नेपाल के लोकतंत्र में ऐतिहासिक उदय: पहली ट्रांसजेंडर सांसद भूमिका श्रेष्ठ और ‘नया नेपाल’ का विजन
राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और 2026 का राजनीतिक परिदृश्य

मार्च 2026 में नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी क्षण तब आया जब सुप्रसिद्ध एलजीबीटीक्यू+ (LGBTQ+) अधिकार कार्यकर्ता भूमिका श्रेष्ठ (Bhumika Shrestha) को देश की पहली ट्रांसजेंडर महिला सांसद (MP) के रूप में घोषित किया गया। निर्वाचन आयोग ने पुष्टि की कि 37 वर्षीय भूमिका को राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की ओर से ‘समानुपातिक प्रतिनिधित्व’ (Proportional Representation) प्रणाली के तहत चुना गया है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं है, बल्कि यह नेपाल के उन 9 लाख से अधिक यौनिक और लैंगिक अल्पसंख्यकों के लिए ‘न्याय और दृश्यता’ (Visibility) की एक बड़ी घोषणा है, जो दशकों से मुख्यधारा की राजनीति से बाहर रहे हैं।
भूमिका श्रेष्ठ का जन्म 11 जनवरी 1988 को काठमांडू के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। जन्म के समय उन्हें ‘पुरुष’ लिंग आवंटित किया गया था, लेकिन बचपन से ही उन्हें अपनी पहचान को लेकर गहन आंतरिक द्वंद्व का सामना करना पड़ा। स्कूल के दिनों में उन्हें मेकअप और पारंपरिक ‘स्त्रीलिंग’ गतिविधियों में रुचि के कारण भारी बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्हें लड़कों की तरह रहने और बात करने के लिए मजबूर किया गया, जिससे वे गहरे मानसिक आघात (Trauma) से गुज़रीं।
जब वे 10वीं कक्षा में थीं, तो अपनी लैंगिक पहचान को स्पष्ट करने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। हालांकि इसने उनकी औपचारिक शिक्षा में बाधा डाली, लेकिन इसी घटना ने उन्हें अपने समुदाय के लिए लड़ने का साहस दिया। उन्होंने अपने जीवन के इन उतार-चढ़ावों को “भूमिका: तेस्रो लिंगीको आत्मकथा” (Bhumika: Tisro Lingiko Atmakatha) नामक पुस्तक में संजोया है, जो 2018 में प्रकाशित हुई। यह पुस्तक नेपाल में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के दर्द और जीत का एक प्रामाणिक दस्तावेज है।
भूमिका ने 2007 से ही ब्लू डायमंड सोसाइटी (BDS) के साथ जुड़कर सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया। 2007 में नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक फैसले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी जिसने ‘अन्य’ (Others) श्रेणी के तहत नागरिकता की अनुमति दी। वे ‘अन्य’ श्रेणी के पासपोर्ट पर विदेश यात्रा करने वाली पहली नेपाली नागरिक बनीं। 2021 में उन्होंने एक और व्यक्तिगत और कानूनी जीत हासिल की जब उन्होंने अपनी नागरिकता को ‘अन्य’ से बदलकर आधिकारिक तौर पर ‘महिला’ (Female) करवाया। उनके अनवरत प्रयासों के लिए अमेरिकी विदेश विभाग ने उन्हें 2022 में ‘इंटरनेशनल वुमन ऑफ करेज’ (IWOC) पुरस्कार से सम्मानित किया। वे यह पुरस्कार जीतने वाली दूसरी नेपाली नागरिक हैं।
भूमिका श्रेष्ठ का चयन नेपाल की राजनीति में आए उस ‘भूकंप’ का हिस्सा है जिसने पुरानी पार्टियों की जड़ों को हिला दिया है। पूर्व रैपर और काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह (Balen Shah) के नेतृत्व वाली RSP ने 2026 के चुनावों में 182 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है। RSP ने पारंपरिक ‘जाति और वर्ग’ की राजनीति के बजाय ‘योग्यता और समावेशिता’ को प्राथमिकता दी। भूमिका का चयन इसी ‘नया नेपाल’ विजन का प्रमाण है। नेपाल की मिश्रित निर्वाचन प्रणाली के तहत भूमिका का चयन जनजातीय (Janajati) और महिला कोटे के अंतर्गत हुआ, जिससे संसद में विविधता सुनिश्चित हुई।
सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद भूमिका ने अपने संकल्पों को स्पष्ट कर दिया है नेपाल का 2015 का संविधान लैंगिक अल्पसंख्यकों को अधिकार तो देता है, लेकिन व्यावहारिक कानूनों की कमी के कारण वे अभी भी कागजों तक सीमित हैं। भूमिका का लक्ष्य इन्हें प्रभावी कानूनों में बदलना है। 2023 में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बावजूद, समलैंगिक और ट्रांसजेंडर विवाहों के पंजीकरण में अभी भी प्रशासनिक बाधाएं हैं। भूमिका इसे स्थायी कानूनी ढांचा प्रदान करना चाहती हैं।
वे ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में विशेष अवसर सुनिश्चित करने के लिए ‘समावेशी प्रतिनिधित्व विधेयक’ लाना चाहती हैं। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए ‘हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी’ (HRT) और ‘जेंडर अफर्मिंग सर्जरी’ (GAS) को सरकारी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।
भूमिका श्रेष्ठ की जीत ने नेपाल को वैश्विक स्तर पर एक प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी ट्रांसजेंडर अधिकार तो हैं, लेकिन नेपाल ने उन्हें ‘कानून-निर्माता’ (Lawmaker) के रूप में स्वीकार कर एक नई मिसाल पेश की है। 9 लाख से अधिक यौनिक अल्पसंख्यकों के लिए भूमिका अब एक ऐसी आवाज हैं जो बंद कमरों के बजाय सीधे ‘सिंह दरबार’ (नेपाल का सचिवालय) में गूँजेगी।
हालांकि भूमिका का चयन ऐतिहासिक है, लेकिन उनकी राह आसान नहीं है नेपाल के कुछ पारंपरिक और धार्मिक समूह अभी भी इस बदलाव को स्वीकार करने में संकोच कर रहे हैं। नागरिकता, संपत्ति के अधिकार और पारिवारिक कानूनों में बदलाव करना एक लंबी और जटिल विधायी प्रक्रिया है।
भूमिका श्रेष्ठ का नेपाल की प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में पहुँचना यह साबित करता है कि लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति की भागीदारी का नाम है। “मेरा दर्द, मेरी कहानी और मेरी समस्या केवल मैं ही समझ सकती हूँ, कोई और नहीं,” भूमिका के ये शब्द अब नेपाल की नीतियों का आधार बनेंगे। जैसे ही वे संसद की सीढ़ियां चढ़ेंगी, वे अपने साथ सदियों के अपमान और भेदभाव को पीछे छोड़ते हुए एक ‘समान और समावेशी नेपाल’ की नई नींव रखेंगी।


