ईरान का महासंकट: अयातुल्ला खामेनेई का अंत और मध्य पूर्व के नए भूगोल की आहट
40 दिनों का शोक और ईरानी समाज की प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु की खबर, जो कथित तौर पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों का परिणाम है, 21वीं सदी की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक घटनाओं में से एक है। यह केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं है, बल्कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान द्वारा अपनाई गई कट्टरपंथी विचारधारा और उसके ‘प्रतिरोध के धुरी’ (Axis of Resistance) के स्तंभ का ढहना है। ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान पर हुए इन भीषण हमलों ने न केवल शासन के प्रमुख को, बल्कि उनके पूरे परिवार और सैन्य पारिस्थितिकी तंत्र को तहस-नहस कर दिया है।
जब तेहरान के आसमान में शनिवार की रात मिसाइलों की गूँज सुनाई दी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह आधुनिक ईरान के इतिहास का सबसे निर्णायक मोड़ साबित होगा। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से चर्चित इस कार्रवाई ने ईरान के उस अभेद्य सुरक्षा कवच को भेद दिया, जिसे अयातुल्ला अली खामेनेई ने पिछले 37 वर्षों में तैयार किया था। ईरान द्वारा 40 दिनों के शोक की घोषणा और ‘फार्स न्यूज’ द्वारा परिवार के सदस्यों की मृत्यु की पुष्टि ने इस त्रासदी की गहराई को स्पष्ट कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में किए गए इस हमले को सैन्य इतिहास की सबसे सटीक और घातक कार्रवाई माना जा रहा है। खुफिया जानकारी के अनुसार, अयातुल्ला खामेनेई तेहरान के पास एक विशेष रूप से निर्मित बंकरनुमा परिसर में थे। इजरायली वायुसेना के F-35 लड़ाकू विमानों और अमेरिकी लंबी दूरी की मिसाइलों ने इस परिसर को निशाना बनाया। हमले में ‘बंकर बस्टर’ बमों का उपयोग किया गया, जो जमीन के कई मीटर नीचे जाकर विस्फोट करने में सक्षम हैं। इसी कारण खामेनेई का वह सुरक्षित ठिकाना भी उन्हें नहीं बचा सका, जिसे परमाणु हमलों को झेलने के लिए बनाया गया था।
यह हमला केवल एक सैन्य लक्ष्य तक सीमित नहीं था। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले ने खामेनेई के वंश और उनके करीबी सहयोगियों को भी मिटा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई की बेटी, उनके दामाद और उनके पोते की इस हमले में मौत हो गई। बाद में उनकी पत्नी मंसूरेह खोजस्तेह के निधन की खबर ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह हमला व्यक्तिगत रूप से अयातुल्ला के पूरे परिवार को समाप्त करने के उद्देश्य से किया गया था। हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई शीर्ष कमांडर भी मारे गए। यह ईरान की सैन्य निर्णय लेने वाली मशीनरी के लिए एक ऐसा आघात है जिससे उबरने में उसे दशक लग सकते हैं।
ईरान में ’40 दिन के शोक’ की घोषणा का गहरा धार्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व है। शिया इस्लाम में मृत्यु के 40वें दिन (अर्बईन) का महत्व ‘शहादत’ के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। सरकार इस समय का उपयोग जनता की सहानुभूति बटोरने और उन्हें अमेरिका व इजरायल के खिलाफ एकजुट करने के लिए करना चाहती है। हालांकि सरकार शोक मना रही है, लेकिन ईरान की सड़कों पर स्थिति जटिल है। ‘वीमेन, लाइफ, फ्रीडम’ जैसे आंदोलनों से जुड़े लोग इस घटना को “तानाशाही से मुक्ति” के रूप में देख रहे हैं। ईरान आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां दुख और गुप्त जश्न के बीच एक पतली लकीर है।
अयातुल्ला खामेनेई केवल एक नेता नहीं थे; वे ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था के अंतिम मध्यस्थ थे। उनके जाने के बाद अनुच्छेद 111 के तहत एक परिषद सत्ता संभालेगी, लेकिन स्थायी उत्तराधिकारी का चयन करना अत्यंत कठिन होगा। 88 सदस्यीय यह परिषद अब नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करेगी। संभावित उम्मीदवारों में अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी या मोजतबा खामेनेई (यदि वे जीवित हैं) के नाम हो सकते हैं, लेकिन विदेशी हमले में मारे जाने के कारण पूरी प्रक्रिया में अराजकता की संभावना है। संभावना है कि IRGC सत्ता के हस्तांतरण की प्रतीक्षा करने के बजाय सीधे नियंत्रण अपने हाथ में ले ले, जिससे ईरान एक पूर्ण ‘सैन्य तानाशाही’ में तब्दील हो सकता है।
खामेनेई लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूतियों, और गाजा के हमास के मुख्य संरक्षक थे। उनकी मृत्यु से इन समूहों को मिलने वाली वित्तीय और रणनीतिक सहायता पर संकट खड़ा हो गया है। लेबनान में हिजबुल्लाह अब बिना किसी बड़े मार्गदर्शक के रह गया है। इससे इजरायल को अपने उत्तरी मोर्चे पर बड़ी बढ़त मिल सकती है। इस घटना के तुरंत बाद वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में 15% से अधिक का उछाल देखा गया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का डर है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम उनकी “मैक्सिमम प्रेशर” (Maximum Pressure) नीति का चरम बिंदु है। अमेरिकी प्रशासन अब ईरान में एक ऐसी सरकार की उम्मीद कर रहा है जो पश्चिम के साथ सहयोग करे। हालांकि, यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है यदि ईरान एक अधिक हिंसक और अनियंत्रित परमाणु शक्ति के रूप में उभरता है। बेंजामिन नेतन्याहू के लिए, यह उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी जीत है। उन्होंने उस ‘अस्तित्वगत खतरे’ को समाप्त कर दिया है जो दशकों से इजरायल के विनाश की शपथ लेता था।
अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु मध्य पूर्व के इतिहास में एक नया युग शुरू करने जा रही है। 40 दिनों के शोक के बाद जब धूल जम जाएगी, तब दुनिया के सामने एक अलग ईरान होगा। क्या यह ईरान अधिक लोकतांत्रिक होगा, या यह प्रतिशोध की आग में जलकर तृतीय विश्व युद्ध की चिंगारी बनेगा?
ईरान के लोगों के लिए, यह समय भय और उम्मीद दोनों का है। 37 साल के शासन का अंत रक्तपात के साथ हुआ है, और अब गेंद तेहरान की सड़कों और वहां के बचे हुए सैन्य नेतृत्व के पाले में है। वैश्विक समुदाय के लिए, चुनौती यह है कि इस नेतृत्व शून्य को कैसे संभाला जाए ताकि क्षेत्र पूरी तरह से अराजकता में न डूब जाए।



