
दक्षिण भारत के राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील और वैचारिक रूप से मुखर राज्य केरल के राजभवन में शुक्रवार को एक बड़ा संवैधानिक नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। सिक्किम के पूर्व राज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार ओम प्रकाश माथुर (Om Prakash Mathur) कल यानी 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को केरल के 29वें राज्यपाल (29th Governor of Keralam) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण करेंगे।
तिरुवनंतपुरम स्थित लोक भवन ऑडिटोरियम (राजभवन) में यह भव्य शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12:00 बजे से 12:30 बजे के मध्य संपन्न होगा। केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन (Chief Justice Soumen Sen) नए राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 159 के तहत पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले के बाली से ताल्लुक रखने वाले 74 वर्षीय ओम प्रकाश माथुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित प्रचारक, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, दो बार के राज्यसभा सांसद और गुजरात व उत्तर प्रदेश के पूर्व पार्टी प्रभारी रहे हैं।
वे केरल के राजभवन में राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर (Rajendra Vishwanath Arlekar) का स्थान ले रहे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा स्थानांतरित कर पड़ोसी राज्य तमिलनाडु का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पूर्वोत्तर के शांत सीमावर्ती राज्य सिक्किम में 2 वर्षों तक सफलतापूर्वक संवैधानिक दायित्व निभाने के बाद, ओम प्रकाश माथुर का केरल आगमन केंद्र और राज्य के संबंधों, उच्च शिक्षा के प्रशासनिक ढांचे और राज्यपाल-सरकार समन्वय के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओम प्रकाश माथुर को भाजपा में ‘खामोश रणनीतिकार’ माना जाता है। वे उस दौर में गुजरात के प्रभारी थे जब नरेंद्र मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे। गुजरात में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में माथुर की भूमिका को हमेशा सराहा गया। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कई ऐतिहासिक चुनावी जीतों की पटकथा लिखी। छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने उन्हें प्रभारी बनाकर भेजा था, जहां भाजपा ने अप्रत्याशित जीत हासिल की थी।
माथुर 2008 से 2014 और फिर 2016 से 2022 तक राजस्थान से राज्यसभा के सांसद रहे। उच्च सदन में रहते हुए उन्होंने गृह मामलों, रक्षा और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समितियों में सक्रिय योगदान दिया। उनका यह विधायी अनुभव उन्हें राज्य और केंद्र के बीच संवैधानिक पेचीदगियों को सुलझाने में एक परिपक्व दृष्टि प्रदान करता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जुलाई 2024 में उन्हें सिक्किम का 18वां राज्यपाल नियुक्त किया था। गंगटोक के राजभवन में अपने दो साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान उन्होंने सिक्किम के जैविक कृषि मॉडल, पर्यावरण संरक्षण, भारत-चीन सीमा पर वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की निगरानी और राज्य के सुदूर सीमावर्ती गांवों के विकास में अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाई। सिक्किम की जनता और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) की सरकार के साथ उनके सौहार्दपूर्ण संबंध प्रशासनिक संतुलन का उदाहरण बने।
समारोह की शुरुआत में केरल के मुख्य सचिव डॉ. वी. वेणु औपचारिक रूप से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा जारी उस आधिकारिक आदेश (Warrant of Appointment) को पढ़कर सुनाएंगे, जिसमें ओम प्रकाश माथुर को केरल का 29वां राज्यपाल नियुक्त करने की घोषणा की गई है।
इस समारोह में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan), उनके सभी कैबिनेट सहयोगी, केरल विधानसभा के अध्यक्ष ए. एन. शमसीर, विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन, तिरुवनंतपुरम के सांसद, तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के दक्षिणी कमान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक विभूतियां शामिल होंगी।
केरल के राज्यपाल राज्य के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों (जैसे केरल यूनिवर्सिटी, एमजी यूनिवर्सिटी, कालीकट यूनिवर्सिटी और एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय) के पदेन कुलाधिपति होते हैं। विगत वर्षों में कुलपतियों की नियुक्ति और सीनेट के संचालन को लेकर राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग के बीच कानूनी विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे हैं। माथुर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बिना किसी अनावश्यक टकराव के विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक स्तर को ऊपर उठाना होगा।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत विधानसभा से पारित विधेयकों पर राज्यपाल की सहमति एक अत्यंत संवेदनशील विषय रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों ने भी स्पष्ट किया है कि राज्यपालों को विधेयकों पर समयबद्ध और संवैधानिक मर्यादा के भीतर निर्णय लेना चाहिए। माथुर का लंबा विधायी और राजनीतिक अनुभव उन्हें राज्य सरकार द्वारा भेजे गए विधेयकों का संतुलित और निष्पक्ष परीक्षण करने में मदद करेगा।
केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) की सरकार है और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन राज्य की स्वायत्तता और संघीय अधिकारों के बड़े पैरोकार माने जाते हैं। ओम प्रकाश माथुर अपनी मृदुभाषी शैली और संवाद-कुशलता के लिए जाने जाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि माथुर आक्रामक टकराव के बजाय टेबल पर बैठकर समाधान निकालने की नीति अपनाएंगे, जिससे केरल में राजभवन और सचिवालय के बीच एक नए सकारात्मक अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
ओम प्रकाश माथुर के केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेने की पूर्व संध्या पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों से शुभकामनाओं का तांता लग गया है राजस्थान के मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और मारवाड़ के जनप्रतिनिधियों ने माथुर को बधाई देते हुए कहा कि यह राजस्थान के लिए गर्व का विषय है कि राज्य के एक माटी पुत्र को देश के सबसे साक्षर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य केरल के राज्यपाल का दायित्व मिला है।
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने अपने पूर्व राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माथुर जी का मार्गदर्शन सिक्किम के विकास के लिए हमेशा स्मरणीय रहेगा और उनके नेतृत्व में केरल भी निश्चित रूप से लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, पिनाराई विजयन सरकार नए राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है और राज्य के विकास के लिए संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर मिलकर काम करने की आशा रखती है।
केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में ओम प्रकाश माथुर का शपथ ग्रहण केवल एक नियमित प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के उस संघीय ताने-बाने का प्रतीक है जहां उत्तर और पूर्वोत्तर के अनुभवों से तपा हुआ एक नेता दक्षिण भारत के सांस्कृतिक हृदय में संविधान का संरक्षक बनकर पहुंचता है।
23 अक्टूबर को जब मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन उन्हें लोक भवन के ऐतिहासिक मंच पर शपथ दिलाएंगे, तो माथुर के कंधों पर केवल एक रस्मी पद का भार नहीं होगा, बल्कि केरल की जनता की आकांक्षाओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और केंद्र-राज्य सहयोग को सुदृढ़ करने का महान दायित्व होगा। उनकी संवाद-प्रियता, संगठनात्मक परिपक्वता और शांत कार्यशैली यह विश्वास जगाती है कि केरल के राजभवन और सरकार के रिश्ते अब टकराव के बजाय सहयोग, संविधान के अक्षरशः पालन और राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में अग्रसर होंगे।



