पीएम मोदी का फेसबुक वीडियो ब्लॉक होने पर केंद्र का कड़ा रुख: आईटी मंत्रालय ने मेटा के शीर्ष अधिकारियों को दोबारा किया तलब
तकनीकी गड़बड़ी की दलील नाकाफी, नीतिगत स्तर पर दें जवाब

भारत के डिजिटल गवर्नेंस, प्लेटफॉर्म जवाबदेही (Platform Accountability), तकनीकी संप्रभुता और वैश्विक सोशल मीडिया दिग्गजों के साथ केंद्र सरकार के विधिक संबंधों में एक नया और अत्यंत कड़ा अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी टेक दिग्गज मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के फेसबुक (Facebook) प्लेटफॉर्म द्वारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का एक महत्वपूर्ण वीडियो संदेश अस्थाई रूप से प्रतिबंधित (Restricted / Blocked) किए जाने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी के शीर्ष वैश्विक कार्यकारी अधिकारियों को दोबारा तलब (Summon) किया है।
गुरुवार (30 जुलाई 2026) को आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि मेटा द्वारा इस घटना पर जताया गया खेद और “अनजान में हुई तकनीकी त्रुटि” (Inadvertent Error / Technical Glitch) की दलील सरकार के लिए बिल्कुल संतोषजनक नहीं है। सरकार ने मेटा के शीर्ष वैश्विक नेतृत्व को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर नीतिगत (Policy Level) और तकनीकी (Technical Level) दोनों स्तरों पर विस्तृत और लिखित स्पष्टीकरण देने का सख्त निर्देश दिया है।
विवाद की शुरुआत हाल ही में हुई, जब देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रहे विमर्श के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात देश के युवाओं, अभ्यर्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए अपना पहला वर्टिकल फ्रंट-कैमरा (Selfie Format) वीडियो संदेश साझा किया।
पीएम मोदी ने देश के लाखों युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा प्रणालियों में पारदर्शिता लाने, कड़े कानून लागू करने और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। यह वीडियो सबसे पहले प्रधानमंत्री के आधिकारिक इंस्टाग्राम (Instagram) हैंडल पर अपलोड किया गया, जहाँ इसने रिकॉर्ड Viewership हासिल की। बाद में जब इसी वीडियो को उनके आधिकारिक फेसबुक (Facebook) पेज पर साझा किया गया, तो फेसबुक के ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन फिल्टर्स ने इसे अचानक प्रतिबंधित (Restricted) कर दिया और आम यूजर्स के लिए अनुपलब्ध बना दिया।
30 जुलाई 2026 को मीडिया से बात करते हुए आईटी सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट संदेश दिया कि बिग-टेक कंपनियों को भारत के विधिक ढांचे, संप्रभु अधिकारों और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के डिजिटल कंटेंट का सम्मान करना होगा।
“हमने मेटा से स्पष्ट कहा है कि वह अपने उच्चतम स्तर (Highest Leadership Level) पर आकर यह समझाए कि उनके सिस्टम में यह क्या हो रहा है और इस प्रकार की गंभीर तकनीकी व नीतिगत खामियां क्यों आ रही हैं। हम इस मुद्दे को केवल एक साधारण भूल मानकर बंद नहीं कर सकते। हम नीतिगत और तकनीकी दोनों स्तरों पर इसका स्थाई समाधान चाहते हैं। हालांकि मेटा ने माफी मांगी है और 28 जुलाई से विशिष्ट खातों के लिए नए प्रोटोकॉल स्थापित करने का दावा किया है, लेकिन सरकार इसे केवल एक गलती मानकर इतिश्री नहीं कर सकती।”
— एस. कृष्णन, सचिव, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
मंत्रालय का तर्क है कि जब किसी लोकतांत्रिक देश के संवैधानिक प्रमुख (Head of Government) के संदेश को इस तरह ऑटोमेटेड एल्गोरिदम या मानव त्रुटि के नाम पर सेंसर कर दिया जाता है, तो यह प्लेटफॉर्म्स के ‘कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम’ और निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े करता है।
प्रधानमंत्री के फेसबुक पोस्ट पर लगे इस अस्थाई प्रतिबंध के बाद भारत के राजनीतिक हलकों, तकनीक विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकार समूहों में व्यापक विमर्श छिड़ गया है सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं और डिजिटल विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि ग्लोबल टेक कंपनियां अक्सर पारदर्शी नियमों के अभाव में काम करती हैं। उनके एल्गोरिदम या मानव मॉडरेटर्स द्वारा चुनिंदा कंटेंट को डाउनरैंक, फ्लैग या ब्लॉक करना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत सोशल मीडिया मध्यस्थों (Social Media Intermediaries) को पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायसंगत कंटेंट मॉडरेशन नीतियां अपनानी होती हैं। बिना किसी विधिक कारण या पूर्व सूचना के देश के प्रधान सेवक के पोस्ट को हटाना इन नियमों के क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है।
आईटी मंत्रालय केवल इस एक घटना तक सीमित नहीं रहना चाहता। मंत्रालय ने संकेत दिया है कि मेटा के अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में एआई-जनरेटेड/सिंथेटिक कंटेंट, एल्गोरिदम ट्रांसपेरेंसी, एआई इमेज जनरेटर पर प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और डीपफेक तकनीक से निपटने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी।
भारत सरकार के इस कड़े और सख्त रुख के बाद मेटा (Meta) ने आधिकारिक रूप से अपनी गलती स्वीकार की और लिखित रूप में खेद व्यक्त किया है मेटा के प्रवक्ता ने कहा कि यह कार्रवाई प्रणाली के ऑटोमेटेड कंटेंट चेकिंग फिल्टर्स में आई खराबी के कारण अनजाने में हुई थी, जिसे पहचानते ही बहाल कर दिया गया।
मेटा ने सरकार को सूचित किया है कि 28 जुलाई 2026 से उसने वैश्विक स्तर पर राष्ट्रप्रमुखों, संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और अति-विशिष्ट सार्वजनिक हस्तियों के खातों के लिए अतिरिक्त ‘ह्यूमन ओवरसाइट’ (Human Oversight) और विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं, ताकि इस प्रकार के ऑटोमेटेड ब्लैंकेट ब्लॉक दोबारा न हों।
July 2026 का यह समकालीन कालखंड भारत के समष्टि आर्थिक (Macroeconomic), तकनीकी, न्यायिक और प्रशासनिक सुशासन के एक अत्यंत मजबूत, उत्तरदायी, आत्मनिर्भर और अदम्य अध्याय को प्रमाणित कर रहा है। सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) के हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जहाँ भारतीय अर्थव्यवस्था 7.7% की सुदृढ़ और अदम्य वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर के साथ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी वित्तीय संप्रभुता साबित कर रही है, देश का रक्षा विनिर्माण उत्पादन सर्वकालिक उच्च स्तर पर है, भारत-यूके CETA व्यापार समझौते के तहत शून्य आयात शुल्क लागू हुआ है, डीसीजीआई ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन ‘क्यूडेंगा’ को मंजूरी दी है, और 26 दिनों के अनशन के बाद सोनम वांगचुक का गतिरोध सुलझा है वहीं केंद्र सरकार द्वारा बिग-टेक कंपनियों को उनकी जवाबदेही तय करने के लिए सख्त समन जारी करना यह अकाट्य रूप से सिद्ध करता है कि भारत का डिजिटल सुशासन अपनी संप्रभुता और प्लेटफॉर्म जवाबदेही से कोई समझौता नहीं करेगा।
“सच्चे और उत्तरदायी सुशासन का वास्तविक और विधिक पैमाना केवल डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) की रक्षा करना और वैश्विक टेक कंपनियों को भारतीय कानूनों व पारदर्शी नियमों के प्रति जवाबदेह बनाना है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक वीडियो पर लगे प्रतिबंध के बाद आईटी मंत्रालय द्वारा मेटा के शीर्ष नेतृत्व को दोबारा तलब किया जाना भारत के डिजिटल इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि कोई भी टेक कंपनी, चाहे उसका आकार या वैश्विक प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो, भारतीय कानूनों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से ऊपर नहीं हो सकती।
भविष्य का सुरक्षित और पारदर्शी रोडमैप यही मांग करता है कि बिग-टेक कंपनियां अपने एल्गोरिदम और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाएं। आईटी मंत्रालय और मेटा नेतृत्व के बीच होने वाली आगामी उच्चस्तरीय बैठक भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और डिजिटल स्पेस की निष्पक्षता के नए मानक तय करेगी। सरकार, न्यायपालिका और जागरूक नागरिक समाज जब एक साथ मिलकर डिजिटल संप्रभुता की रक्षा करेंगे, तभी भारत का आंतरिक सुशासन, बौद्धिक संप्रभुता, लोकतांत्रिक मूल्य और लोक कल्याण का विज़न सदैव सर्वोच्च, विश्वसनीय, निष्पक्ष, न्यायसंगत और अदम्य बना रहेगा।



