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एसआरएफटीआई विवाद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और सुरेश गोपी को लिखा पत्र, तत्काल हस्तक्षेप की मांग

राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में चल रहे विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा केंद्रीय राज्य मंत्री और एसआरएफटीआई के अध्यक्ष सुरेश गोपी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जॉन ब्रिटास ने कहा कि संस्थान में उत्पन्न संकट का जल्द समाधान किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों की सुरक्षा, शैक्षणिक माहौल और संस्थान की लोकतांत्रिक एवं बहुलतावादी पहचान प्रभावित हो रही है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विवाद की शुरुआत 27 सितंबर को हुई, जब अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) के एक कार्यक्रम के दौरान टकराव की स्थिति पैदा हुई। आरोप है कि इस दौरान छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कुछ छात्रों पर हमला भी हुआ।

इसके बाद 4 अक्टूबर को स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जब हिंदू जागरण मंच के सदस्यों ने मार्च निकाला। आरोप है कि इस दौरान छात्रों की ओर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। ब्रिटास ने कहा कि इन घटनाओं ने न केवल छात्रों की सुरक्षा को खतरे में डाला, बल्कि देश के एक प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान के लोकतांत्रिक और बहुलतावादी मूल्यों पर भी आघात पहुंचाया। सांसद ने 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की घटनाओं की निंदा करते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन विफल रहा और बाद में विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर स्थिति को और खराब कर दिया। उन्होंने बताया कि छह छात्रों को संस्थान से निष्कासित कर दिया गया है, जबकि अन्य छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके विरोध में छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। जॉन ब्रिटास ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने हमलों, छात्रों के साथ कथित डराने-धमकाने और दुर्व्यवहार की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कर्मचारियों द्वारा छात्रों को किस भाषा में बात करनी चाहिए, इसे लेकर निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आई हैं, जो भाषाई सम्मान और शैक्षणिक संस्थानों की बहुलतावादी भावना पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। ब्रिटास ने छात्रों के खिलाफ की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने और छात्र संघ के प्रतिनिधियों के साथ संवाद शुरू करने की मांग की। साथ ही उन्होंने छात्रावास सुविधाओं, घायल छात्रों के लिए चिकित्सा सहायता और आंदोलन के कारण प्रभावित हुई कक्षाओं एवं प्रायोगिक कार्यों को दोबारा निर्धारित करने जैसे मुद्दों के समाधान पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सिनेमा शिक्षा और कलात्मक स्वतंत्रता के लिए समर्पित कोई भी संस्थान भय और दबाव का केंद्र नहीं बनना चाहिए। ब्रिटास ने परिसर में सुरक्षा, सम्मान और लोकतांत्रिक संवाद बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने तथा शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य करने की अपील की।

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