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महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित अन्नदाताओं को दिवाली का ऐतिहासिक संबल: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की ₹5,000 की अंतरिम वित्तीय सहायता की घोषणा

केंद्र से मदद मिलने में देरी के चलते राज्य के खजाने से तत्काल राहत

प्रकाश पर्व दिवाली से ठीक पहले महाराष्ट्र के संकटग्रस्त कृषि समुदाय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सूखा प्रभावित किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अत्यंत संवेदनशील, साहसिक और बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने बुधवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद आधिकारिक रूप से घोषणा की कि राज्य सरकार प्रदेश के सूखा प्रभावित किसानों को त्योहार से पूर्व ₹5,000 की अंतरिम वित्तीय सहायता (Interim Financial Assistance) प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंत्रालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने जमीनी रिपोर्टों, उपग्रह आधारित फसल मूल्यांकन और वर्षा के आंकड़ों के आधार पर पहले ही राज्य के कई संभागों में आधिकारिक तौर पर सूखा (Drought Declaration) घोषित कर दिया है।
चूंकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के अंतर्गत केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता की औपचारिक मंजूरी और फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया में समय लगता है और केंद्रीय राहत दिवाली से पहले पहुंचने की संभावना नहीं है, इसलिए राज्य सरकार ने प्रक्रियात्मक औपचारिकता का इंतजार किए बिना अपने स्वयं के राजकोष (State Exchequer) से यह अग्रिम वित्तीय सहायता सीधे अन्नदाताओं के खातों में भेजने का निर्णय लिया है।
यह वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) प्रणाली के जरिए पारदर्शी तरीके से सीधे किसानों के आधार से जुड़े सक्रिय बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। सरकार के इस कदम से राज्य के मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तरी महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त जिलों के लाखों लघु व सीमांत किसानों को तात्कालिक तरलता (Liquidity) मिलेगी, जिससे वे न केवल आत्मसम्मान के साथ दिवाली का पावन पर्व मना सकेंगे, बल्कि आगामी रबी बुवाई के लिए आवश्यक खाद और बीज की व्यवस्था भी कर सकेंगे।
नियमों के तहत जब कोई राज्य आधिकारिक रूप से सूखा घोषित करता है, तो उसे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय को एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) भेजना होता है। केंद्र सरकार एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team – IMCT) का गठन करती है, जो प्रभावित जिलों का भौतिक दौरा करता है। केंद्रीय दल अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (SC-NEC) को सौंपता है। गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee – HLC) सहायता राशि को मंजूरी देती है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय फंड जारी करता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ चर्चा में पाया कि इस पूरी विधिक प्रक्रिया में कम से कम 4 से 6 सप्ताह का समय लगना स्वाभाविक है। इसका अर्थ यह था कि केंद्र की ओर से राहत राशि नवंबर के अंतिम सप्ताह या दिसंबर 2026 से पहले मिलना असंभव था।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा:
“महाराष्ट्र का किसान राज्य की रीढ़ है। जब मानसून की बेरुखी से फसलें खराब होती हैं, तो केवल एक खेत नहीं सूखता, बल्कि एक पूरे परिवार के सपने टूट जाते हैं।
हमने राज्य में सूखे की औपचारिक घोषणा कर दी है और केंद्र सरकार को ज्ञापन भी भेज दिया है।
लेकिन हम सब जानते हैं कि केंद्रीय सहायता की अपनी एक स्थापित प्रक्रिया होती है। हमारे सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह था कि क्या हम दिवाली जैसे सबसे बड़े त्योहार पर अपने अन्नदाता को इस तकनीकी प्रक्रिया के भरोसे छोड़ दें?
मेरी सरकार का उत्तर था कदापि नहीं!
इसलिए हमने निर्णय लिया है कि केंद्र से फंड आने का इंतजार किए बिना, महाराष्ट्र सरकार अपने राज्य के खजाने से प्रत्येक प्रभावित किसान को ₹5,000 की अंतरिम अग्रिम वित्तीय सहायता तत्काल जारी करेगी। यह पैसा दिवाली से पहले सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो जाएगा ताकि कोई भी किसान परिवार इस पावन पर्व पर खुद को उपेक्षित या बेसहारा महसूस न करे। जब केंद्र सरकार का राहत पैकेज आएगा, तो हम उसका भी पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाएंगे। यह हमारी उनके प्रति जवाबदेही और सामाजिक वचनबद्धता है।”
राहत राशि वितरण को लेकर अक्सर यह शिकायत रहती है कि सहायता जरूरतमंदों तक पहुंचने में महीनों लग जाते हैं या दलालों द्वारा कमीशनखोरी की जाती है। किसानों को इस ₹5,000 की अंतरिम सहायता प्राप्त करने के लिए किसी सरकारी दफ्तर, तहसील कार्यालय या बैंक के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सरकार पहले से उपलब्ध पीएम-किसान (PM-Kisan) और राज्य की ‘नमो शेतकरी महासम्मान निधि’ के प्रमाणित आधार-लिंक्ड डेटाबेस का उपयोग करेगी। आईटी विभाग और राहत आयुक्त कार्यालय को 48 घंटे के भीतर भुगतान फाइलें तैयार करने और बैंकों को निर्देश जारी करने को कहा गया है ताकि धनतेरस से पहले हर पात्र किसान के खाते में पैसा क्रेडिट हो जाए।
मराठवाड़ा क्षेत्र में लगातार भूजल स्तर गिरने और अगस्त के सूखे के चलते खरीफ की पैदावार में 50% से अधिक की गिरावट का अनुमान है। बीड, जालना और धाराशिव जैसे संवेदनशील जिलों में, जहां किसान आत्महत्याओं की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं, इस समय नकद वित्तीय सहायता का पहुंचना मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से एक बड़ा संबल प्रदान करेगा।
विदर्भ के यवतमाल, अकोला और बुलढाणा जिलों में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) के प्रकोप और सूखे की दोहरी मार झेल रहे कपास उत्पादक किसानों को इस अंतरिम सहायता से तुरंत राहत मिलेगी। यह राशि किसानों को अपनी कपास की पहली चुगाई (Picking) के लिए मजदूरों के भुगतान में भी मदद करेगी।
अक्टूबर के मध्य से रबी सीजन की तैयारी शुरू हो जाती है। खरीफ की फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के पास रबी में चना, गेहूं और रबी ज्वार बोने के लिए बीज और डीएपी (DAP) उर्वरक खरीदने के पैसे नहीं बचे थे। ₹5,000 की यह सीधी सहायता कई छोटे किसानों के लिए खाद-बीज जुटाने का आधार बनेगी।
सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के नेताओं और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री फडणवीस के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “अन्नदाता के प्रति संवेदनशीलता का शिखर” बताया। नेताओं ने कहा कि इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है जब किसी राज्य सरकार ने केंद्र से एक पैसा मिले बिना अपने दम पर आपातकालीन राहत के रूप में हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में डाले हों।
विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) ने इसे “ऊंट के मुंह में जीरा” करार दिया। विपक्षी नेताओं ने दलील दी कि खाद, बीज और डीजल की वर्तमान महंगाई को देखते हुए एक एकड़ की लागत ही ₹20,000 से ₹25,000 तक पहुंच चुकी है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार को प्रति किसान ₹5,000 की एकमुश्त सहायता देने के बजाय प्रति हेक्टेयर कम से कम ₹25,000 का सूखा मुआवजा घोषित करना चाहिए और राज्य में किसानों के सभी कृषि ऋणों को तुरंत माफ किया जाना चाहिए।
14 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा घोषित यह ₹5,000 की अंतरिम सूखा सहायता केवल एक वित्तीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह संकट के समय राज्य और नागरिक के बीच के सामाजिक अनुबंध (Social Contract) की बहाली है। अक्सर देखा जाता है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकारें केंद्र और राज्य के क्षेत्राधिकार, नियमों की पेचीदगियों और कागजी खानापूरी के पीछे छिपने का प्रयास करती हैं।
लेकिन फडणवीस सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब सवाल अन्नदाता की गरिमा और त्योहार की खुशी का हो, तो विधिक प्रक्रियाओं की प्रतीक्षा करने के बजाय आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाना ही सच्ची राजधर्मिता है। दिवाली से ठीक पहले किसानों के खातों में पहुंचने वाली यह अग्रिम राशि निश्चित रूप से उनके जीवन के सारे संकटों को रातों-रात समाप्त नहीं कर देगी, लेकिन यह उन्हें यह अटूट विश्वास अवश्य दिलाएगी कि सूखे और विपत्ति के इस दौर में वे अकेले नहीं हैं पूरी सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
अब समूचे प्रशासन की असली परीक्षा इस बात में होगी कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र किसान तकनीकी खामी या बैंक सर्वर की गड़बड़ी के कारण इस लाभ से वंचित न रहे, ताकि इस वर्ष महाराष्ट्र के प्रत्येक किसान के आंगन में दिवाली का दीया सम्मान और उम्मीद के साथ जगमगा सके।

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