
28 मई, 2026 को मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है कि राज्य में बकरीद (Bakrid) की पूर्व संध्या पर या किसी भी अन्य दिन किसी भी गाय या बछड़े (Cow or Calf) का वध न किया जाए।
मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन और न्यायाधीश वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने इस याचिका पर अपना फैसला सुनाया अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम तमिलनाडु राज्य को यह निर्देश देते हुए इस रिट याचिका को स्वीकार करते हैं कि वह यह सुनिश्चित करे कि बकरीद की पूर्व संध्या पर या राज्य में किसी भी अन्य दिन किसी भी गाय या बछड़े का वध न किया जाए।” यह आदेश विशेष रूप से सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं के वध से पैदा होने वाली स्वच्छता और धार्मिक संवेदनशीलता की चिंताओं को दूर करता है।
उच्च न्यायालय ने इस फैसले को केवल कागजी निर्देश न रहने देने के लिए राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को सीधे जवाबदेह बनाया है खंडपीठ ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक – कानून और व्यवस्था (ADGP – Law and Order) को इस आदेश के संबंध में तत्काल सर्कुलर और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। पुलिस और जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि जमीनी स्तर पर इस आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन हो, ताकि किसी भी प्रकार का सामाजिक या वैधानिक उल्लंघन न हो।
| कानूनी और प्रशासनिक आयाम | विस्तृत विवरण (28 मई, 2026) | रणनीतिक व विधिक महत्व |
| न्यायालय | मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) | राज्य के नागरिक और पशु कल्याण कानूनों की व्याख्या। |
| माननीय खंडपीठ | जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन | त्वरित और स्पष्ट विधायी आदेश जारी करने वाली बेंच। |
| मुख्य निर्देश | तमिलनाडु में गाय और बछड़े के वध पर पूर्ण और स्थाई रोक | बकरीद सहित किसी भी दिन गोवंश वध पूरी तरह प्रतिबंधित। |
| लक्षित नोडल अधिकारी | मुख्य सचिव और एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) | जमीनी स्तर पर थानों और जिला स्तर पर सर्कुलर जारी करने की जिम्मेदारी। |
| प्राथमिक उद्देश्य | सार्वजनिक स्थानों पर वध रोकना और पशु संरक्षण | कानून व्यवस्था बनाए रखना और स्वच्छता के मानकों का पालन। |
तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नई दिल्ली के पहले आधिकारिक दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के ठीक बाद आया यह न्यायिक फैसला राज्य प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर एक नई परीक्षा है. मुख्यमंत्री विजय जो वर्तमान में केंद्र-राज्य संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर कूटनीतिक संवाद कर रहे हैं, उनकी सरकार को अब उच्च न्यायालय के इस कड़े आदेश को शांतिपूर्ण ढंग से लागू करने के लिए जिला कलेक्टर्स और पुलिस कप्तानों को मुस्तैद करना होगा.
यह निर्णय भारत के संविधान के अनुच्छेद 48 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) के अनुरूप भी देखा जा रहा है, जो आधुनिक और वैज्ञानिक तर्ज पर कृषि और पशुपालन को संगठित करने तथा गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर रोक लगाने का निर्देश देता है।


