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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस २०२६ (International Day of Yoga): कोलकाता के रेड रोड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उमड़ा जन-सैलाब

कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रव्यापी उत्सव: शीर्ष राजनेताओं की सक्रिय भागीदारी

संपूर्ण विश्व में आज ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power), वैश्विक शांति, और समग्र स्वास्थ्य (Holistic Wellness) के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय उत्सव अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga) का ऐतिहासिक और अभूतपूर्व शंखनाद हुआ है। इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय उत्सव के मुख्य आकर्षण के केंद्र के रूप में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड (Red Road, Kolkata) पर आयोजित एक विशाल और भव्य योग सत्र में हजारों उत्साही प्रतिभागियों के साथ सक्रिय रूप से भाग लिया।

कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम की कूटनीतिक और प्रशासनिक महत्ता तब और अधिक बढ़ गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल एक औपचारिक अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित नहीं रहे योग सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी स्वयं हजारों नागरिकों, युवाओं और बच्चों के बीच जमीन पर बैठे और उन्हें विभिन्न आसनों और प्राणायामों का अभ्यास करते हुए देखा गया। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने कई स्थानों पर जाकर प्रतिभागियों को योग की मुद्राओं (Yoga Postures) को पूरी तरह से सटीक और सही तरीके से करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उनका मार्गदर्शन और सहायता भी की। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने योग को केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता, वैश्विक बंधुत्व और जीवन जीने का एक कड़ा विज्ञान बताया।

२१ June के इस पावन अवसर पर संपूर्ण भारत एक सूत्र में पिरोया हुआ नजर आया। पक्ष और विपक्ष की कटीली राजनीतिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए देश के सभी प्रमुख नोडल केंद्रों पर विशाल योग सत्र आयोजित किए गए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में लाखों नागरिकों ने एक साथ योग कर स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का कड़ा संकल्प लिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) के वीर जवानों के साथ सीमांत क्षेत्रों और रक्षा अड्डों पर योग सत्रों में भाग लिया, जो यह दर्शाता है कि हमारे सैनिक सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी पूरी तरह कड़े और जागरूक हैं। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और नागरिक समाज के संगठनों ने देश के हर कोने में योग सत्र आयोजित कर इस दिवस को एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन (Mass Movement) में बदल दिया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस २०२६ की सबसे विस्मयकारी, कूटनीतिक और ऐतिहासिक सुर्खी पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) से सामने आई है, जो योग की सार्वभौमिक और वैश्विक अपील को अकाट्य रूप से प्रमाणित करती है सीमाओं के पार कड़े राजनीतिक और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, लाहौर (Lahore) के नागरिकों और योग प्रेमियों ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उत्सवों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लाहौर में एक भव्य सार्वजनिक योग सत्र का सफल आयोजन किया गया, जहाँ सैकड़ों लोगों ने एक साथ मिलकर इस प्राचीन अभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य, मानसिक शांति और वैलनेस (Well-being) के संदेश को अपनाया। यह घटना यह साबित करती है कि स्वास्थ्य और मानवता का विज्ञान किसी भी कटीली सीमा का मोहताज नहीं होता।

का गवाह बना है। जहाँ एक तरफ आज ही के दिन देश भर के ५,४४0 केंद्रों पर २२ लाख से अधिक अभ्यर्थियों की भागीदारी के साथ नीट-यूजी २०२६ की पुनः परीक्षा (NEET-UG 2026 Re-exam) का पूरी तरह अभेद्य, एआई-सीसीटीवी और कड़े बायोमेट्रिक सुरक्षा घेरे में सफल आयोजन संपन्न हुआ है, दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम पर ५ दिनों के विधिक प्रतिबंध को जायज ठहराकर डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) की रक्षा की है, और सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों में देश की अर्थव्यवस्था ७.७% की मजबूत वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर कोलकाता के रेड रोड से उठने वाली योग की यह दिव्य ध्वनि यह सिद्ध करती है कि भारत आज अपनी आधुनिक प्रशासनिक-आर्थिक प्रगति और अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) के बीच एक त्रुटिहीन और कड़ा संतुलन बना रहा है।

“सुशासन का वास्तविक और विधिक पैमाना केवल आर्थिक टर्नओवर या रक्षा उत्पादन (₹१.७८ लाख करोड़ का सर्वकालिक उच्च स्तर) का विकास नहीं है, बल्कि अपने देश के नागरिकों को एक निरोगी, स्वस्थ और संतुलित जीवन पद्धति प्रदान करना भी है। योग दिवस पर उमड़ा यह जन-सैलाब भारत की ‘सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर’ की वैश्विक विजय का सबसे जीवंत अंतरराष्ट्रीय साक्ष्य है।”

कोलकाता के रेड रोड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े और व्यावहारिक मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का यह सफल आयोजन और लाहौर की धरती पर योग मुद्राओं का यह जन-उत्सव यह अकाट्य रूप से साबित करता है कि नए भारत की सांस्कृतिक विरासत आज संपूर्ण विश्व को दिशा दिखाने वाले एक ‘ग्लोबल नेविगेटर’ (Global Navigator) के रूप में स्थापित हो चुकी है।

योग का यह कड़ा और पवित्र संदेश देश के युवाओं और भावी पीढ़ी को यह अटूट विश्वास दिलाता है कि यदि हम अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपने प्राचीन ज्ञान पर गर्व करते हुए आधुनिक विज्ञान के साथ आगे बढ़ें, तो विश्व का प्रत्येक नागरिक हमारी संप्रभुता और जीवन-दर्शन का लोहा मानने के लिए सहर्ष तत्पर रहेगा। यह ऐतिहासिक दिवस भारत के वैश्विक ‘विश्वबंधु’ (Global Friend) होने के संकल्प को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जो आने वाले समय में विश्व पटल पर शांति, करुणा और नियम-आधारित लोकतांत्रिक सुशासन की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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