
9 मई, 2026 की सुबह पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नए सूर्योदय की साक्षी बनी। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड, जो दशकों से सत्ता के बड़े परिवर्तनों का केंद्र रहा है, आज भाजपा की पहली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का भव्य गवाह बना। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल एक नई राजनीतिक शुरुआत की घोषणा की, बल्कि बंगाल की आत्मा और उसकी सांस्कृतिक विरासत के साथ एक गहरा जुड़ाव भी स्थापित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह कोई सामान्य दिन नहीं है। आज ‘पोचिशे बोइशाख’ (25 वैशाख) है विश्व कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक “अदभुत संयोग” है कि बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार उस दिन शपथ ले रही है, जब पूरा विश्व टैगोर की 165वीं जयंती मना रहा है। उन्होंने इसे “दैवीय आशीर्वाद” करार दिया।
शपथ ग्रहण समारोह की औपचारिक शुरुआत ही गुरुदेव टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मंच पर ‘रवींद्र संगीत’ की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई प्रदान की। मोदी ने कहा कि टैगोर की रचनाएं केवल साहित्य नहीं हैं, बल्कि वे भारत की अंतरात्मा का प्रकाश हैं। उन्होंने ‘गीतांजलि’ और ‘स्वदेशी समाज’ का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे गुरुदेव का विजन आज भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ और बंगाल के ‘पुनरुत्थान’ के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल की जनता की शक्ति (Jana Shakti) के प्रति गहरी विनम्रता व्यक्त की। मोदी ने कहा, “मैं बंगाल की उस ‘जन शक्ति’ के सामने नतमस्तक हूँ, जिसने दशकों के डर, हिंसा और दमन के चक्र को तोड़कर लोकतंत्र की विजय सुनिश्चित की है।” उन्होंने बंगाल के मतदाताओं को उनके “साहस और धैर्य” के लिए सलाम किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत किसी दल की नहीं, बल्कि बंगाल की उस जनता की है जो विकास, शांति और सुशासन की भूखी थी। प्रधानमंत्री ने ‘जन शक्ति’ को ‘ईश्वर की शक्ति’ के समान बताया और नवनिर्वाचित सरकार को निर्देश दिया कि वे खुद को जनता का ‘शासक’ नहीं, बल्कि ‘सेवक’ समझें।
शपथ ग्रहण समारोह केवल भाषणों तक सीमित नहीं था; इसमें भविष्य के विकास का एक ठोस खाका भी पेश किया गया। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब दिल्ली और कोलकाता, दोनों एक ही दिशा में काम करेंगे। उन्होंने ‘आयुष्मान भारत’, ‘किसान सम्मान निधि’ और ‘नल से जल’ जैसी केंद्रीय योजनाओं को बंगाल के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का वादा किया।
मोदी ने ‘नारी शक्ति’ का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल की माताओं और बहनों की गरिमा की रक्षा करना इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा, “मैया दुर्गा की इस भूमि पर अब कोई भी अन्याय सहन नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आईटी, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन (विशेषकर सुंदरबन और उत्तर बंगाल के चाय बागानों) में नई संभावनाओं का जिक्र किया, ताकि बंगाल का युवा रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर न हो।
| प्रमुख पहलू | विवरण |
| अवसर | पोचिशे बोइशाख (रवींद्र जयंती – 9 मई, 2026) |
| नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री | सुवेंदु अधिकारी |
| मुख्य संदेश | “जन शक्ति” को नमन और विकास का संकल्प |
| उपस्थिति | प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री |
| सांस्कृतिक तत्व | रवींद्र संगीत, शंखध्वनि, और बंगाल के पारंपरिक व्यंजन (जैसे झालमुड़ी और मिठाई) |
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में बंगाल की महान हस्तियों स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली यह सरकार उन्हीं महापुरुषों के सपनों को साकार करने के लिए काम करेगी।
मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि यह सरकार उन लोगों के लिए भी उतनी ही समर्पित होगी जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया। गुरुदेव टैगोर के “मंत्र ऑफ यूनिटी” (एकता का मंत्र) का उल्लेख करते हुए उन्होंने बंगाल की जनता से अपील की कि वे विभाजनकारी राजनीति को पीछे छोड़कर एक नए, समृद्ध और सुरक्षित बंगाल के निर्माण में सहयोगी बनें।
9 मई, 2026 का यह दिन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह बंगाल के सांस्कृतिक गौरव और लोकतांत्रिक शक्ति के मिलन का उत्सव था। ‘पोचिशे बोइशाख’ के दिन गुरुदेव टैगोर को साक्षी मानकर ली गई यह शपथ, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है। प्रधानमंत्री मोदी का ‘जन शक्ति’ को नमन करना यह संदेश देता है कि अब सत्ता का केंद्र ‘नबन्ना’ के गलियारे नहीं, बल्कि बंगाल की आम जनता की आकांक्षाएं होंगी।



