
भारत के राष्ट्रीय छात्र आंदोलन, प्रशासनिक सुशासन और नागरिक अधिकारों के पटल पर आज एक नया और कड़ा गतिरोध उत्पन्न हो गया है। हाल ही में NEET-UG 2026 परीक्षा धांधली के खिलाफ चले ऐतिहासिक प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party – CJP) ने केंद्र सरकार को अपने लिखित आश्वासनों की याद दिलाते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में, CJP ने भारत सरकार और गृह मंत्रालय से मांग की है कि वह अपने उस वादे का सम्मान करे, जिसके तहत देश भर में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक (Punitive) या आपराधिक कार्रवाई न करने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था।
CJP ने देश के विभिन्न राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिए जाने और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को रिहा नहीं किया गया और दर्ज प्राथमिकियों (FIRs) को वापस नहीं लिया गया, तो वह अपने आंदोलन को शुरू करने सहित “आवश्यक कदम” उठाने के लिए बाध्य होगी।
CJP के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास (Saurav Das) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पार्टी को देश के विभिन्न हिस्सों से “कई ऐसी रिपोर्ट्स” प्राप्त हुई हैं, जिनसे पता चलता है कि विभिन्न राज्य एजेंसियों द्वारा छात्र कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, हिरासत में लिया जा रहा है या गिरफ्तार किया जा रहा है।
सौरव दास ने अपने बयान में कहा “यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन केवल इसलिए स्थगित/वापस लिया था, क्योंकि भारत सरकार ने हमें यह ठोस और आधिकारिक आश्वासन दिया था कि वर्तमान में या भविष्य में चाहे भाजपा शासित राज्य हों या एनडीए शासित राज्य किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
बयान में विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों का उल्लेख किया गया है, जहाँ से स्थानीय राज्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने की लगातार रिपोर्ट्स प्राप्त हो रही हैं। CJP और सहयोगी छात्र संगठनों (AISA, SFI, AISF आदि) द्वारा NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई मार्किंग विसंगतियों के खिलाफ 6 जून 2026 से लगातार विरोध प्रदर्शन चलाए जा रहे थे।
यह आंदोलन तब अपने चरम पर पहुँच गया जब पर्यावरणविद सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) भी 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए।
25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पद से इस्तीफा दिए जाने और केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार व किसी भी छात्र पर कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित भरोसा दिए जाने के बाद, CJP ने जंतर-मंतर से अपने 36 दिनों से जारी धरने को समाप्त करने की घोषणा की थी।
हालांकि, धरने की समाप्ति के महज दो दिनों के भीतर विभिन्न राज्यों से आ रही धर-पकड़ की खबरों ने एक बार फिर सरकार और छात्र नेताओं के बीच अविश्वास की खाई को चौड़ा कर दिया है।
CJP नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भारत का युवा वर्ग देश में लोकतंत्र, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतियोगी परीक्षाओं की पुनर्बहाली के लिए सड़कों पर उतरा था। किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
“यदि सरकार अपने कहे वादों से मुकरती है और विरोध का चेहरा बने निर्दोष छात्रों को पुलिसिया मुकदमों के भंवर में धकेलती है, तो यह देश के करोड़ों युवाओं के भरोसे के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात होगा। हम अपने साथियों को अकेले कानूनी लड़ाइयों में फंसने नहीं देंगे।” — CJP प्रवक्ता
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि मंगलवार तक केंद्र सरकार और संबंधित राज्य प्रशासन द्वारा सभी दर्ज मुकदमे रद्द नहीं किए जाते और हिरासत में लिए गए छात्रों को ससम्मान रिहा नहीं किया जाता, तो CJP देश भर के छात्र तंत्र को पुनः लामबंद करेगी और जंतर-मंतर पर फिर से अपना मोर्चा संभालेगी।
27 जुलाई 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा केंद्र सरकार को दी गई यह चेतावनी यह साबित करती है कि NEET-UG विवाद से उपजा यह राष्ट्रीय छात्र असंतोष केवल एक मंत्री के इस्तीफे या वादों से पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अब पूरी नजरें केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अगले प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं कि क्या वे मंगलवार की समय-सीमा से पहले राज्यों को निर्देश जारी कर छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को वापस करवाते हैं या देश एक बार फिर बड़े छात्र आंदोलनों की आहट का गवाह बनता है।



