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लोकतंत्र का महाकुंभ 2026: असम, केरल और पुडुचेरी में ‘सत्ता का महासंग्राम’

आगामी चुनावी कैलेंडर: तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल

9 अप्रैल, 2026 की सुबह भारतीय राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय के रूप में उभरी है। भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, आज देश के दो महत्वपूर्ण राज्यों असम और केरल तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह चरण न केवल इन क्षेत्रों के भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि 2026 के राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।

सुबह 7 बजे जैसे ही मतदान केंद्रों के द्वार खुले, लोकतंत्र के प्रति नागरिकों का उत्साह देखते ही बना। असम के चाय बागानों से लेकर केरल के तटीय बैकवाटर तक, लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कतारों में खड़े नजर आए।

असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर आज एक ही चरण में मतदान हो रहा है। 2026 का यह चुनाव असम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ लड़ाई केवल विकास की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और भाषाई अस्मिता की भी है। भाजपा के नेतृत्व वाले ‘मित्रजोत’ (गठबंधन) का मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘महाजोत’ (महागठबंधन) से है। भाजपा ने यहाँ ‘विकास’ और ‘सुरक्षा’ को अपना मुख्य मुद्दा बनाया है, जबकि विपक्षी गठबंधन ने बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई को लेकर सरकार को घेरा है।

सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) के मुद्दे इस बार भी चर्चा में रहे, हालांकि आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के सुधार पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया। मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के कई दिग्गजों की साख इस बार दांव पर है। ऊपरी असम और बराक घाटी के नतीजे तय करेंगे कि क्या भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करेगी।

केरल में चुनावी जंग हमेशा से ही वामपंथी (LDF) और कांग्रेसी (UDF) गठबंधनों के बीच घूमती रही है। लेकिन 2026 में यहाँ की स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) इतिहास रचने की कोशिश में है। केरल की परंपरा रही है कि हर पांच साल में सरकार बदलती है, लेकिन वामपंथी दल अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और आपदा प्रबंधन के दम पर दोबारा सत्ता में आने का दावा कर रहे हैं।

कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) इस बार सत्ता परिवर्तन की अपनी परंपरा को दोहराने की उम्मीद कर रहा है। भ्रष्टाचार के आरोपों और युवा बेरोजगारी को उन्होंने अपना प्रमुख हथियार बनाया है। भाजपा (NDA) ने भी केरल में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंकी है, जिससे कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों पर आज हो रहा मतदान भले ही भौगोलिक रूप से छोटा हो, लेकिन राजनीतिक रूप से यह अत्यंत प्रभावशाली है। यहाँ एनआर कांग्रेस (AINRC) और भाजपा का गठबंधन कांग्रेस-डीमके गठबंधन को कड़ी टक्कर दे रहा है।

निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष ‘पिक-एंड-ड्रॉप’ सुविधाएं दी गई हैं। असम के संवेदनशील इलाकों और केरल के राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की सैकड़ों कंपनियां तैनात की गई हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। यद्यपि स्थिति सामान्य है, फिर भी भीड़भाड़ वाले केंद्रों पर स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरती जा रही हैं।

आज का मतदान समाप्त होने के बाद देश की नजरें तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की ओर मुड़ जाएंगी, जहाँ आने वाले हफ्तों में मतदान होना है राज्य की सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा। द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच यह वर्चस्व की लड़ाई होगी।

बंगाल में चुनावी प्रक्रिया अपने अंतिम और सबसे तीव्र चरणों की ओर बढ़ेगी। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान यह तय करेंगे कि कोलकाता के ‘राइटर्स बिल्डिंग’ पर किसका कब्जा होगा। पूरे भारत के लिए 4 मई, 2026 का दिन निर्णायक होगा। इसी दिन असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी।

ये विधानसभा चुनाव केवल राज्यों की सरकारों को चुनने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए एक ‘सेमीफाइनल’ की तरह देखे जा रहे हैं। क्या कांग्रेस दक्षिण और उत्तर-पूर्व में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा सकेगी? क्या भाजपा दक्षिण में अपना विस्तार कर पाएगी? डीएमके, टीएमसी और वामपंथी दलों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों का दबदबा कितना रहेगा। क्या मतदाता स्थानीय विकास के मुद्दों पर वोट देंगे या भावनात्मक और पहचान आधारित राजनीति हावी रहेगी?

9 अप्रैल का यह मतदान भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण है। जब करोड़ों लोग अपनी उंगली पर स्याही लगवाकर बाहर निकलते हैं, तो वे केवल एक बटन नहीं दबाते, बल्कि अपनी आकांक्षाओं और उम्मीदों का इजहार करते हैं। 4 मई को जब मतों की गिनती होगी, तो परिणाम जो भी हों, जीत भारत के उस आम मतदाता की होगी जो अपने संवैधानिक अधिकारों का सजगता से प्रयोग करता है।

आने वाले तीन हफ्तों में तमिलनाडु और बंगाल के चुनावी रंग इस सियासी माहौल को और भी गर्म करेंगे। फिलहाल, असम, केरल और पुडुचेरी की किस्मत ईवीएम (EVM) में बंद हो रही है।

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