
1 जून, 2026 को भोपाल से प्राप्त हालिया प्रशासनिक और जांच रिपोर्टों के अनुसार, देश की शीर्ष केंद्रीय जांच एजेंसी, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), ने अभिनेता-मॉडल त्विषा शर्मा की उनके भोपाल स्थित आवास पर हुई संदिग्ध मृत्यु के मामले में अपनी तफ्तीश को वैज्ञानिक और तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल फॉरेंसिक क्राइम सीन री-क्रिएशन (Forensic Crime Scene Recreation) की प्रक्रिया को अंजाम दिया है।
त्विषा शर्मा की मृत्यु के रहस्य को सुलझाने और उनके परिवार द्वारा लगाए गए हत्या के आरोपों तथा ससुराल पक्ष द्वारा किए जा रहे आत्महत्या के दावों के बीच की कड़ियों को जोड़ने के लिए सीबीआई के फॉरेंसिक विशेषज्ञों और नोडल जांच अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने घटनास्थल पर 80 किलोग्राम के मानव-आकार के डमी (पुतले), एक फंदे (Noose) और घटना में प्रयुक्त कथित बेल्ट का उपयोग करके अंतिम क्षणों का सघन दृश्य-पुनर्निर्माण (Reconstruction) किया।
जब किसी बंद कमरे में मृत्यु (Custodial or Suspicious Death in an Enclosed Space) का ऐसा मामला सामने आता है जहाँ फाँसी (Hanging) को आत्महत्या या हत्या (Asphyxial Death) के रूप में दर्शाने का विवाद हो, तो केवल पोस्टमार्टम (Post-Mortem) रिपोर्ट और मौखिक गवाहियां किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए पर्याप्त नहीं होतीं। ऐसी स्थिति में सीबीआई फॉरेंसिक डमी टेस्ट (Dummy Test) की कूटनीतिक तकनीक का सहारा लेती है।
त्विषा शर्मा के शारीरिक गठन और वजन के बिल्कुल अनुरूप एक 80 किलोग्राम का डमी पुतला तैयार किया गया। फॉरेंसिक विज्ञान में वजन की सटीकता अनिवार्य है क्योंकि फांसी के मामले में गुरुत्वाकर्षण बल ($F = mg$) और शरीर द्वारा नीचे की ओर लगाया जाने वाला खिंचाव ही गर्दन की हड्डियों (Hyoid Bone) के टूटने या श्वास नली के बंद होने की गति तय करता है। जांचकर्ताओं ने कमरे की छत में लगे हुक या पंखे से उस ऊंचाई को मापा जहाँ से शव लटका हुआ पाया गया था। उन्होंने उस कथित चमड़े या कपड़े की बेल्ट की खिंचाव क्षमता (Tensile Strength) का परीक्षण किया, जिसे फंदे के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही गई थी।
इस डमी री-क्रिएशन का एक मुख्य कूटनीतिक उद्देश्य मामले के मुख्य संदिग्धों त्विषा के पति और उनकी सास द्वारा पुलिस और मीडिया के सामने दिए गए बयानों की सत्यता (Empirical Verification) की जांच करना था। पति और सास ने दावा किया था कि उन्होंने त्विषा को फंदे पर लटके हुए देखा और फिर खुद उसे नीचे उतारा। सीबीआई की टीम ने डमी का उपयोग करके यह परीक्षण किया कि क्या एक या दो व्यक्तियों के लिए इतनी ऊंचाई से 80 किलोग्राम के शरीर को बिना किसी बाहरी चोट या घसीटने के निशान के आसानी से उतारना भौतिक रूप से संभव था?
कथित तौर पर उपयोग की गई बेल्ट की मजबूती की जांच लैबोरेट्री और घटना स्थल दोनों जगह की गई। फॉरेंसिक इंजीनियरों ने यह देखा कि क्या वह बेल्ट बिना टूटे या बिना किसी गंभीर विरूपण (Deformation) के 80 किलोग्राम के झटके (Jerking Motion) को सहने में सक्षम थी? यदि बेल्ट की क्षमता उस वजन से कम पाई जाती है, तो आत्महत्या का दावा पूरी तरह खारिज हो जाएगा और यह मामला सीधे तौर पर ‘दोषपूर्ण मानव वध’ या हत्या की दिशा में मुड़ जाएगा।
सीबीआई इस डमी टेस्ट से प्राप्त आंकड़ों को पूर्व में जारी की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ क्रॉस-रेफरेंस (Cross-Reference) करेगी। फॉरेंसिक पैथोलॉजी में यह अंतर करना सबसे महत्वपूर्ण होता है कि क्या फांसी ‘एंटे-मॉर्टम’ (जीवित अवस्था में लगाना) थी या ‘पोस्ट-मॉर्टम’ (मृत्यु के बाद शव को लटकाना) थी।
यदि कोई व्यक्ति स्वयं फांसी लगाता है, तो बेल्ट या रस्सी का निशान गर्दन पर अंग्रेजी के ‘V’ आकार में ऊपर की ओर जाता है। डमी टेस्ट से यह देखा गया कि जब 80 किलो का वजन उस बेल्ट पर पड़ा, तो फंदे का कोण और झुकाव कैसा था। यदि मृतका की गर्दन पर मिले निशान इस डमी टेस्ट के कोण से मेल नहीं खाते हैं, तो यह साफ हो जाएगा कि शव को बाद में लटकाया गया था। डमी को लटकाने और उतारने के दौरान कमरे में मौजूद अन्य सामानों (जैसे बेड, साइड टेबल या पंखा) से उसके टकराने की संभावनाओं को मापा गया, ताकि यह जाना जा सके कि क्या मृतका के शरीर पर पाई गई अन्य आंतरिक या बाहरी चोटें इस प्रक्रिया के दौरान लग सकती थीं।
जैसे-जैसे भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली भारतीय साक्ष्य अधिनियम से आगे बढ़कर भारतीय साक्ष्य संहिता (BSS) के आधुनिक युग में प्रवेश कर चुकी है, वैसे ही अदालतों में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों (Scientific Evidences) की स्वीकार्यता अनिवार्य हो गई है।मौखिक गवाहियां अक्सर समय के साथ बदल सकती हैं या गवाहों को डराया-धमकाया जा सकता है। परंतु, भौतिकी के नियमों और फॉरेंसिक डमी टेस्ट की वीडियोग्राफी व वैज्ञानिक निष्कर्षों को अदालत में चुनौती देना बचाव पक्ष (Defense) के लिए लगभग असंभव हो जाता है। सीबीआई इस डमी टेस्ट की पूरी 3D लेजर स्कैनिंग और डिजिटल मैपिंग रिपोर्ट को अपनी अंतिम चार्जशीट का मुख्य हिस्सा बनाएगी।
भोपाल में अभिनेता-मॉडल त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई द्वारा किया गया यह 80 किलोग्राम का डमी परीक्षण यह दर्शाता है कि भारतीय जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वैज्ञानिक और कड़े खोजी तरीकों को अपना रही हैं। यह परीक्षण केवल इस विशिष्ट मामले के आरोपियों के दावों की पोल खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के संपूर्ण आपराधिक न्याय तंत्र को एक कड़ा संदेश देता है कि आधुनिक सुशासन और ‘कानून के शासन’ (Rule of Law) के तहत अब किसी भी अपराध को कूटनीतिक या पारिवारिक रसूख के दम पर छिपाया नहीं जा सकता।
बेल्ट की मजबूती की इस वैज्ञानिक जांच और डमी के अंतिम क्षणों के इस दृश्य-पुनर्निर्माण से जो परिणाम सामने आएंगे, वे न केवल मृतका के शोकाकुल परिवार को निष्पक्ष न्याय दिलाने में मील का पत्थर साबित होंगे, बल्कि भविष्य में संदिग्ध परिस्थितियों में होने वाली मौतों की गुत्थी सुलझाने के लिए एक अनुकरणीय और त्रुटिहीन फॉरेंसिक नजीर (Precedent) पेश करेंगे।



