अर्थव्यवस्थाराष्ट्रीय

भारत की ऊर्जा सुरक्षा: पश्चिम एशिया संकट के बीच ‘स्थिरता का द्वीप’

प्रधानमंत्री मोदी की 7 प्रमुख अपीलें: 'राष्ट्र प्रथम' का आह्वान

11 मई, 2026 को भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक उच्च-स्तरीय आश्वासन जारी किया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच सीधे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजारों में आई अस्थिरता के बावजूद, भारत ने स्वयं को सुरक्षित घोषित किया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार है और देश में किसी भी प्रकार की “राशनिंग” या कमी की स्थिति नहीं आने दी जाएगी।

अनौपचारिक मंत्रियों के समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, में देश के वर्तमान स्टॉक की समीक्षा की गई। भारत ने वैश्विक संकट को देखते हुए ‘रोलिंग स्टॉक’ (Rolling Stock) की एक मजबूत व्यवस्था की है भारत के पास वर्तमान में 60 दिनों का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है। इसमें सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) और रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक शामिल है।

गैस का भंडार भी 60 दिनों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। घरेलू उपयोग के लिए 45 दिनों का निरंतर स्टॉक (Rolling Stock) बनाए रखा जा रहा है। पिछले तीन दिनों में ही 1.14 करोड़ बुकिंग के मुकाबले 1.26 करोड़ सिलेंडर डिलीवर किए गए हैं। देश की रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता (Optimum Capacity) पर काम कर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देशभर के किसी भी पेट्रोल पंप पर “ड्राई-आउट” (ईंधन खत्म होने) की कोई रिपोर्ट नहीं है।

पश्चिम एशिया युद्ध के पिछले 70 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है (ब्रेंट क्रूड लगभग $109 प्रति बैरल)। कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 30% से 70% तक बढ़ गई हैं, लेकिन भारत में स्थिति अलग है भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जहाँ पिछले 70+ दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

इस स्थिरता को बनाए रखने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) प्रति दिन लगभग ₹1,000 करोड़ से ₹1,200 करोड़ का घाटा (Under-recoveries) सह रही हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही (Q1) में तेल कंपनियों का कुल घाटा ₹2 लाख करोड़ तक पहुँच सकता है। सरकार इस बोझ को जनता पर डालने के बजाय स्वयं वहन कर रही है ताकि मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित रखा जा सके।

10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से एक “स्वैच्छिक योगदान” की अपील की। यह अपील ईंधन की कमी के कारण नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक रणनीतिक कदम है कंपनियों से आग्रह किया गया है कि वे हाइब्रिड या पूर्ण रिमोट वर्किंग मॉडल अपनाएं ताकि रोजमर्रा के आवागमन में होने वाले ईंधन खर्च को कम किया जा सके।

मेट्रो, बसों और साइकिल का अधिक प्रयोग करें। छोटी दूरियों के लिए पैदल चलने या कारपूलिंग को प्राथमिकता दें। अनावश्यक विदेशी छुट्टियों और अंतरराष्ट्रीय शादियों को अगले एक साल के लिए टालने का सुझाव दिया गया है ताकि कीमती विदेशी मुद्रा (Forex) की बचत हो सके। इसके बजाय घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही गई। परिवारों से अपील की गई है कि वे कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें, क्योंकि सोने का आयात भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डालता है।

भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसमें सूक्ष्म कमी भी बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा बचा सकती है।उर्वरक आयात के बोझ को कम करने के लिए किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांडों का समर्थन करें।

उत्पाद / क्षेत्र वर्तमान स्थिति (मई 2026) टिप्पणी
विदेशी मुद्रा भंडार $703 बिलियन अत्यंत सुरक्षित और आरामदायक स्थिति
कच्चा तेल भंडार 60 दिन रणनीतिक और रिफाइनरी स्टॉक शामिल
एलपीजी स्टॉक 45 दिन निर्बाध आपूर्ति जारी
उर्वरक उपलब्धता 199.65 LMT खरीफ 2026 की जरूरत का 51% पहले से उपलब्ध
प्रति दिन तेल घाटा ₹1,000-1,200 करोड़ जनता को मूल्य वृद्धि से बचाने के लिए

भारत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में होने वाली हलचल पर बारीकी से नजर रख रहा है, जहाँ से भारत का लगभग 60-80% कच्चा तेल गुजरता है। भारतीय नौसेना ने पिछले 67 दिनों में संघर्ष क्षेत्र से गुजरने वाले 14 भारतीय ऊर्जा जहाजों को सुरक्षा प्रदान की है। भारत अब अमेरिका से वार्षिक 2.2 मिलियन टन एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।

भारत सरकार का संदेश स्पष्ट है: “घबराने की कोई जरूरत नहीं है।” वर्तमान में देश के पास ईंधन का विशाल भंडार है और आपूर्ति तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। प्रधानमंत्री मोदी की संरक्षण की अपील ‘कमी’ का संकेत नहीं, बल्कि ‘दूरदर्शिता’ का परिचायक है। यह भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में और अधिक आत्मनिर्भर और लचीला (Resilient) बनाने की एक सामूहिक कोशिश है। नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस ‘ओएसिस ऑफ कंफर्ट’ (Oasis of Comfort) को बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी से ऊर्जा का उपभोग करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button