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हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी भारतीय महिला क्रिकेट की कप्तानी: एक स्वर्णिम युग का भावनात्मक पटाक्षेप
155 टी20I, 2025 वनडे विश्व कप खिताब और बैक-टू-बैक एशियाई खेलों के गोल्ड के बाद कहा—'कप्तानी का अंत, मगर खेल का प्रेम और सफर जारी रहेगा'

भारतीय महिला क्रिकेट के आधुनिक इतिहास में निडरता, आक्रामकता और वैश्विक दबदबे की पहचान बन चुकीं स्टार ऑलराउंडर हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) ने मंगलवार को भारतीय महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सभी तीनों प्रारूपों (टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 अंतरराष्ट्रीय) की कप्तानी से तत्काल प्रभाव से हटने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। 37 वर्षीय अनुभवी क्रिकेटर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को भेजे एक अत्यंत भावुक पत्र के माध्यम से इस युगांतरकारी निर्णय की पुष्टि की।
हरमनप्रीत कौर का यह इस्तीफा आईची-नागोया 2026 एशियाई खेलों में श्रीलंका को 147 रनों से रौंदकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा लगातार दूसरा एशियाई खेल स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतने के ठीक दो सप्ताह बाद सामने आया है। अपने दस वर्ष लंबे कप्तानी काल के दौरान भारत को 2025 में घरेलू सरजमीं पर पहला ऐतिहासिक महिला वनडे विश्व कप (ICC Women’s ODI World Cup) जिताने वाली ‘हरमन’ ने कहा कि उन्होंने इस टीम को अपना लहू, पसीना और सब कुछ दिया है। वे अब अपने करियर के अगले चरण में बिना किसी नेतृत्व दबाव के एक विशुद्ध खिलाड़ी के रूप में केवल खेल के प्रति अपने शुद्ध प्रेम के लिए खेलना चाहती हैं।
“आज मैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सभी प्रारूपों की कप्तानी से पदमुक्त हो रही हूं। यह निर्णय लेना मेरे जीवन का सबसे कठिन क्षण था। इसमें वर्षों की अनगिनत यादें, भावनाएं, त्याग और वे अनमोल पल जुड़े हैं जो मेरी सांसों में जीवन भर जीवित रहेंगे।
मैं आज पूरी आंतरिक शांति (Peace) और भरे हुए दिल के साथ यह पद छोड़ रही हूं। क्योंकि मेरा सच्चा विश्वास है कि मेरी टीम आज एक बहुत अच्छी और सशक्त स्थिति में है। एक ऐसी टीम जिसमें प्रतिभा, चरित्र, आत्मविश्वास और एक स्वर्णिम भविष्य है, जिसे देखने और जिसका हिस्सा बने रहने के लिए मैं बेहद उत्साहित हूं।
मुझे लगता है कि मैंने अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाया है। मैंने इस टीम को वह सब कुछ दिया जो मेरे पास था। मैंने इस जिम्मेदारी को गर्व और सम्मान के साथ ढोया। अब पन्ना पलटने का समय आ गया है।
हर साथी खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ, बीसीसीआई, मेरे परिवार और हर एक प्रशंसक का धन्यवाद, जो मेरे उतार-चढ़ाव में मेरे साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। रक्त, पसीना, त्याग और गर्व मैंने सब कुछ न्योछावर किया। अब मैं फिर से केवल खेल के प्रति अपने शुद्ध प्रेम के लिए खेलने को तैयार हूं। कप्तानी का अंत होता है, लेकिन भारतीय क्रिकेट का मेरा सफर जारी रहेगा।”
हरमनप्रीत कौर ने जब 2016 में मिताली राज से भारतीय टी20 टीम की कमान संभाली थी, तब भारतीय महिला क्रिकेट अपनी पहचान और संसाधनों की तलाश में था। 2022 में मिताली के संन्यास के बाद वे तीनों प्रारूपों की बॉस बनीं। इस एक दशक में उन्होंने भारतीय क्रिकेट को दुनिया की सबसे घातक इकाइयों में बदल दिया:
हरमनप्रीत के कप्तानी करियर का सबसे शिखर बिंदु 2025 में आया, जब भारत की धरती पर खेले गए आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को धूल चटाकर अपना पहला 50-ओवर का विश्व कप जीता। कपिल देव (1983) और महेंद्र सिंह धोनी (2011) के बाद भारत को 50-ओवर का विश्व कप जिताने वाली वे देश की केवल तीसरी और पहली महिला कप्तान बनीं।
हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने महाद्वीपीय स्तर पर अपना दबदबा कभी कम नहीं होने दिया। 2022 हांगझोउ एशियाई खेलों में श्रीलंका को हराकर भारत ने पहला गोल्ड जीता था। ठीक चार साल बाद, सितंबर 2026 में आईची-नागोया एशियाई खेलों के फाइनल में भारत ने श्रीलंका को 147 रनों के विशाल अंतर से रौंदकर अपने स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव किया। यह खिताबी मुकाबला बतौर कप्तान उनका अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ।
हरमनप्रीत कौर दुनिया की एकमात्र ऐसी क्रिकेटर (महिला या पुरुष दोनों श्रेणियों में) हैं, जिन्होंने 150 से अधिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपनी राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है। उन्होंने 155 मैचों में 93 जीत दर्ज कीं। उनके नेतृत्व में भारत 2020 टी20 विश्व कप के फाइनल (मेलबर्न) और 2018 व 2023 के सेमीफाइनल तक पहुंचा। टी20I में कप्तान के तौर पर उन्होंने 3,416 रन भी बनाए।
जब बीसीसीआई ने महिला टेस्ट क्रिकेट को पुनर्जीवित किया, तो हरमनप्रीत ने 5 टेस्ट मैचों में भारत का नेतृत्व किया। इनमें से 4 टेस्ट मैचों में भारत ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीमों को करारी शिकस्त दी और केवल 1 मैच गंवाया। टेस्ट क्रिकेट में 80% जीत का यह आंकड़ा किसी भी भारतीय कप्तान का सर्वकालिक रिकॉर्ड है। बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में जब महिला क्रिकेट का ऐतिहासिक डेब्यू हुआ, तो हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल खेलकर रजत पदक जीता। इसके अलावा, उन्होंने भारत को 2012, 2016, 2022 और 2026 में चार बार महिला टी20 एशिया कप का चैंपियन बनाया।
हरमनप्रीत मैदान पर कभी अपनी भावनाएं छिपाने वाली कप्तान नहीं रहीं। चाहे 2023 में ढाका में खराब अंपायरिंग के खिलाफ स्टंप्स पर बल्ला मारना हो या कठिन परिस्थितियों में साथी खिलाड़ियों को बाउंड्री से प्रेरित करना उनका आक्रामक रवैया हमेशा टीम के लिए ढाल बनकर खड़ा रहा। शेफाली वर्मा, ऋचा घोष, श्रेयंका पाटिल और काशवी गौतम जैसी युवा पावर-हिटर्स को बिना किसी डर के खुलकर खेलने की आजादी हरमनप्रीत के नेतृत्व की सबसे बड़ी खूबी रही।
कप्तानी के रणनीतिक दबाव, प्रेस कॉन्फ्रेंस और चयन बैठकों के तनाव के कारण हरमनप्रीत का अपना स्वाभाविक आक्रामक खेल प्रभावित हो रहा था। 37 वर्ष की आयु में वे अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के अंतिम 3-4 वर्षों को एक विशुद्ध मैच-विनर बल्लेबाज के रूप में जीना चाहती हैं, जैसा सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली ने कप्तानी छोड़ने के बाद किया। अधिकांश भारतीय कप्तानों को किसी बड़ी सीरीज में हार या विवाद के बाद कप्तानी से हटाया जाता रहा है। लेकिन हरमनप्रीत ने विश्व कप 2025 की ऐतिहासिक खिताबी जीत और 2026 के एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने के तुरंत बाद पद छोड़कर एक अद्वितीय गरिमा और मिसाल कायम की है। उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा, “मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे जूतों में पैर रखने का दबाव महसूस करे। मैं चाहती हूं कि नया कप्तान अपनी पहचान, अपनी कार्यशैली और अपनी विरासत बनाए। हमारे पास नेतृत्व करने में सक्षम कई असाधारण खिलाड़ी हैं।”
30 वर्षीय स्टार सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना का तीनों प्रारूपों में भारत का नया कप्तान बनना औपचारिकता मात्र रह गया है। मंधाना पिछले कई वर्षों से हरमनप्रीत की उप-कप्तान रही हैं और उन्होंने घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कप्तानी का उत्कृष्ट कौशल दिखाया है। महिला प्रीमियर लीग (WPL) में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) को चैंपियन बनाकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि वे बड़े मैचों के दबाव को आसानी से संभाल सकती हैं।
ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा को नए चक्र में उप-कप्तानी की प्रबल दावेदार माना जा रहा है, जबकि जेमिमा रोड्रिग्स को भविष्य की कोर लीडरशिप टीम में शामिल किया जाएगा।
हरमनप्रीत कौर के इस्तीफे के बाद दुनिया भर के वर्तमान और पूर्व क्रिकेटरों ने उनके योगदान को सराहा:
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बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी: “हरमनप्रीत कौर ने भारतीय महिला क्रिकेट को उस मुकाम पर पहुंचाया है जिसकी कल्पना दो दशक पहले मुश्किल थी। 2025 का एकदिवसीय विश्व कप खिताब और 155 टी20 मैचों में उनका नेतृत्व भारतीय खेल इतिहास में सदैव स्वर्णिम अक्षरों में याद किया जाएगा। हम उनके निर्णय का पूरा सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे एक बल्लेबाज के तौर पर कई और रिकॉर्ड तोड़ेंगी।”
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स्मृति मंधाना: “हरमन दी ने हमें सिखाया कि दुनिया की सबसे बड़ी टीमों के खिलाफ कैसे सीना तानकर खड़ा हुआ जाता है। वे सिर्फ एक कप्तान नहीं, बल्कि हमारी मार्गदर्शक थीं। उनके इस निर्णय से हम भावुक हैं, लेकिन मैदान पर उनके साथ बल्लेबाजी करने का रोमांच पहले जैसा ही रहेगा।”
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पूर्व कप्तान मिताली राज: “कप्तानी का ताज हमेशा कांटों भरा होता है। हरमन ने इस जिम्मेदारी को अद्वितीय आक्रामकता और गर्व के साथ निभाया। एक विश्व चैंपियन कप्तान के रूप में पद छोड़ना उनकी महानता को दर्शाता है।”
हरमनप्रीत कौर का कप्तानी से हटना भारतीय महिला क्रिकेट में एक ऐतिहासिक युग के समापन का प्रतीक है। वे केवल टॉस के लिए जाने वाली या फील्ड सजाने वाली कप्तान नहीं थीं; वे मैदान पर उतरकर अपने खून-पसीने से मैच का नक्शा बदलने वाली सेनापति थीं। 2016 में जिस टीम को दुनिया अक्सर एक उभरती हुई शक्ति मानती थी, 2026 में जब वे कप्तानी छोड़ रही हैं तो वह टीम वनडे की विश्व चैंपियन और एशिया की निर्विवाद सिरमौर बन चुकी है।
अब जब उनके कंधों से कप्तानी का भारी बोझ उतर चुका है, तो विश्व क्रिकेट उस ‘अनचेन्ड हरमनप्रीत कौर’ को देखने के लिए सांसें थामे इंतजार कर रहा है, जो बिना किसी झिझक या रणनीतिक दबाव के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने के लिए जानी जाती है। मोगा की इस बेटी ने अपने देश का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है, और एक खिलाड़ी के रूप में उनकी यात्रा अभी कई और स्वर्णिम अध्यायों की गवाह बनेगी।



