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डॉ. नीता अंबानी का मानवतावादी विजन: कलिंगा संस्थान (KIIT) में मानद डॉक्टरेट और ‘सेवा’ का वैश्विक आह्वान

शांति और करुणा: अशांत विश्व के लिए भारत का 'हीलिंग टच'

21 मार्च, 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) का दीक्षांत समारोह परिसर न केवल शैक्षणिक उल्लास से भरा था, बल्कि एक गहरे दार्शनिक चिंतन का गवाह भी बना। रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) की सदस्य डॉ. नीता अंबानी को शिक्षा, समाज सेवा, खेल और संस्कृति के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए ‘मानद डॉक्टरेट’ (Honorary Doctorate) की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस प्रतिष्ठित मंच से डॉ. अंबानी ने जो संबोधन दिया, वह केवल एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि वह “नूतन भारत” का एक सांस्कृतिक और नैतिक घोषणापत्र था। उन्होंने ‘सेवा’, ‘शांति’ और ‘करुणा’ को आधुनिक प्रगति का अनिवार्य हिस्सा बताया।

कलिंगा संस्थान (KIIT) और इसके संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने डॉ. अंबानी को यह सम्मान देते हुए उनके उस विजन को सराहा, जो “अंत्योदय” (अंतिम व्यक्ति का उदय) और “समग्र विकास” पर आधारित है। डॉ. अंबानी ने रिलायंस फाउंडेशन के माध्यम से ‘शिक्षा और खेल सबके लिए’ (Education and Sports for All – ESA) पहल शुरू की है। उन्होंने माना कि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मस्तिष्क और एक विकसित राष्ट्र का निवास होता है। डॉ. अंबानी का ओडिशा के साथ गहरा नाता रहा है, विशेषकर राज्य में खेलों के बुनियादी ढांचे को विकसित करने और आपदा राहत कार्यों में। KIIT द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना इस अटूट रिश्ते की एक नई कड़ी है।

अपने संबोधन की शुरुआत में डॉ. अंबानी ने ‘सेवा’ शब्द की गहन व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि एक ‘संस्कार’ है। उन्होंने कहा कि धन देना सरल है, लेकिन अपना समय, संवेदना और ऊर्जा किसी के उत्थान में लगाना ही वास्तविक सेवा है।

उन्होंने साझा किया कि रिलायंस फाउंडेशन की स्थापना के पीछे का मूल विचार ही ‘सेवा’ था। चाहे वह ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ वैन चलाना हो या किसानों को सशक्त बनाना, हर कदम के पीछे ‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ का दर्शन रहा है। उन्होंने कोविड-19 काल के दौरान भारतीय समाज की एकजुटता का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक-दूसरे की सेवा करने के भाव ने देश को सबसे बड़े संकट से उबारा।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, जहाँ युद्ध, संघर्ष और वैचारिक मतभेद चरम पर हैं, डॉ. अंबानी का संदेश ‘शांति’ (Peace) और ‘करुणा’ (Compassion) पर केंद्रित रहा। उन्होंने तर्क दिया कि भारत की आत्मा में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (दुनिया एक परिवार है) का भाव समाहित है। उन्होंने कहा, “भारत केवल अपनी आर्थिक प्रगति के लिए नहीं पहचाना जाना चाहिए; भारत वह शक्ति है जो दुनिया के घावों को भरने (Healing) और मानवता को जोड़ने की क्षमता रखती है।” उन्होंने युवाओं को तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में भी मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने की सलाह दी। उन्होंने जोर दिया कि मशीनें गणना कर सकती हैं, लेकिन वे करुणा महसूस नहीं कर सकतीं यही मनुष्य की वास्तविक श्रेष्ठता है।

डॉ. अंबानी ने KIIT के हजारों स्नातक छात्रों की आंखों में देखते हुए एक बहुत ही शक्तिशाली और मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल भारत का भविष्य ही नहीं, बल्कि “दुनिया की अंतरात्मा” (Conscience of the World) को आकार देना है। उनके अनुसार, 21वीं सदी के युवा को केवल ‘कौशल’ (Skill) हासिल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे एक ‘नैतिक नेता’ (Ethical Leader) बनना चाहिए।

उन्होंने आह्वान किया कि युवा ऐसे नवाचार (Innovations) करें जो न केवल मुनाफा कमाएं, बल्कि गरीबी और असमानता को भी खत्म करें। उन्होंने युवाओं से कहा, “सपनों को बड़ा देखें, लेकिन उन सपनों में दूसरों की भलाई को कभी न भूलें। जब आपके सपने सामूहिक कल्याण से जुड़ते हैं, तो ब्रह्मांड उन्हें पूरा करने में आपकी मदद करता है।”

डॉ. अंबानी ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दशकों में भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा, लेकिन यह नेतृत्व ‘सत्ता’ का नहीं, बल्कि ‘सहयोग’ का होगा। उन्होंने योग, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन को वैश्विक एकता के उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत की सॉफ्ट पावर ही दुनिया को एक सूत्र में पिरोएगी। उन्होंने विशेष रूप से युवा महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि एक सशक्त महिला न केवल अपने परिवार को, बल्कि पूरे समाज की दिशा बदल देती है। उन्होंने समावेशी विकास की वकालत की जहाँ कोई भी पीछे न छूटे।

विषय डॉ. अंबानी का दृष्टिकोण
वास्तविक सफलता सफलता का पैमाना वह नहीं है जो आपने कमाया है, बल्कि वह है जो आपने लौटाया (Give back) है।
भारत की भूमिका भारत दुनिया को एकता और उपचार (Unity and Healing) का संदेश देने वाला अग्रदूत बनेगा।
शिक्षा शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सेवा के प्रति समर्पण है।
खेल और एकता खेल हमें हारना और जीतना ही नहीं, बल्कि एक साथ मिलकर लड़ना सिखाते हैं।

अपने संबोधन के समापन में डॉ. अंबानी ने एक ‘नूतन भारत’ की तस्वीर पेश की। एक ऐसा भारत जो तकनीकी रूप से उन्नत हो, आर्थिक रूप से संपन्न हो, लेकिन साथ ही आध्यात्मिक रूप से जागृत और मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत हो। उन्होंने युवाओं से तीन प्रतिज्ञाएं करने को कहा अपने कार्यों में हमेशा ईमानदार रहना। दूसरों के दर्द को अपना समझना। ज्ञान की खोज कभी बंद न करना।

KIIT के मंच से डॉ. नीता अंबानी का संदेश केवल एक भाषण नहीं था, बल्कि वह एक ‘कॉल टू एक्शन’ था। उन्होंने यह साबित किया कि जब शक्ति और विनम्रता, धन और करुणा, तथा आधुनिकता और परंपरा का संगम होता है, तभी एक वास्तविक ‘परिवर्तनकारी व्यक्तित्व’ का जन्म होता है।

डॉ. अंबानी को मिली ‘मानद डॉक्टरेट’ केवल उनके व्यक्तिगत कार्यों का सम्मान नहीं है, बल्कि यह उस ‘भारतीयता’ का सम्मान है जो सेवा को ही ईश्वर मानती है। उनके शब्दों ने प्रत्येक छात्र के मन में यह विश्वास जगाया कि वे केवल एक पेशेवर (Professional) बनकर बाहर नहीं जा रहे हैं, बल्कि वे उस भारत के दूत (Ambassador) हैं जो दुनिया को शांति, करुणा और एकता का रास्ता दिखाएगा।

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