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कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी और मंत्री सुबोध उनियाल के बीच तीखा विवाद
35 लाख फीस, 'लिप-सिंकिंग' और नशे के आरोपों पर गरमाई सियासत

देवभूमि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां कुंजापुरी देवी के पावन प्रांगण से उठा एक सांस्कृतिक विवाद अब देश के कला, संगीत और राजनीतिक गलियारों में बड़े तूफान का रूप ले चुका है। नरेंद्रनगर में आयोजित ऐतिहासिक कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले (Kunjapuri Mela) की सांस्कृतिक संध्या में उस समय अप्रत्याशित और असहज स्थिति उत्पन्न हो गई, जब मंच पर प्रस्तुति दे रहे भारतीय पॉप संगीत के दिग्गज गायक दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) को राज्य के वन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री व स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल (Subodh Uniyal) ने बीच कार्यक्रम में टोकते हुए सार्वजनिक रूप से फटकार लगा दी।
मंत्री सुबोध उनियाल ने मंच पर चढ़कर न केवल परफॉर्मेंस रुकवाई, बल्कि माइक से कहा कि “बोला तो जा नहीं रहा, गाना क्या गाएंगे?”
मंत्री ने आरोप लगाया कि दलेर मेहंदी कथित तौर पर शराब के नशे में थे, मंच पर लड़खड़ा रहे थे और ₹35 लाख की भारी-भरकम फीस लेने के बावजूद केवल पहले से रिकॉर्ड किए गए ट्रैक पर ‘लिप-सिंकिंग’ (Lip-syncing) कर रहे थे। हालांकि, गायक द्वारा शराब के सेवन के आरोपों की कोई स्वतंत्र चिकित्सीय पुष्टि (Medical Confirmation) नहीं हुई है।
इस अपमानजनक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल होने के बाद भारतीय संगीत उद्योग लामबंद हो गया है। दलेर मेहंदी के छोटे भाई और मशहूर गायक मीका सिंह (Mika Singh) ने मंत्री और आलोचकों को सीधी चुनौती देते हुए खुला ऐलान किया है कि “अगर कोई साबित कर दे कि दलेर मेहंदी ने जिंदगी में कभी शराब पी है, तो मैं हमेशा के लिए गायकी छोड़ दूंगा।”
मीका सिंह ने खुलासा किया कि दलेर मेहंदी हाल ही में एक बड़ी और गंभीर सर्जरी (Major Surgery) से उबरे हैं और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी के बावजूद आयोजकों के प्रति अपनी पेशेवर वचनबद्धता निभाने के लिए मंच पर पहुंचे थे। इस विवाद में अब रैपर बादशाह, हास्य अभिनेता कपिल शर्मा और पलाश सेन जैसे बड़े नाम भी दलेर मेहंदी के समर्थन में उतर आए हैं और एक राष्ट्रीय धरोहर जैसे वरिष्ठ कलाकार के सार्वजनिक अपमान पर कड़ा रोष जताया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो फुटेज के अनुसार, दलेर मेहंदी जब मंच पर अपने ब्लॉकबस्टर गीतों की प्रस्तुति दे रहे थे, तो उनके गायन में वह चिर-परिचित ऊर्जा और दहाड़ नजर नहीं आ रही थी जिसके लिए वे जाने जाते हैं। बैकग्राउंड में म्यूजिक ट्रैक बज रहा था, लेकिन दलेर के होंठ और माइक की आवाज के बीच तालमेल गड़बड़ा रहा था। इस स्थिति को देखकर स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अपना आपा खो बैठे। वे सुरक्षाकर्मियों के साथ मंच पर पहुंचे और दलेर मेहंदी के सामने खड़े होकर ऊंची आवाज में सवाल करने लगे।
वीडियो में मंत्री को यह कहते हुए साफ सुना जा सकता है:
“इतना पैसा देकर हमने आपको बुलाया है। आप हमें बेवकूफ बना रहे हैं। यह नवरात्रि और मां दुर्गा का कार्यक्रम है। आप शराब पीकर मंच पर आ गए हैं, यह अनुचित है। जब आपसे बोला तक नहीं जा रहा, तो आप गाना क्या गाएंगे?”
मंत्री ने कहा कि दूर-दराज के पहाड़ी गांवों से कड़ाके की ठंड में हजारों लोग एक महान गायक की आवाज को लाइव सुनने आए थे।
लेकिन मंच पर खड़े होकर केवल पहले से रिकॉर्ड गानों पर मुंह हिलाना (Lip-syncing) जनता और दर्शकों के साथ खुला छलावा है।
उनियाल ने दावा किया, *”वे मंच पर इतने दिशाहीन लग रहे थे कि सीधे खड़े तक नहीं हो पा रहे थे। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते यह मेरा नैतिक कर्तव्य था कि मैं जनता के गाढ़े पसीने की कमाई और धार्मिक उत्सव की मर्यादा की रक्षा करूं। मैंने केवल एक आयोजक और जनसेवक के रूप में अपनी नाराजगी जाहिर की थी।”
मीका सिंह ने स्पष्ट किया कि दलेर मेहंदी की आवाज में लड़खड़ाहट या उनके चलने में शिथिलता का कारण कोई नशा नहीं, बल्कि उनकी हाल ही में हुई एक अत्यंत गंभीर सर्जरी थी। वे पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी के दौर से गुजर रहे थे और डॉक्टरों ने उन्हें किसी भी तरह के भारी शारीरिक श्रम या यात्रा से बचने को कहा था। किंतु उत्तराखंड के लोगों के प्रति उनके मन में जो प्रेम और श्रद्धा थी, उसी के चलते उन्होंने स्वास्थ्य को ताक पर रखकर कुंजापुरी मेले में आने का निर्णय लिया।
मीका सिंह ने व्यवस्था और समाज के दोहरे चरित्र पर तीखा प्रहार करते हुए सवाल पूछा:
“अगर यही स्थिति किसी विदेशी कलाकार या रॉकबैंड (जैसे कोल्डप्ले) के कॉन्सर्ट में होती, तो क्या कोई नेता या मंत्री मंच पर चढ़कर उनसे माइक छीनने और उन्हें बेइज्जत करने की हिम्मत जुटा पाता? हमारे देश में अपने ही दिग्गजों का सम्मान करना लोग भूल जाते हैं। दलेर पाजी वो इंसान हैं जिन्होंने उस दौर में भारतीय पॉप म्यूजिक को वैश्विक पहचान दिलाई जब कोई सोच भी नहीं सकता था।”
वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि भारतीय कानून (भारतीय न्याय संहिता) के तहत किसी भी सार्वजनिक मंच से किसी व्यक्ति पर बिना किसी मेडिकल साक्ष्य, ब्लड टेस्ट या ब्रीथ एनालाइजर जांच के “शराब के नशे में होने” का आरोप लगाना सीधे तौर पर आपराधिक मानहानि (Defamation) का मामला बन सकता है। सुबोध उनियाल ने एक संवैधानिक पद (कैबिनेट मंत्री) पर रहते हुए बिना किसी पुख्ता रिपोर्ट के एक राष्ट्रीय स्तर के कलाकार पर यह आरोप लगाया, जिससे कलाकार की छवि को भारी आघात पहुंचा है।
संगीत विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई गायक 60 वर्ष की आयु के करीब पहुंचता है या हाल ही में सर्जरी से गुजरा होता है, तो लाइव कॉन्सर्ट्स में ‘गाइड वोकल्स’ या ‘बैकिंग ट्रैक्स’ का इस्तेमाल आम बात है ताकि सांस फूलने पर संगीत न रुके। माइकल जैक्सन से लेकर ब्रिटनी स्पीयर्स और जस्टिन बीबर तक कई वैश्विक कलाकार कठिन शारीरिक परिस्थितियों में बैकिंग ट्रैक्स का उपयोग करते रहे हैं।
यदि आयोजक इससे असंतुष्ट थे, तो इसका निपटारा शो के बाद बंद कमरे में फीस कटौती या नोटिस के जरिए किया जा सकता था, न कि मंच पर माइक छीनकर।
कुंजापुरी मेले का यह अप्रिय प्रकरण केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के बिगड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में सत्ता के अहंकार और कलाकारों की गरिमा के बीच के असंतुलन की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में सुबोध उनियाल की यह चिंता स्वाभाविक हो सकती है कि जनता के पैसे का सही उपयोग हो और लोगों को उत्कृष्ट मनोरंजन मिले।
किंतु उस चिंता को प्रकट करने का तरीका क्या यह होना चाहिए कि आप भरे मंच पर, हजारों दर्शकों और कैमरों के सामने एक वरिष्ठ और राष्ट्रीय स्तर के अस्वस्थ कलाकार को अपमानित करें? मीका सिंह की खुली चुनौती “शराब पीना साबित कर दो, गायकी छोड़ दूंगा” ने इस पूरे विवाद को अब एक नैतिक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
जब यह तथ्य सामने आ चुका है कि दलेर मेहंदी एक बड़ी सर्जरी के बाद असहनीय दर्द में भी केवल अपने वादे और उत्तराखंड की जनता के सम्मान के लिए वहां पहुंचे थे, तो ऐसे में आलोचना के बजाय उनके प्रति सहानुभूति और सम्मान प्रकट किया जाना चाहिए था।
यह घटना पूरे देश के आयोजकों, राजनेताओं और समाज के लिए एक गंभीर सबक है कि राजनीतिक पद और शक्ति क्षणभंगुर हो सकते हैं, लेकिन जो कलाकार अपनी कला और साधना से पीढ़ियों के दिलों पर राज करते हैं, उनकी गरिमा और सम्मान की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।



