पीएम-दक्ष योजना में 1.87 लाख से अधिक एससी, ओबीसी और गरीब लोगों को मिला कौशल प्रशिक्षण

प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), विमुक्त जनजातियों और सफाई कर्मचारियों, जिनमें कचरा बीनने वाले भी शामिल हैं, के 1.87 लाख से अधिक उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 96,162 उम्मीदवारों को नौकरियों के लिए प्लेसमेंट ऑफर दिए गए। यह जानकारी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।
पीएम-दक्ष योजना के मूल्यांकन अध्ययन से पता चलता है कि यह योजना प्रासंगिकता और प्रशिक्षण के प्रभावी परिणामों के लिहाज से काफी सफल रही है। 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने बताया कि प्रशिक्षण उनके करियर लक्ष्यों, स्थानीय श्रम बाजार की जरूरतों और निर्धारित सीखने के परिणामों के अनुरूप था। फैक्टशीट के अनुसार, योजना के प्रभावों में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान में सुधार जैसे महत्वपूर्ण गैर-आर्थिक लाभ शामिल हैं।
ये लाभ विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों के बीच देखे गए हैं। योजना के दीर्घकालिक परिणाम भी काफी हद तक सकारात्मक हैं। अधिकांश लाभार्थी प्रशिक्षण के दौरान हासिल किए गए कौशल का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं, उन्हें लंबे समय में आय बढ़ने की उम्मीद है और वे अपने विकास में दोबारा निवेश कर रहे हैं। साथ ही, उन्हें भरोसा है कि वे स्वतंत्र रूप से इन सुधारों को बनाए रख सकते हैं। वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान पीएम-दक्ष योजना के लिए कुल 276.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, जबकि अब तक इस पर 309.5 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
पीएम-दक्ष केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे वित्त वर्ष 2020-21 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विमुक्त जनजातियों और सफाई कर्मचारियों, जिनमें कचरा बीनने वाले भी शामिल हैं, को सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण देना है। इसका लक्ष्य इन वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए स्वरोजगार और वेतन आधारित रोजगार को बढ़ावा देना है। इस योजना को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) के अंतर्गत आने वाले तीन निगमों के माध्यम से लागू किया गया।
इनमें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) शामिल हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग इन निगमों को धनराशि जारी करता है। इसके बाद निगम उन प्रशिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षण की लागत का भुगतान करते हैं, जो कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत सूचीबद्ध हैं।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संस्थानों के लिए कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर प्रशिक्षण लागत की 30 प्रतिशत राशि के बराबर तीसरी किस्त जब्त कर ली जाती है। इसके अलावा, प्रशिक्षण संस्थानों के लिए संबंधित उद्योगों के साथ सहयोग बनाए रखना अनिवार्य है, ताकि प्रशिक्षित उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। तीनों निगम लक्षित वर्ग के पात्र युवाओं को परियोजनाएं स्थापित करने के लिए ऋण सुविधाएं और आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहायता भी प्रदान करते हैं।
फैक्टशीट में आगे बताया गया कि वित्त वर्ष 2024-25 से पीएम-दक्ष योजना को एमएसडीई की पीएमकेवीवाई योजना में विलय करने का निर्णय लिया गया। इसकी वजह यह थी कि पीएम-दक्ष योजना, पीएमकेवीवाई के अतिरिक्त संचालित की जा रही थी और कौशल प्रशिक्षण के लिए सभी जॉब रोल स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) पोर्टल से लिए जाते थे, जो पीएमकेवीवाई के तहत भी शामिल थे। इसलिए दोहराव से बचने के लिए पीएम-दक्ष योजना को पीएमकेवीवाई में समाहित कर दिया गया।



