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दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-1 (GRAP-1) की पाबंदियां लागू: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 200 के पार

यूपीपीसीबी ने 17 निर्माण स्थलों पर ₹75 लाख और पुश्ता रोड के आरएमसी प्लांट्स पर ₹1.28 करोड़ का जुर्माना ठोका

उत्तर भारत में मौसमी बदलाव, गिरते पारे और हवा की गति मंद पड़ने के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में जहरीली हवा और स्मॉग का संकट गहरा गया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) के 200 के पार यानी ‘खराब’ (Poor) श्रेणी में दर्ज होने के तत्काल बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) ने पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का पहला चरण (GRAP-1) प्रभावी रूप से लागू कर दिया है।
सीएक्यूएम के आदेश के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की राज्य सरकारों और संबंधित विकास प्राधिकरणों को युद्धस्तर पर धूल नियंत्रण और प्रदूषण रोकथाम के उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के क्षेत्रीय कार्यालय ने वायु प्रदूषण फैलाने वाली निर्माण इकाइयों और हॉट-मिक्स प्लांट्स के खिलाफ व्यापक दंडात्मक अभियान शुरू किया है।
नोएडा क्षेत्र में 30 निर्माण स्थलों के औचक निरीक्षण के दौरान 17 प्रोजेक्ट्स पर ग्रैप नियमों की खुली अवहेलना पाई गई, जिसके बाद बोर्ड ने लगभग ₹75 लाख के जुर्माने की संस्तुति की है। इसके साथ ही पुश्ता रोड क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) और हॉट-मिक्स प्लांट्स पर करीब ₹1.28 करोड़ का भारी पर्यावरण मुआवजा (जुर्माना) अधिरोपित किया गया है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मानसून की पूर्ण विदाई के बाद उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रवाह शुरू हो गया है। रात के तापमान में आ रही गिरावट के कारण निचली वायुमंडलीय परत संघनित हो गई है। हवा की गति अत्यंत मंद होने से स्थानीय स्तर पर उड़ने वाली धूल और वाहनों का धुआं ऊपर नहीं उठ पा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप विजिबिलिटी में भारी गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वायु निगरानी स्टेशनों के आंकड़ों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा का नॉलेज पार्क-3, नोएडा का सेक्टर-62, सेक्टर-125 और सेक्टर-116 सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहे हैं, जहां पीएम-10 का स्तर सामान्य से तीन गुना तक अधिक पाया गया।
क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी ने बताया कि अक्टूबर माह में अब तक 30 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया, जिनमें बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स, वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर साइट्स शामिल थीं। इनमें से 17 स्थानों पर पाया गया कि निर्माण सामग्री (रेत, मिट्टी और बजरी) को तिरपाल या ग्रीन नेट से ढंका नहीं गया था। परिसर के भीतर पानी का नियमित छिड़काव नहीं हो रहा था। ट्रकों के टायरों को धोने के लिए व्हील-वॉशिंग फैसिलिटी चालू नहीं थी, जिससे ट्रकों के पहियों के साथ भारी मात्रा में मिट्टी मुख्य सड़कों पर फैल रही थी। इन उल्लंघनों के लिए संबंधित बिल्डरों और ठेकेदारों पर करीब ₹75 लाख का पर्यावरण हर्जाना लगाने की सिफारिश जिला प्रशासन और राज्य मुख्यालय को भेजी गई है।

नोएडा के पुश्ता रोड और यमुना खादर के समीवर्ती इलाकों में चल रहे रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांट्स और डामर तैयार करने वाले हॉट-मिक्स प्लांट्स लंबे समय से प्रदूषण के बड़े हॉटस्पॉट रहे हैं। निरीक्षण के दौरान इन प्लांट्स में डस्ट सेपरेशन सिस्टम बंद पाए गए और भारी मात्रा में धूल खुले वायुमंडल में छोड़ी जा रही थी। बोर्ड ने बिना किसी रियायत के इन इकाइयों पर कुल ₹1.28 करोड़ का जुर्माना लगाया है।
नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम के सभी ढाबों और होटलों को नोटिस जारी कर दिया गया है कि वे कोयले या लकड़ी का उपयोग बंद करें। उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। खुले में कूड़ा जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन और नाइट पेट्रोलिंग टीमों की मदद ली जा रही है। लैंडफिल साइट्स (जैसे गाजीपुर या नोएडा सेक्टर-145 डंपिंग यार्ड) पर अग्नि नियंत्रण के विशेष दस्ते तैनात किए गए हैं। नियमित बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति को छोड़कर गैर-आपातकालीन व्यावसायिक कार्यों में अनियंत्रित डीजल जेनरेटर चलाने पर रोक लगाई गई है। केवल पीएनजी या सीएनजी रेट्रोफिटेड जेनरेटरों को ही सीमित उपयोग की छूट है।
यूपीपीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि पुश्ता रोड सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। भारी डंपरों और आरएमसी ट्रकों की आवाजाही के कारण सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, जिससे भारी धूल उड़ती थी। बोर्ड ने सिंचाई विभाग और नोएडा विकास प्राधिकरण के साथ संयुक्त बैठक कर सड़क की तत्काल मरम्मत और पक्की पटरियों के निर्माण का कार्य शुरू कराया है ताकि धूल का स्थायी समाधान हो सके। नोएडा विकास प्राधिकरण ने शहर के प्रमुख मार्गों (जैसे एमपी-1, एमपी-2, मास्टर प्लान रोड और एक्सप्रेसवे) पर दर्जनों मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात की हैं। साथ ही, ट्रीटेड वेस्ट वाटर से पेड़ों और डिवाइडरों को धोने का अभियान चलाया जा रहा है ताकि धूल के कण वातावरण में तैरने के बजाय जमीन पर बैठ जाएं।
दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-1 का लागू होना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हर साल आने वाले उस भयावह वायु प्रदूषण आपातकाल की पहली घंटी है जिससे करोड़ों नागरिक जूझते हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) द्वारा 17 निर्माण साइट्स पर ₹75 लाख की पेनाल्टी की सिफारिश और पुश्ता रोड के आरएमसी प्लांट्स पर ₹1.28 करोड़ का भारी जुर्माना यह स्पष्ट संदेश देता है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
विकास की गति आवश्यक है, किंतु नागरिकों के जीने के अधिकार और स्वच्छ हवा की कीमत पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। ग्रैप-1 के सफल क्रियान्वयन के लिए केवल सरकारी विभागों, पुलिस या प्रदूषण बोर्ड की गश्त पर्याप्त नहीं होगी; इसके लिए आम नागरिकों, उद्योगपतियों, होटल संचालकों और बिल्डरों को भी अपनी नागरिक जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि समय रहते स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले हफ्तों में मौसम और अधिक प्रतिकूल होने पर एनसीआर को ग्रैप-2, 3 और 4 की कठोर पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है।

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