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तमिलनाडु का राजकोषीय संकट, व्यवस्थागत वित्तीय विफलता और नीतिगत सुशासन: मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य के वित्त पर जारी ‘श्वेत पत्र’ (White Paper)

₹13.18 लाख करोड़ की देनदारियों और नवजात बच्चों पर ऋण के बोझ

16 June 2026 को तमिलनाडु के प्रशासनिक, राजनीतिक और समष्टि आर्थिक (Macro-economic) पटल से एक अत्यंत महत्वपूर्ण, अभूतपूर्व और व्यवस्थागत सुधार की सुर्खी सामने आई है। पिछले महीने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले विजय (Vijay) के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित सरकार ने अपने पहले बड़े नीतिगत और विधायी फैसलों के तहत तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पर एक विस्तृत, पारदर्शी और कड़ा श्वेत पत्र (White Paper on State Finances) आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिया है।

राज्य के नवनियुक्त वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन (N Marie Wilson) द्वारा मंगलवार को जारी इस वित्तीय स्थिति रिपोर्ट (Financial Status Report) में पिछली एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक (DMK) सरकार से विरासत में मिली जर्जर राजकोषीय स्थिति और बजटीय विसंगतियों का एक सघन, साक्ष्य-आधारित और कड़ा मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है। यह रिपोर्ट यह उजागर करती है कि लोकलुभावन कूटनीति (Populist Politics) और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण राज्य किस तरह एक गहरे कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंसता चला गया है।

वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन द्वारा विधानभवन में प्रस्तुत आर्थिक श्वेत पत्र में तमिलनाडु की वर्तमान राजकोषीय सेहत को लेकर कई बेहद चिंताजनक, चौंकाने वाले और कड़े वित्तीय आंकड़े देश के सामने रखे गए हैं श्वेत पत्र के अनुसार, तमिलनाडु की समग्र वित्तीय देनदारियाँ (Overall Financial Liabilities) इस समय बढ़कर अनुमानित ₹13.18 लाख करोड़ के अब तक के सबसे उच्चतम और खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं।

इस कुल देनदारी में से राज्य सरकार का बकाया प्रत्यक्ष कर्ज (Outstanding Direct Debt) अकेले ही ₹10 लाख करोड़ के आंकड़े को छूने की कगार पर है। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य अपनी दैनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं और राजस्व खर्चों को पूरा करने के लिए बाजार उधारी (Market Borrowings) पर अत्यधिक निर्भर हो चुका है।

इस वित्तीय स्थिति रिपोर्ट में इस कड़वे और विधिक तथ्य को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि पिछली एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार के पिछले पांच वर्षों (2021-2026) के कार्यकाल के दौरान राज्य का कर्ज का बोझ लगभग दोगुना हो गया है। ऋण संचय की यह वार्षिक दर राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) वृद्धि दर की तुलना में अत्यधिक असंतुलित रही है।

तमिलनाडु की धरती पर जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात बच्चे पर अब प्रभावी रूप से ₹1.28 लाख का कर्ज का बोझ (Debt Burden per Child) मँडरा रहा है। यानी एक बच्चा जो अभी पैदा हुआ है और जिसने राज्य की किसी भी व्यवस्था का उपभोग नहीं किया है, वह भी जन्म लेते ही सवा लाख रुपये से अधिक का कर्जदार बन चुका है।

तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर जारी यह ऐतिहासिक श्वेत पत्र केवल एक राज्य की आर्थिक विफलता का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश भर के राज्यों के नीति-निर्माताओं और मुख्यमंत्रियों के लिए एक कड़ा, व्यावहारिक और विधिक सबक है। यह सीधे तौर पर ‘लोकलुभावन मुफ्त की राजनीति’ (Freebie Politics) और ‘स्थाई व संतुलित विकास’ (Sustainable Development) के बीच के कड़े द्वंद्व को पूरी तरह से उजागर करता है।

“जब कोई भी संप्रभु राज्य दीर्घकालिक आर्थिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure CapEx), जैसे औद्योगिक पार्कों, बिजली संयंत्रों, सिंचाई परियोजनाओं और उन्नत परिवहन प्रणालियों के निर्माण के बजाय केवल तात्कालिक चुनावी और कूटनीतिक लाभ के लिए लोकलुभावन मुफ़्त योजनाओं पर बिना सोचे-समझे अंधाधुंध खर्च करता है, तो उसका अंतिम परिणाम राजकोषीय दिवालियापन (Fiscal Distress) होता है। तमिलनाडु का यह ₹13.18 लाख करोड़ का कर्ज इसी नीतिगत चूक का प्रत्यक्ष प्रमाण है।”

जब राज्य के राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल पुराने कर्जों का ब्याज चुकाने, सरकारी कर्मचारियों के वेतनों और पेंशनों में चला जाता है, तो विकास कार्यों के लिए पूंजीगत बजट बहुत संकुचित हो जाता है। इसके कारण नए उद्योगों की स्थापना रुक जाती है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर समाप्त होने लगते हैं।

यह वित्तीय संकट ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की मजबूत और सुदृढ़ वार्षिक जीडीपी विकास दर के साथ वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आगे बढ़ रही है, और देश ईंधन सुरक्षा के लिए 100% इथेनॉल (E100) जैसे कड़े व क्रांतिकारी नीतिगत फैसले ले रहा है। ऐसे में दक्षिण भारत के एक सबसे बड़े औद्योगिक और आर्थिक इंजन (तमिलनाडु) का इस तरह कर्ज के जाल में फंसना राष्ट्रीय विकास और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के प्रवाह को भी आंशिक रूप से प्रभावित कर सकता है।

मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार द्वारा शपथ ग्रहण के मात्र एक महीने के भीतर राज्य की वित्तीय स्थिति पर इस स्तर का पारदर्शी श्वेत पत्र जारी करना उनकी प्रशासनिक ईमानदारी, राजनीतिक साहस और सुशासन (Good Governance) के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का एक कड़ा और सकारात्मक संकेत है। किसी भी आर्थिक बीमारी को ठीक करने का पहला और अनिवार्य चरण समस्या को बिना छुपाए स्वीकार करना होता है, जो इस रिपोर्ट के माध्यम से पूरी कड़ाई से किया गया है।

अब असली, कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती मुख्यमंत्री विजय और वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन के सामने है। नई सरकार को लोकलुभावन कल्याणकारी योजनाओं को पूरी तरह बंद किए बिना, उन्हें प्रशासनिक रूप से तर्कसंगत और कड़ा बनाना होगा ताकि राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को विधिक सीमाओं के भीतर वापस लाया जा सके।

तमिलनाडु को यदि वापस वित्तीय संप्रभुता, राजकोषीय अनुशासन और औद्योगिक प्रगति के पथ पर ले जाना है, तो सरकार को कर चोरी पर लगाम लगाने, राज्य के घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे बिजली बोर्ड TANGEDCO और राज्य परिवहन निगमों) के ढांचे में कड़ा सुधारात्मक बदलाव करने और निजी पूंजीगत निवेश को आकर्षित करने के लिए एक अभेद्य ‘राजकोषीय सुधार रोडमैप’ (Fiscal Reform Roadmap) तैयार करना होगा। तमिलनाडु के भावी भविष्य और नवजात शिशुओं को इस ₹1.28 लाख के ऋण के मानसिक और आर्थिक बोझ से मुक्त कराना ही इस नई सरकार की नीतिगत सफलता की वास्तविक कसौटी होगी।

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