉर्नर (Penalty Corner) हासिल हुआ। विश्व के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग-फ्लिकरों में शुमार भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कोई गलती नहीं की। उन्होंने लगभग 115 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंद को शीर्ष बाएं कोने (Top Left Corner) में दाग दिया। वेल्स के गोलकीपर के पास इस बुलेट ड्रैग-फ्लिक को रोकने का कोई मौका नहीं था। भारत मध्यांतर (Half Time) तक 2-0 की मजबूत बढ़त पर पहुँच गया।
हाफ-टाइम के बाद मैदान पर उतरी वेल्स की टीम ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और फुल-प्रेस (Full-press Hockey) अपनाते हुए भारतीय सर्किल पर हमले तेज किए। 38वें मिनट में वेल्स को लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर मिले। पहले प्रयास को भारतीय रशर्स ने रोक दिया, लेकिन दूसरे प्रयास के रिबाउंड पर वेल्स के स्ट्राइकर जेम्स कार्सन ने हवा में आती गेंद को टैप-इन करके गोल में बदल दिया और स्कोर को 2-1 कर मैच में रोमांच ला दिया। गोल खाने के बाद भारतीय डिफेंस ने धैर्य नहीं खोया और गोलकीपर कृष्ण पाठक ने दो शानदार डाइविंग सेव करके वेल्स को बराबरी हासिल करने से रोक दिया।
अंतिम 15 मिनट में मुकाबला बेहद कड़ा हो गया। वेल्स बराबरी का गोल तलाश रही थी, जिससे उनके डिफेंस में खाली जगह बन गई।
51वें मिनट में मनप्रीत सिंह ने मिडफील्ड से 40 गज का एक लंबा और सटीक स्कूप पास फेंका, जिसे सुखजीत सिंह ने डी के भीतर खूबसूरती से ट्रैप किया। दो डिफेंडरों को चकमा देते हुए सुखजीत ने रिवर्स-स्टिक से रिवर्स हिट लगाई और गेंद सीधे जाले में उलझ गई।
इस तीसरे गोल के साथ ही भारत ने स्कोर को 3-1 कर दिया और मैच पूरी तरह अपनी मुट्ठी में कर लिया। अंतिम मिनटों में भारतीय टीम ने बॉल पजेशन बनाए रखते हुए घड़ी को समाप्त किया और 3-1 की शानदार जीत दर्ज की।
मैच समाप्ति के बाद आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस जीत को पूरे देश को समर्पित किया:
“आज 15 अगस्त का दिन है, जो प्रत्येक भारतवासी के लिए सबसे बड़ा और गर्व का दिन होता है। हमारी पूरी टीम ने मैच से पहले ही तय किया था कि हमें मैदान पर अपना 100 प्रतिशत देना है और देश को स्वतंत्रता दिवस पर यह जीत का तोहफा देना है। वेल्स ने विशेषकर तीसरे क्वार्टर में बेहद कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन हमारे डिफेंडरों और मिडफील्डरों ने दबाव में शानदार परिपक्वता दिखाई। टूर्नामेंट की यह केवल शुरुआत है; हमारी नजरें अब अगले मैचों पर टिकी हैं।”
— हरमनप्रीत सिंह, कप्तान, भारतीय पुरुष हॉकी टीम
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन (Craig Fulton) ने भी टीम के अनुशासन और ‘डिफेंड टू विन’ (Defend to Win) रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले मैच में 3 अंक हासिल करना हमेशा महत्वपूर्ण होता है, जिससे आगे आने वाले कड़े मुकाबलों के लिए टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ जाता है।
इस 3-1 की जीत के साथ भारतीय टीम ने ग्रुप-डी में शीर्ष स्थान के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। हॉकी विश्व कप के प्रारूप के अनुसार, ग्रुप में शीर्ष पर रहने वाली टीम सीधे क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करती है, जबकि दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्रॉस-ओवर (Cross-over) मैच खेलने पड़ते हैं। भारतीय टीम का अगला मुकाबला ग्रुप की अन्य मजबूत टीमों से होगा, जहाँ टीम इंडिया अपनी विजयी लय को बनाए रखते हुए 1975 के बाद एक बार फिर विश्व कप खिताब अपने नाम करने के सपने को साकार करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।
15 अगस्त के ऐतिहासिक दिन पर एम्सटेलवीन के मैदान पर लहराता तिरंगा और भारतीय हॉकी टीम की यह 3-1 की धमाकेदार जीत हर भारतीय खेल प्रेमी के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए काफी है। रणनीतिक अनुशासन, तेजतर्रार फॉरवर्ड खेल और कप्तान हरमनप्रीत के नेतृत्व में टीम इंडिया ने यह साबित कर दिया है कि वे 2026 विश्व कप में पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करने के प्रबल दावेदार हैं।



