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जुहू में टाइगर श्रॉफ पर जानलेवा हमला: लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट की बॉलीवुड को खुली चुनौती
कोटा में शूटरों की घेराबंदी और मुंबई कोर्ट का आदेश: 31 अक्टूबर तक कस्टडी

मायानगरी मुंबई के सबसे पॉश उपनगरीय इलाके जुहू में रविवार की शाम गोलियों की गूंज ने 1990 के दशक के अंडरवर्ल्ड आतंक की भयावह यादें ताजा कर दी हैं। बॉलीवुड के लोकप्रिय एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) के वाहन को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी में अभिनेता बाल-बाल बच गए।
हालांकि, इस हमले में अभिनेता के निजी चालक और पास खड़े एक अन्य व्यक्ति (ऑटो चालक/व्लॉगर) को गोलियां लगी हैं। हमले के कुछ ही घंटों बाद विदेश में बैठे कुख्यात गैंगस्टर अनिल पंडित (Anil Pandit) और हरमन संधू (Harman Sandhu) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) के सिंडिकेट की ओर से इस हमले की जिम्मेदारी ली।
हमले के तुरंत बाद हरकत में आई मुंबई क्राइम ब्रांच, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त अंतर-राज्यीय अभियान छेड़ते हुए महज 72 घंटों के भीतर इस हमले के पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। राजस्थान के कोटा से भाग रहे तीन मुख्य शूटरों को दबोचे जाने के बाद, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हरियाणा के सोनीपत और दिल्ली से हथियार सप्लाई करने वाले मॉड्यूल के चार सदस्यों जिनमें दो युवतियां भी शामिल हैं को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि शूटरों ने टाइगर श्रॉफ पर हमला करने से पहले बांद्रा में अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) के आवास ‘गैलेक्सी अपार्टमेंट्स’ (Galaxy Apartments) की रेकी की थी।
प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया व्लॉगर्स के फुटेज के अनुसार, फायरिंग इतनी अप्रत्याशित थी कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। हमलावरों ने सीधे अभिनेता की सीट की दिशा में गोलीबारी की। शीशा टूटने और चालक फिरदौस के हाथ से खून बहने के बावजूद टाइगर श्रॉफ ने अदम्य साहस दिखाते हुए ड्राइवर को सहारा दिया और गाड़ी को खुद नियंत्रित कर सुरक्षित दूरी पर ले गए।
चालक फिरदौस को विले पार्ले स्थित नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को खतरे से बाहर बताया है।
पास में मौजूद 35 वर्षीय व्लॉगर/नागरिक उमेश चौहान को भी गोली/छर्रे लगे, जिनका कूपर अस्पताल में ऑपरेशन कर गोली निकाली गई और अब वे स्थिर हैं। डॉक्टरों के अनुसार टाइगर श्रॉफ को गनपाउडर के मामूली बर्न और कांच की खरोंचें आई हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।
मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला अनिल पंडित लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का बेहद करीबी सिपहसालार है। पिछले दो वर्षों से वह अमेरिका (USA) में बैठकर भारत में रंगदारी और टारगेट किलिंग के नए लड़कों (फुट सोल्जर्स) की भर्ती और हथियार प्रबंधन संभाल रहा है। पंजाब का कुख्यात गैंगस्टर, जो फर्जी पासपोर्ट पर कनाडा/यूरोप भाग गया था। वह विदेश से फंड ट्रांसफर और सुरक्षित इंटरनेट कॉल्स (Signal/Session Apps) के जरिए भारत में वारदातों की योजना बनाता है।
जुहू में टाइगर श्रॉफ पर हुआ यह हमला केवल एक बॉलीवुड सेलिब्रिटी पर की गई गोलीबारी नहीं है, बल्कि यह भारत की कानून-व्यवस्था, संघीय जांच एजेंसियों और पुलिस तंत्र के लिए एक खुला रेड अलर्ट है। लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट आज केवल जेल की सलाखों तक सीमित स्थानीय गिरोह नहीं रहा, बल्कि यह कनाडा, अमेरिका और यूरोप के सुरक्षित ठिकानों से संचालित होने वाला एक ‘ट्रांस-नेशनल क्राइम नेटवर्क’ बन चुका है।
जिस तरह से कम उम्र के लड़कों और पहली बार अपराध में शामिल युवतियों का उपयोग करके, सोशल मीडिया ऐप के जरिए बिना एक-दूसरे को जाने वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है, वह जांच एजेंसियों के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती है। मुंबई पुलिस द्वारा 15 विशेष टीमों का गठन, राजस्थान से शूटरों की त्वरित गिरफ्तारी और दिल्ली पुलिस द्वारा हथियार सप्लाई चेन का भंडाफोड़ यह संकेत देता है कि सुरक्षा बल बैकफुट पर नहीं हैं। किंतु इस आतंक का स्थायी समाधान केवल शूटरों को पकड़ने से नहीं निकलेगा; इसके लिए विदेश में बैठे अनिल पंडित और हरमन संधू जैसे आकाओं का प्रत्यर्पण (Extradition) और जेलों के भीतर से चल रहे 5G नेटवर्क की रीढ़ तोड़ना अनिवार्य होगा।



