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7.42 करोड़ मतदाता तय करेंगे बिहार की तक़दीर, 14 नवंबर को आएगा नतीजा

6 और 11 नवंबर को डाले जाएंगे वोट, 14 नवंबर को होगी मतगणना; 22 साल बाद विशेष संशोधन से 69 लाख नाम हटे, 14 लाख नए मतदाता जुड़े

 

चुनाव आयोग (ECI) ने सोमवार को घोषणा की कि बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। यह ऐलान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर संधू और विवेक जोशी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोमवार ६ अक्टूबर को किया.

प्रमुख आँकड़े और चुनावी व्यवस्थाएँ

 बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं, जिनमें से 38 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

अंतिम मतदाता सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए हैं।

सूची से करीब 69 लाख नाम हटाए गए, जिनमें मृत्यु, पलायन, दोहराव, दस्तावेज़ों की कमी और नागरिकता संबंधी कारण शामिल हैं।

इस बार 14 लाख नए युवा मतदाताओं को जोड़ा गया है।

आयोग ने कहा कि किसी भी बूथ पर 1,200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे, ताकि भीड़ और अव्यवस्था कम हो।

सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

साथ ही, आयोग ने 17 नई चुनावी पहल भी पेश कीं, जिन्हें पहले बिहार में आज़माया जाएगा और बाद में पूरे देश में लागू किया जाएगा।

विशेष गहन संशोधन (SIR): मतदाता सूची की “शुद्धि”

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि 22 साल बाद बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) किया गया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, अनुपस्थित या अयोग्य नामों को हटाकर सूची को “शुद्ध” करना है।

चुनाव घोषणा के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है।

.  इस प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों और नागरिकों को दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने का अवसर मिला।

30 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित की गई।

. आयोग का दावा है कि सभी संशोधन पारदर्शी ढंग से और नियमों के तहत किए गए हैं।

हालाँकि, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बड़े पैमाने पर नाम कटने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इससे गरीब और हाशिए पर खड़े समुदायों को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। इस मुद्दे पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी लंबित है।

सुरक्षा और व्यवस्थाएँ

आयोग ने सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की जानकारी भी साझा की:

  • चुनाव ड्यूटी के लिए 1,200 से अधिक केंद्रीय सुरक्षा बलों की टुकड़ियाँ तैनात की जाएँगी।
  • प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सामान्य पर्यवेक्षक, पुलिस पर्यवेक्षक और व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त होंगे।
  • मोबाइल डिपॉज़िट सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे मतदाता आसानी से औपचारिकताएँ पूरी कर सकेंगे।
  • सभी मतदान कर्मियों के पास पहचान पत्र होंगे।
  • मतदान केंद्रों पर रैंप और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
  • शराब, पैसे या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर आयोग ने सख्ती बरतने का आश्वासन दिया है।

राजनीतिक माहौल

चुनाव घोषणा के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है।

  • सत्ता पक्ष एनडीए (भाजपा-जदयू और सहयोगी दल) ने इसे विकास और सुशासन का चुनाव बताया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जीत को लेकर विश्वास जताया।
  • वहीं विपक्षी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल) ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और नाम काटने को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
  • वामपंथी दलों ने महागठबंधन से 35 सीटें माँगीं और यह भी मांग की कि तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 केवल राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। चुनाव आयोग की नई पहलें पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ावा देने का दावा करती हैं। लेकिन असली चुनौती मतदाता सूची विवाद और राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने की होगी।

 

 

 

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